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प्रसन्नता (HAPPINESS)

30 Apr 2026
1 min

In Summary

  • फिनलैंड लगातार नौवें वर्ष विश्व का सबसे खुशहाल देश बना हुआ है; भारत 116वें स्थान पर आ गया है, जो नेपाल और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से पीछे है।
  • रिपोर्ट में सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग को युवाओं के स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण में गिरावट से जोड़ा गया है।
  • नैतिक शासन, समावेशी विकास और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना भारत के नागरिकों की खुशी के लिए महत्वपूर्ण हैं।

In Summary

भूमिका

हाल ही में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के 'वेलबीइंग रिसर्च सेंटर' ने गैलप और संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समाधान नेटवर्क के सहयोग से वार्षिक विश्व प्रसन्नता रिपोर्ट (WHR), 2026 प्रकाशित की है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • फिनलैंड ने लगातार नौवें वर्ष दुनिया के सबसे खुशहाल देश के रूप में अपना स्थान बरकरार रखा है।
  • वर्ष 2026 में भारत की रैंकिंग में आंशिक सुधार देखा गया है, जो 2025 के 118वें स्थान से सुधरकर 116वें स्थान पर पहुँच गई है। 
    • दक्षिण एशिया में, भारत अभी भी अपने कई पड़ोसियों से पीछे है, उदाहरण के लिए नेपाल 99वें और पाकिस्तान 104वें स्थान पर है।
  • यह रिपोर्ट आय, सामाजिक सहयोग, स्वस्थ जीवन प्रत्याशा, जीवन के विकल्प चुनने की स्वतंत्रता, उदारता और भ्रष्टाचार की धारणा जैसे प्रमुख कारकों के आधार पर देशों को रैंक करती है। 
  • रिपोर्ट सचेत करती है कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग युवाओं के कल्याण में गिरावट और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का एक बड़ा कारण है। 

प्रसन्नता क्या है?

प्रसन्नता एक बहुआयामी अवधारणा है जिसके अर्थ विभिन्न संस्कृतियों में भिन्न हो सकते हैं। 'विश्व प्रसन्नता रिपोर्ट' इसे मापने के लिए 'कैंट्रिल लैडर' (Cantril Ladder) पैमाने का उपयोग करती है, जहाँ व्यक्ति अपने जीवन की गुणवत्ता को 0 से 10 के बीच अंक देते हैं। यह प्रसन्नता को जीवन की गुणवत्ता के एक व्यापक मूल्यांकन के रूप में देखती है। 

प्रसन्नता को समझने के लिए वैचारिक ढांचा 

  • उपनिषद परंपरा में, आनंद (Bliss) अंतिम वास्तविकता 'ब्रह्म' के तीन अनिवार्य गुणों में से एक है; इसके अन्य दो अंग सत् (अस्तित्व) और चित् (चेतना) हैं।
    • ये तीनों पहलू ब्रह्म के मूल स्वभाव को निर्मित करते हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से "सच्चिदानंद" (तैत्तिरीय उपनिषद) के रूप में व्यक्त किया जाता है।
  • शास्त्रीय पश्चिमी दर्शन, विशेषकर अरस्तू की यूडिमोनिया (Eudaimonia) की अवधारणा, प्रसन्नता को मात्र इंद्रियजन्य सुख या भौतिक संपदा नहीं मानती। इसके बजाय, यह नैतिक सद्गुणों, तर्कसंगत गतिविधियों और उत्तरदायी सामाजिक सहभागिता से प्राप्त एक 'समृद्ध जीवन' है।
  • बौद्ध विचार परम प्रसन्नता को निर्वाण (ज्ञानोदय) के रूप में परिभाषित करते हैं; यह वह अवस्था है जो सांसारिक आसक्तियों पर विजय प्राप्त करने और दुखों की निवृत्ति से उत्पन्न आंतरिक शांति एवं संतोष से प्राप्त होती है।
  • भूटान के लिए, जिसने "सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता" (GNH) शब्द गढ़ा है, प्रसन्नता कल्याण का एक बहुआयामी माप है। यह दृष्टिकोण जानबूझकर पश्चिम के विशुद्ध भौतिकवादी मानकों को अस्वीकार करता है।
  • उपयोगितावाद (जेरेमी बेंथम द्वारा प्रतिपादित) में प्रसन्नता ही 'सर्वोच्च शुभ' है। इसके अनुसार, कार्यों का लक्ष्य अधिकतम व्यक्तियों के लिए अधिकतम प्रसन्नता सुनिश्चित करना होना चाहिए।
  • शून्यवाद (फ्रेडरिक नीत्शे) में प्रसन्नता एक भ्रम है। यहाँ व्यक्ति को प्रसन्नता की खोज के लिए स्वयं का व्यक्तिपरक अर्थ निर्मित करना पड़ता है।
  • मध्यस्थ दर्शन (ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित) में प्रसन्नता को "अद्वैत (द्वंद्व-रहित), तालमेल, या स्वीकृति की स्थिति" के रूप में परिभाषित किया गया है। यह वह स्थिति है जहाँ व्यक्ति स्वयं के भीतर और बाहरी विश्व के साथ सामंजस्य में होता है, जिसके लिए बौद्धिक समाधान (सही समझ) और भौतिक समृद्धि दोनों अनिवार्य हैं।

