केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के विशेषज्ञ पैनल ने भूमिगत कोयला गैसीकरण (Underground Coal Gasification) परियोजनाओं के लिए न्यूनतम संचालन गहराई की सीमा में छूट देने से इनकार कर दिया है।
- केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने शोध एवं विकास (R&D) पायलट परियोजनाओं के लिए 300 मीटर की न्यूनतम गहराई की शर्त को हटाने का अनुरोध किया था।
कोयला गैसीकरण के बारे में
- प्रक्रिया: इसमें ठोस कोयले को सीधे दहन की बजाय ऊष्मा, दाब और भाप या ऑक्सीजन की सहायता से सिंथेटिक गैस (Syngas) में बदला जाता है।
- इस सिनगैस में मुख्य रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड होती हैं।
- महत्व: यह ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाता है, और कोयला के पारंपरिक दहन की तुलना में कम सल्फर उत्सर्जन वाला अधिक स्वच्छ विकल्प प्रदान करता है।
- मुख्य पहल: केंद्रीय कोयला मंत्रालय के राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन का लक्ष्य 2030 तक 100 मिलियन टन (MT) कोयले का गैसीकरण करना है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इसरो के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) के सहयोग से 2025–26 के लिए प्रथम राष्ट्रीय राजमार्ग-हरित आवरण सूचकांक' (NH-GCI) जारी किया है।
सूचकांक के मुख्य बिंदु
- कवरेज: जुलाई और दिसंबर 2024 के बीच की अवधि के लिए 24 राज्यों में लगभग 30,000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों को शामिल किया गया है।
- यह साल-दर-साल हरित आवरण (green cover) में सुधारों पर नजर रखेगा।
- उपग्रह-आधारित कार्यप्रणाली: रिसोर्ससैट-2/2A और कार्टोसैट-2S के उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले उपग्रह सेंसरों के माध्यम से पर्णहरित (chlorophyll) की मात्रा का पता लगाकर हरित आवरण का आकलन किया जाता है।
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने “'हथियारों के अंतर्राष्ट्रीय हस्तांतरण के रुझान 2025" (Trends in International Arms Transfers 2025)” शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की।
- सिपरी एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय संस्थान है। यह संघर्ष, हथियार, हथियार नियंत्रण और निरस्त्रीकरण से संबंधित विषयों पर शोध करता है।
रिपोर्ट के मुख्य मुख्य बिंदु
- भारत दूसरा सबसे बड़ा आयातक: 2021–25 के दौरान भारत वैश्विक स्तर पर मुख्य हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा आयातक रहा। पहले स्थान पर यूक्रेन था।
- इस अवधि में भारत का हिस्सा कुल वैश्विक हथियार आयात का 8.2% था।
- 2016–2020 और 2021–2025 की अवधि के बीच भारत द्वारा कुल हथियार आयात में 4.0% की कमी दर्ज की गई। यह कमी आंशिक रूप से भारत में ही हथियारों के डिजाइन और उत्पादन क्षमता में वृद्धि के कारण हुई है।
- शीर्ष आपूर्तिकर्ता: 2021–25 के दौरान भारत के लिए प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता थे: रूस (40%), फ्रांस (29%) और इजरायल (15%)।
- पश्चिमी देशों की ओर झुकाव: हथियारों के आयात के मामले में पिछले एक दशक में भारत ने रूस पर निर्भरता को कम करते हुए पश्चिमी देशों की ओर रुख किया है, विशेष रूप से फ्रांस, इजरायल और अमेरिका की ओर।
किम्बर्ली प्रोसेस के बारे में
- शुरुआत: किम्बर्ली प्रोसेस प्रमाणन योजना (KPCS) की शुरुआत 2003 में हुई।
- भागीदार: यह त्रिपक्षीय पहल है, जिसमें सरकारें, अंतरराष्ट्रीय हीरा उद्योग, और नागरिक समाज शामिल हैं।
- उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य “कनफ्लिक्ट डायमंड” के व्यापार को रोकना है।
- कॉन्फ्लिक्ट डायमंड्स से तात्पर्य उन कच्चे हीरों से है जिनका उपयोग विद्रोही समूहों या उनके सहयोगियों द्वारा उन संघर्षों के वित्तपोषण के लिए किया जाता है जो वैध सरकारों को कमजोर करते हैं।
- कार्यप्रणाली:
- सभी अंतरराष्ट्रीय कच्चे हीरों की खेप के साथ छेड़छाड़-रोधी किम्बर्ली प्रोसेस प्रमाणपत्र (KP Certificate / KPCS) होना अनिवार्य है।
- केवल प्रमाणित सदस्य देशों के बीच ही हीरों का व्यापार किया जा सकता है।
- वैश्विक विस्तार: इसमें 60 भागीदार शामिल हैं।
- ये किम्बर्ली प्रोसेस प्रमाणन योजना (KPCS) के माध्यम से वैश्विक कच्चे हीरा व्यापार के 99% से अधिक हिस्से को नियंत्रित करते हैं।
भारतीय सशस्त्र बलों का एक दल लामितिये अभ्यास 2026 में भाग लेने के लिए सेशेल्स पहुँचा।
लामितिये अभ्यास के बारे में
- यह भारत और सेशेल्स के बीच प्रत्येक दो वर्षों पर आयोजित होने वाला संयुक्त सैन्य अभ्यास है।
- वर्ष 2026 के संस्करण में भारत की ओर से पहली बार तीनों सेनाएं भाग ले रही हैं।
ह्यूमन राइट्स वॉच ने लेबनान में इजरायल द्वारा सफेद फास्फोरस (White Phosphorus) के उपयोग की पुष्टि करने का दावा किया है। यह एक प्रकार का रासायनिक हथियार है।
सफेद फास्फोरस के बारे में
- गुणधर्म: यह एक पारभासी (translucent), पीले-सफेद रंग का मोम जैसा ठोस पदार्थ है।
- यह अंधेरे में चमकता है (केमिलुमिनेसेंस) और हवा के संपर्क में आते ही तुरंत जलने लगता है।
- मुख्य खतरे: यह मनुष्यों के लिए अत्यधिक विषाक्त है। यह त्वचा और गहरे ऊतकों में गंभीर जलन पैदा करता है, और यदि इसे सांस के जरिए अंदर लिया जाए या निगल लिया जाए, तो यह शरीर के आंतरिक अंगों को भारी नुकसान पहुंचाता है।
- हथियार के रूप में उपयोग: मुख्य रूप से स्मोक स्क्रीन (धुएं का पर्दा) बनाने और रोशनी के लिए आग जलाने वाले पदार्थ के रूप में उपयोग किया जाता है।
- विनियमन: इसे स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित नहीं किया गया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत इसका उपयोग वर्जित है।