बॉडी शेमिंग के नैतिक आयाम | Current Affairs | Vision IAS
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

ESC

बॉडी शेमिंग के नैतिक आयाम

01 Jun 2025
38 min

परिचय

बॉडी शेमिंग का अर्थ है किसी व्यक्ति की शारीरिक बनावट, आकार, रूप या उसकी हाव-भाव के आधार पर उसकी आलोचना या उपहास करना। यह किसी के साथ भी हो सकता है, और कोई भी इसका शिकार बन सकता है।

जैसे-जैसे आरोग्यता और सुंदरता का तेजी से व्यवसायीकरण हो रहा है, वैसे-वैसे मार्केटिंग में अक्सर बॉडी इमेज को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जाने लगा है। उदाहरण के लिए, एक थाई कैफे ने पतले ग्राहकों को छूट दी, जिससे शरीर के आकार को पुरस्कृत करने से जुड़े नैतिक मुद्दे सामने आए। इस तरह की रणनीति हानिरहित लग सकती है, लेकिन यह गरिमा, समानता और मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंताएं उत्पन्न  करती है - खासकर भारत जैसे विविधतापूर्ण समाज में।

बॉडी इमेज शेमिंग को बढ़ावा देने वाले सामाजिक-सांस्कृतिक कारक

  • सुंदरता के अव्यवहारिक मानक: बॉलीवुड फिल्में और फेयरनेस क्रीम के विज्ञापनों सहित लोकप्रिय संस्कृति, गोरा रंग और पतले शरीर जैसे सुंदरता के संकीर्ण आदर्शों को बढ़ावा देती है।
    • यह बात अच्छे से दर्ज की गई है कि जब लोग शरीर के इन आदर्श मानकों से मेल खाने की कोशिश करते हैं, तो यह उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इन मानकों को हासिल करने के लिए लोग अक्सर अनहेल्दी व्यवहार अपनाते हैं, जैसे- अत्यधिक डाइटिंग, वजन घटाने के लिए हानिकारक तरीके अपनाना, या भोजन संबंधी विकारों का शिकार होना, आदि।
  • मीडिया और सोशल मीडिया का दबाव: इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म अक्सर फिल्टर और एडिटेड इमेज के माध्यम से अव्यवहारिक सुंदरता को बढ़ावा देते हैं, जिससे लोगों को लगता है कि उन्हें भी एकदम परफेक्ट दिखना चाहिए।
    • उदाहरण के लिए, ऑनलाइन वजन घटाने की सलाह से प्रभावित होकर केरल की एक 18 वर्षीय लड़की उपवास गतिविधियों में शामिल हो गई। वह वाटर फास्टिंग कर रही थी, जिसके कारण उसकी मौत हो गई।
  • सांस्कृतिक और पारिवारिक पूर्वाग्रह: महिलाओं को अक्सर उनके रंग-रूप के आधार पर महत्व दिया जाता है, जबकि पुरुषों की मस्कुलर या लंबे कद वाला होने के आधार पर प्रशंसा की जाती है।
    • कई भारतीय घरों में, लड़कियों को शादी के अच्छे रिश्ते के लिए वजन कम करने या गोरा होने का सुझाव दिया जाता है। काले रंग या अधिक वजन को आकर्षक नहीं समझा जाता, जो कि पूरी तरह गलत एवं भेदभावपूर्ण है।
  • साथियों और सामाजिक स्थिति का दबाव: कई बार स्कूल में बच्चों के बीच मस्ती और कॉलेज में चुटकुले किसी के शारीरिक रूप पर भी आधारित होते हैं। इस तरह के मजाक और बॉडी शेमिंग से यह संदेश जाता है कि किसी का रूप ही उसकी असली पहचान है। यह बचपन से ही यह सोच को सामान्य बना देता है कि किसी के रूप-रंग या आकार के आधार पर उसे आंका जाए।
    • बॉडी-पॉजिटिव से संबंधित शिक्षा की कमी इसका मुख्य कारण है।

नैतिक फ्रेमवर्क और उल्लंघन

  • कांट का नैतिक सिद्धांत: अगर हम किसी व्यक्ति को सिर्फ उसके शरीर या रूप के आधार पर आंकते हैं और उसे एक उत्पाद या मुनाफे का साधन मानते हैं, तो यह उसकी मानवीय गरिमा एवं आत्म-मूल्य का अपमान है। यह उसे एक इंसान नहीं, बल्कि एक 'उपयोग की वस्तु' बना देता है – जो कि नैतिक रूप से गलत है।
  • उपयोगितावाद: ऐसे प्रचार या व्यवहार से भले ही थोड़े समय के लिए व्यापार को फायदा हो, लेकिन वे मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, रूढ़ियों और भेदभाव के माध्यम से दीर्घकालिक नुकसान पहुंचाती हैं। इसलिए, इसे नैतिक दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता है।
  • सद्गुण आधारित नैतिकता: एक अच्छे समाज में करुणा, समावेश और सम्मान जैसे गुण होने चाहिए। यदि हम लोगों को केवल सुंदरता या शरीर के आधार पर पुरस्कृत करते हैं या उन्हें आंकते हैं, तो इससे घमंड, अहंकार और दूसरों को छोटा समझने की भावना पैदा होती है, जो कि नैतिक रूप से दोषपूर्ण है।
  • निष्पक्षता के रूप में न्याय (रॉल्स):  इन प्रथाओं की असल चुनौती यह है कि ये निष्पक्षता की कसौटी पर खरी नहीं उतरतीं। यदि कोई व्यक्ति यह न जानता हो कि उसका शरीर किस प्रकार का है, तो वह कभी भी ऐसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेगा जो शारीरिक बनावट के आधार पर भेदभाव करती हो। इस तरह की भेदभावपूर्ण प्रणाली, समानता और न्याय के मूलभूत सिद्धांतों को कमजोर करती है।

