हाल के वर्षों में, कई डिजिटल पहल शुरू की गई हैं, जिन्होंने भारत में 'व्यवसाय करने की सुगमता’ को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
प्रमुख डिजिटल पहलें
- व्यवसाय पंजीकरण और विनियमन
- MCA21 वर्जन 3: ई-स्क्रूटनी और ई-निर्णय (e-adjudication) सुविधाओं के साथ एंड-टू-एंड रजिस्ट्री सेवाओं के लिए एक AI-संचालित प्लेटफॉर्म।
- SPICe+ फॉर्म: 10 आवश्यक प्रक्रियाओं (जैसे DIN, PAN, TAN और GSTIN) को एक एकल वेब फॉर्म में समेकित करता है।
- अन्य: MSME पंजीकरण के लिए उद्यम पोर्टल; अनुपालन बोझ को कम करने के लिए बिजनेस रिफॉर्म्स एक्शन प्लान।
- निकासी और पर्यावरणीय मंजूरी
- PARIVESH 3.0: सुव्यवस्थित पर्यावरणीय एवं वन मंजूरी के लिए AI और GIS-आधारित लैंड बैंक का उपयोग करता है।
- e-Gram SWARAJ: विकास निधि के उपयोग की ट्रैकिंग के लिए।
- राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली (NSWS) 32 केंद्रीय विभागों और राज्यों में अनुमोदन प्रदान करती है।
- कराधान और व्यापार सुविधा
- GSTN और ई-वे बिल: स्वचालित कराधान तंत्र जो ₹102.91 लाख करोड़ के भुगतान को संभाल रहा है; ई-वे बिलों में 21% की वृद्धि हुई है आदि।
- TReDS (व्यापार प्राप्य बट्टा प्रणाली): MSME लिक्विडिटी (नकदी प्रवाह) के लिए TReDS की सुविधा देने वाला इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म।
- लॉजिस्टिक्स और बाजार पहुंच
- पीएम गतिशक्ति NMP: लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने और अंतिम-मील कनेक्टिविटी में सुधार के लिए स्थानिक योजना (spatial planning) डेटा का उपयोग करता है।
- ULIP (यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म): वास्तविक समय में कार्गो ट्रैकिंग के लिए विभिन्न मंत्रालयों की 35+ प्रणालियों को एकीकृत करता है।
- डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)
- यूनिफाइड इंटरफेस: APIs (एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस) सेतु के रूप में कार्य करते हैं, जिससे निर्बाध डेटा प्रवाह संभव होता है।
- स्केलेबल भुगतान: GSTN और UPI बड़े पैमाने पर लेन-देन की मात्रा को सुगम बनाते हैं।
एक नज़र में: डिजिटल व्यवसाय सुविधा पर डेटा
|