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भारत की ग्रीन हाइड्रोजन प्रमाणन योजना

01 Jun 2025
16 min

सुर्ख़ियों में क्यों?

हाल ही में, केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री ने भारत की ग्रीन हाइड्रोजन प्रमाणन योजना (GHCI) का शुभारंभ किया।

भारत की ग्रीन हाइड्रोजन प्रमाणन योजना (GHCI) के बारे में

  • इसे राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) के तहत शुरू किया गया है।
  • उद्देश्य: इसका उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन (GH) के उत्पादन के लिए बेहतर प्रमाणन प्रणाली तैयार करना है, जिससे पारदर्शिता, ट्रेसेबिलिटी और बाजार में विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।
    • यह ग्रीन हाइड्रोजन और इसके डेरिवेटिव्स के मापन, निगरानी, रिपोर्टिंग, ऑनसाइट सत्यापन और प्रमाणन के लिए विस्तृत पद्धति विकसित करने में मदद करेगा।
  • क्रियान्वयन मंत्रालय: केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
  • हाइड्रोजन उत्पादन की पात्र पद्धतियां: इलेक्ट्रोलिसिस और बायोमास का रूपांतरण
  • सत्यापन: ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादकों को किसी मान्यता प्राप्त कार्बन सत्यापन (ACV) एजेंसी से प्रतिवर्ष सत्यापन कराना होगा।
  • ग्रीन प्रमाणन: यह तभी प्रदान किया जाएगा, जब प्रत्येक एक किलोग्राम ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन पर ग्रीन हाउस उत्सर्जन 2 किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन के बराबर या उससे कम हो।
    • यह प्रमाणन गैर-हस्तांतरणीय है और व्यापार योग्य नहीं है। साथ ही, इसे किसी भी अन्य स्रोतों से उत्सर्जन में कटौती से प्राप्त क्रेडिट हेतु दावे के रूप में प्रस्तुत भी नहीं किया जा सकता है।

ग्रीन हाइड्रोजन (GH) क्या है?

  • यह इलेक्ट्रोलिसिस के माध्यम से उत्पादित हाइड्रोजन है। इस प्रक्रिया में सौर ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न बिजली का उपयोग करके जल के अणुओं (H2O) को हाइड्रोजन (H2) और ऑक्सीजन (O2) में विभाजित किया जाता है।
    • इसका उत्पादन बायोमास के गैसीकरण (Gasification) की सहायता से भी किया जाता है।
  • प्रमुख उपयोग: फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक वाहन (FCEVs) में, उद्योग (उर्वरक रिफाइनरी) में, परिवहन (सड़क, रेल) में, आदि।

राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM), 2023 के बारे में

  • उद्देश्य: भारत को ग्रीन हाइड्रोजन और इसके डेरिवेटिव्स के उत्पादन, उपयोग और निर्यात के लिए वैश्विक केंद्र बनाना।
  • योजना की अवधि: चरण I (2022-23 से 2025-26) और चरण II (2026-27 से 2029-30)
  • मुख्य घटक:
    • निर्यात और घरेलू उपयोग बढ़ाकर ग्रीन हाइड्रोजन की मांग में वृद्धि करना।
    • स्ट्रैटेजिक इंटरवेंशंस फॉर ग्रीन हाइड्रोजन ट्रांजिशन (SIGHT) प्रोग्राम: इसमें इलेक्ट्रोलाइजर के विनिर्माण और ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए प्रोत्साहन शामिल हैं। 
    • इस्पात, मोबिलिटी, शिपिंग, विकेन्द्रीकृत ऊर्जा उपयोग, बायोमास से हाइड्रोजन उत्पादन, हाइड्रोजन भंडारण आदि के लिए पायलट परियोजनाओं को संचालित करना। 
    • ग्रीन हाइड्रोजन हब का विकास करना।
    • ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र के लिए विनियमन और मानकों का एक मजबूत फ्रेमवर्क स्थापित करना। 
    • अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रम। 

निष्कर्ष

भारत में ग्रीन हाइड्रोजन की पूरी क्षमता का उपयोग करने के लिए बहुआयामी तरीका अपनाना आवश्यक है। इसमें उत्पादन लागत को कम करना, इलेक्ट्रोलाइजर के विनिर्माण के लिए आवश्यक प्रोत्साहन प्रदान करना, अनुसंधान एवं विकास में निवेश करना, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को बढ़ावा देना, आदि शामिल होना चाहिए।

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