शामिल प्रमुख हितधारक

हितधारकभूमिका/ हित
समाजसमानुभूति दिखाना, समावेशिता, और विविधता के प्रति सम्मान को बढ़ावा देना।
मीडिया और इन्फ़्ल्युएन्सर्स नैतिक जिम्मेदारी, अस्वास्थ्यकर सौंदर्य मानकों को बढ़ावा देने से बचना, समावेशी संदेशों को अपनाना।
व्यवसाय/ मार्केटिंगनैतिकता परक विज्ञापन, ग्राहक का विश्वास बनाए रखना, और अल्पकालिक लाभ की बजाय ब्रांड की दीर्घकालीन छवि पर ध्यान देना।
स्वास्थ्य पेशेवरबॉडी इमेज से जुड़ी समस्याओं, ईटिंग डिसऑर्डर और मानसिक तनाव की स्थिति में सहयोग देना।
सरकारहानिकारक कंटेंट को विनियमित करना, मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना, और विज्ञापन के नैतिक मानकों को लागू करना।

आगे की राह

  • मजबूत विनियम: ऐसे विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानूनों को लागू करना जो शरीर आधारित भेदभाव को बढ़ावा देते हैं। स्कूलों और सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों में शारीरिक विविधता आधारित शिक्षा को शामिल करना चाहिए।
  • मीडिया जागरूकता: लोगों को अव्यवहारिक सौंदर्य मानकों को पहचानने और उन पर सवाल उठाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। ऐसे अभियानों का समर्थन करना चाहिए जो वास्तविक, विविध शारीरिक संरचनाओं का सम्मान करते हैं।
    • उदाहरण: डव (Dove) के "कैंपेन फॉर रियल ब्यूटी" ने सभी उम्र, रंग और शारीरिक आकार की महिलाओं को प्रदर्शित करके रूढ़ियों को तोड़ा है, जिसने सुंदरता के अर्थ में फिर से नया आयाम शामिल किया है।
  • नैतिक मार्केटिंग: कंपनियों को समावेशिता पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और ऐसे कंटेंट से बचना चाहिए जो शारीरिक बनावट को शर्मसार करते हैं। हानिकारक मैसेज का प्रसार करने के लिए इन्फ्लुएंसर और ब्रांडों को जवाबदेह ठहराना चाहिए।
  • मानसिक स्वास्थ्य और संवाद: बॉडी शेमिंग से प्रभावित लोगों के लिए मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करनी चाहिए।
  • माता-पिता की भूमिका: 
    • बॉडी पॉजिटिव सोच को बढ़ावा दें।
    • बच्चों की शारीरिक बनावट पर टिप्पणी करने से बचें।
    • उनके अंदरूनी गुणों की सराहना करें।
    • हर तरह के शरीर के प्रति सम्मान सिखाएं
    • भावनात्मक अभिव्यक्ति का समर्थन करें।
    • सौंदर्य संबंधी अनावश्यक अपेक्षा न रखें।
  • स्कूलों की भूमिका: स्कूल बच्चों में स्थायी आत्मविश्वास बनाने के लिए बॉडी इमेज आधारित शिक्षा प्रदान कर सकते हैं और वजन घटाने की बजाय मानसिक और शारीरिक कल्याण को बढ़ावा दे सकते हैं।

निष्कर्ष

बॉडी शेमिंग को समाप्त करना एक साझा जिम्मेदारी है। इसलिए मीडिया, संस्थाओं और हर व्यक्ति को मिलकर काम करना होगा ताकि दिखावट पर ध्यान देने की जगह स्वीकार्यता को बढ़ावा दिया जा सके। सच्ची प्रगति तभी होगी जब हम लोगों को उनके स्वभाव और अच्छे गुणों से पहचानें, न कि उनके रंग, आकार या शरीर से। हमें ऐसा समाज बनाना चाहिए जहाँ हर किसी को सम्मान और गरिमा के साथ देखा और समझा जाए।

अपनी नैतिक अभिक्षमता का परीक्षण कीजिए

थाईलैंड के एक कैफे ने पतले ग्राहकों को संकरी सलाखों से गुजरने पर छूट दी, जिससे बॉडी शेमिंग को बढ़ावा देने के लिए उसकी आलोचना हुई। भारत में, जहां सौंदर्य मानक पहले से ही गोरे, पतले या मस्कुलर शरीरों के पक्ष में हैं, ऐसी प्रथाएं सुभेद्य समूहों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। मीडिया और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म द्वारा आदर्श रूप-रंगों को बढ़ावा देने के साथ, बॉडी इमेज अब एक व्यावसायिक साधन बन गया है - जिससे युवाओं, महिलाओं और हाशिए पर मौजूद समुदायों के लिए गंभीर नैतिक चिंताएं उत्पन्न होती हैं।

आप एक राष्ट्रीय विनियामक निकाय में एक वरिष्ठ अधिकारी हैं जिसे एक भारतीय कैफे चेन से उपर्युक्त के समान "फिट-टू-सेव" प्रचार अभियान चलाने के प्रस्ताव की समीक्षा करने का काम सौंपा गया है। आपको चिंता है कि ऐसी प्रथाएं शरीर-आधारित भेदभाव को आम बना सकती हैं और एक हानिकारक मिसाल कायम कर सकती हैं।

उपर्युक्त केस स्टडी के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

  1. इस मामले में शामिल नैतिक मुद्दों की पहचान कीजिए।
  2. सुझाव दीजिए कि एक विनियामक प्राधिकरण के रूप में आप किस कार्रवाई की सिफारिश करेंगे।

Explore Related Content

Discover more articles, videos, and terms related to this topic

Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet