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भारत-संयुक्त अरब अमीरात संबंध (INDIA-UAE RELATIONS)

01 Jun 2025
33 min

सुर्ख़ियों में क्यों?

हाल ही में, दुबई के क्राउन प्रिंस भारत की यात्रा पर आए थे। भारत में यह उनकी पहली राजकीय यात्रा थी।

यात्रा के दौरान की गई प्रमुख घोषणाएं

  • भारत मार्ट और वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर (VTC):  यह द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (India-Middle East-Europe Economic Corridor: IMEEC) को आगे बढ़ाने के लिए शुरू की गई पहल है।
    • भारत मार्ट भारत की वेयरहाउसिंग फैसिलिटी है। यह भारतीय निर्यातकों को एक ही फोरम में अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने में मदद करेगी। यह चीन के ड्रैगन मार्ट जैसा ही है।
  • शिप रिपेयर क्लस्टर (कोच्चि और वडीनार): यह विश्व की सर्वोत्तम कार्य पद्धतियों से सीखकर भारत के समुद्री क्षेत्रक के विकास में योगदान देगा। 
  • अन्य पहलें: भारत-यू.ए.ई. मैत्री अस्पताल (दुबई में), IIM अहमदाबाद का दुबई में कैंपस और दुबई चैंबर ऑफ कॉमर्स का भारत में कार्यालय खुलना वास्तव में दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करेगा।

भारत-संयुक्त अरब अमीरात द्विपक्षीय संबंधों का महत्त्व

दोनों देशों के लिए महत्त्व:

  • बढ़ते राजनीतिक संबंध: प्रधान मंत्री ने 2015 में संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा की थी, जो 34 साल में भारत के किसी प्रधान मंत्री की UAE की पहली शासकीय यात्रा थी। तब से दोनों देशों के बीच संबंध काफी मजबूत हुए हैं। पहले द्विपक्षीय संबंध क्रेता-विक्रेता का था, लेकिन अब यह व्यापक रणनीतिक साझेदारी (2017) में बदल गया है।
    • भारत की अध्यक्षता में आयोजित G-20 शिखर सम्मेलन में UAE को अतिथि देश के रूप में आमंत्रित किया गया था। इस शिखर सम्मेलन में केवल 9 अतिथि देशों को आमंत्रित किया गया था।
  • रणनीतिक वैश्विक भागीदारी: दोनों देश ब्रिक्स, I2U2 (भारत-इजराइल-UAE-संयुक्त राज्य अमेरिका) और UAE -फ्रांस-भारत (UFI) जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों में सक्रिय रूप से शामिल हैं।
  • क्षेत्रीय सहयोग में भारत-UAE  की बढ़ती भूमिका:
    • भारत-मध्य पूर्व आर्थिक (IMEEC) गलियारा: भारत और UAE के बीच भारत-मध्य पूर्व आर्थिक गलियारे पर अंतर-सरकारी फ्रेमवर्क समझौता दोनों देशों के बीच बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत बनाता है।
    • हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (IONS): इस  फोरम के तहत दोनों देश स्वतंत्र एवं मुक्त समुद्री मार्ग सुनिश्चित करने के लिए सहयोग करते हैं।
    • नौसेना के मध्य भागीदारी और संयुक्त अभ्यास: द्विपक्षीय अभ्यास: गल्फ स्टार 1 और PASSEX, डेजर्ट साइक्लोन (भारत-UAE); तथा त्रिपक्षीय अभ्यास: डेजर्ट नाइट (भारत-फ्रांस-UAE) के माध्यम से दोनों देश समुद्री क्षेत्र में सहयोग को मजबूत कर रहे हैं।

भारत के लिए महत्त्व

  • भारत के प्रमुख ऊर्जा साझेदार के रूप में UAE की महत्वपूर्ण भूमिका: उदाहरण के लिए, UAE भारत के लिए कच्चे तेल का चौथा सबसे बड़ा स्रोत है तथा LNG और LPG का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है।
    • रणनीतिक तेल भंडार: UAE इस क्षेत्र का एकमात्र ऐसा देश है जो भारत में रणनीतिक तेल भंडार रखने का प्रस्ताव किया है।  
  • मजबूत व्यापारिक संबंध: उदाहरण के लिए, वित्त वर्ष 2022-23 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 85 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। इसमें भारत से लगभग 32 बिलियन डॉलर का   वस्तु निर्यात शामिल है।
    • इससे UAE, भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और दूसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बन गया है।
  • मजबूत आर्थिक एकीकरण और निवेश: UAE एकमात्र ऐसा देश है जिसके साथ भारत का व्यापार समझौता- CEPA, 2022 और निवेश समझौता- द्विपक्षीय निवेश संधि (Bilateral Investment Treaty: BIT, 2023) दोनों हैं।
    • व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement: CEPA) का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार (तेल को छोड़कर) को 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के स्तर तक ले जाना है।
    • इसके अलावा, 2000 से 2024 तक UAE भारत में सातवां सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेशक रहा है।
  • लोगों से लोगों के बीच और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना: UAE में भारतीय प्रवासी समुदाय की संख्या लगभग 3.5 मिलियन है, जो इस देश का सबसे बड़ा नृजातीय समूह है।
    • विप्रेषण  (रेमिटेंस): वित्त वर्ष 2023-24 में भारत को प्राप्त कुल रेमिटेंस का 19.2% (लगभग 11.7 बिलियन डॉलर) UAE से प्राप्त हुआ था। इस तरह UAE भारत में रेमिटेंस का प्रमुख स्रोत है। 
    • सांस्कृतिक उपलब्धि: संयुक्त अरब अमीरात में पहला हिंदू मंदिर 'BAPS मंदिर' वास्तव में खाड़ी क्षेत्र में अपनी तरह का सबसे बड़ा मंदिर है।

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के लिए महत्त्व

  • UAE के निवेशकों के लिए भारत एक प्रमुख निवेश गंतव्य है: उदाहरण के लिए, UAE द्वारा किए गए कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में से भारत को 5% प्राप्त हुआ (2000 - 2024)।
  • CEPA के तहत UAE को भारतीय बाजार तक आसान पहुंच: CEPA के तहत, UAE से भारत में आने वाले 80% से अधिक उत्पादों पर टैरिफ को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने का प्रस्ताव किया गया है।
    • उदाहरण के लिए, CEPA के बाद, UAE से भारत को निर्यात में 7% की वृद्धि दर्ज की गई।
  • UAE की खाद्य सुरक्षा में भारत की भूमिका: UAE में कृषि गतिविधियों के लिए सीमित अवसर हैं क्योंकि वहां केवल 0.7% भूमि कृषि योग्य है। जाहिर है कि UAE  खाद्य वस्तुओं के आयात पर अत्यधिक निर्भर है। दूसरी ओर भारत कृषि प्रधान देश है और इसलिए वह UAE की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
    • उदाहरण के लिए, एग्रीओटा (Agriota) जैसे प्लेटफ़ॉर्म भारतीय किसानों को सीधे UAE  के बाजारों से जोड़ते हैं।

भारत-UAE संबंधों में मौजूद चुनौतियां

  • प्रवासन और श्रम संबंधी मुद्दे: UAE की कफाला प्रणाली की काफी आलोचना की जाती है, क्योंकि इस प्रणाली के बहाने प्रवासी श्रमिकों का शोषण और उनके अधिकारों का हनन किया जाता है।
    • कफाला प्रणाली खाड़ी देशों में स्पॉन्सरशिप-आधारित श्रम प्रणाली है। इस प्रणाली में, विदेशी श्रमिकों को उनके नियोक्ता द्वारा स्पॉन्सर किया जाता है, जो श्रमिकों की कानूनी स्थिति, वीज़ा और रोजगार की शर्तों पर नियंत्रण रखते हैं।
  • व्यापार असंतुलन: वित्त वर्ष 2022 में, UAE के साथ भारत का व्यापार घाटा 16.78 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया था।
  • तेल  मूल्य निर्धारण और ओपेक देशों के बीच असहमति: UAE ओपेक का सदस्य है, इसलिए वह उन नीतियों का समर्थन करता है जो भारत के हितों से मेल नहीं खाते हैं, खासकर जब तेल की कीमतों को कम करने की बात आती है। गौरतलब है कि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है।
  • वायु सेवा समझौता विवाद: UAE भारत में अपनी उड़ानों और उड़ान स्थलों (भारत में अधिक एयरपोर्ट्स पर) की संख्या बढ़ाना चाहता है, लेकिन भारत अपनी घरेलू एयरलाइन्स कंपनियों के के आर्थिक हितों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। 
  • क्षेत्रीय संकट: गाजा में युद्ध संकट और लाल सागर में हूती विद्रोहियों के हमलों ने भारत-मध्य पूर्व गलियारा सहित कुछ अन्य क्षेत्रीय सहयोग परियोजनाओं को प्रभावित किया है।
  • भारत-ईरान बनाम UAE-चीन संबंध: ईरान के साथ विशेष रूप से क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा हितों के मामले में भारत के रणनीतिक संबंध UAE को खटकता है वहीं UAE के चीन के साथ बढ़ते संबंध भारत को पसंद नहीं है।

निष्कर्ष

भारत-संयुक्त अरब अमीरात संबंध अब रणनीतिक साझेदारी का स्वरूप ले चुका है। दोनों देशों के बीच मजबूत होते व्यापार संबंध और सहयोग इसके परिचायक हैं। हालांकि, भू-राजनीतिक संतुलन, ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी चिंताओं और प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं से सावधानीपूर्वक निपटने की आवश्यकता है।

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