WHR में भारत की निम्न रैंकिंग से जुड़ी नैतिक चिंताएं

विश्व प्रसन्नता रिपोर्ट (WHR) में भारत की स्थिति एक गहरे विरोधाभास को दर्शाती है - जहाँ एक ओर उच्च आर्थिक विकास दर है, वहीं दूसरी ओर प्रसन्नता का स्तर मध्यम बना हुआ है। यह अंतर निम्नलिखित नैतिक संकटों की ओर संकेत करता है:

  • असमानता और न्याय: आर्थिक लाभ का वितरण असमान है।
    • यह जॉन रॉल्स के वितरणात्मक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन करता है।
  • विश्वास की कमी: भ्रष्टाचार की व्यापक धारणा और संस्थागत विश्वास में गिरावट।
    • यह शासन की नैतिक वैधता को कमजोर करता है।
  • सामाजिक विखंडन: बढ़ता व्यक्तिवाद और सामाजिक तनाव।
    • इससे सामुदायिक बंधनों और सहानुभूति में कमी आ रही है। 
  • मानसिक कल्याण संकट: तनाव, बेरोजगारी और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग।
    • इसमें भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक गरिमा की उपेक्षा देखी जा रही है। 

भारत अपने नागरिकों की प्रसन्नता कैसे सुनिश्चित कर सकता है?

  • नैतिक शासन को बढ़ावा देना: पारदर्शिता, जवाबदेही सुनिश्चित करना और भ्रष्टाचार कम करना।
    • उदाहरण: डिजिटल इंडिया पहल (ई-गवर्नेंस, डीबीटी) लीकेज कम करती है और विश्वास बढ़ाती है।
  • सामाजिक पूंजी को मजबूत करना: आपसी विश्वास, सामुदायिक भागीदारी और सामाजिक सद्भाव का निर्माण करना।
    • उदाहरण: स्वयं सहायता समूह (SHGs) और समुदाय के नेतृत्व वाले कार्यक्रम एकजुटता और पारस्परिक समर्थन को बढ़ाते हैं।
  • समावेशी विकास पर ध्यान देना: आर्थिक असमानता को कम करना और अंतिम छोर तक सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
    • उदाहरण: आकांक्षी जिला कार्यक्रम समग्र विकास के लिए पिछड़े क्षेत्रों को लक्षित करता है।
  • मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को प्राथमिकता: भौतिक आवश्यकताओं से परे प्रसन्नता को एक मौलिक आवश्यकता के रूप में पहचानना।
    • उदाहरण: राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम और कार्यस्थल कल्याण पहल, जो तनाव एवं अवसाद का समाधान करती हैं।
  • मूल्य-आधारित शिक्षा: छात्रों में सहानुभूति, नैतिकता और नागरिक जिम्मेदारी के बोध को विकसित करना।
    • उदाहरण: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत जीवन कौशल और संस्कार आधारित शिक्षा की शुरुआत।

स्कूलों में प्रसन्नता की शिक्षा

  • प्रमुख उदाहरण
    • भारत: 2018 में शुरू किया गया दिल्ली 'हैप्पीनेस करिकुलम' (खुशी पाठ्यक्रम) प्रतिदिन लगभग 8 लाख छात्रों तक पहुँचता है। यह माइंडफुलनेस, कहानी सुनाने और चिंतनशील गतिविधियों पर केंद्रित है।
    • यूनेस्को "हैप्पी स्कूल्स": यह एक वैश्विक फ्रेमवर्क है जो देशों को मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक लचीलेपन को बेहतर बनाने के लिए रटने की तुलना में "आनंददायक शिक्षण" (Joyful Learning) को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित करता है।
    • लैटिन अमेरिका: चिली और मैक्सिको जैसे देशों ने बड़े पैमाने पर 'वेल-बीइंग' (कल्याण) पाठ्यक्रम लागू किए हैं।
  • छात्रों पर प्रभाव
    • बेहतर एकाग्रता: माइंडफुलनेस अभ्यास चिंता को कम करने और कक्षा में ध्यान केंद्रित करने में मदद करते हैं।
    • भावनात्मक नियंत्रण: छात्र तनावपूर्ण समय के दौरान गुस्से को प्रबंधित करने और साथियों या परिवार के सदस्यों का समर्थन करने की बेहतर क्षमता की रिपोर्ट करते हैं।
    • व्यवहार संबंधी समस्याओं में कमी: स्कूलों ने बुलिंग (धौंस जमाना), आक्रामक व्यवहार और बिना बताए स्कूल से अनुपस्थित रहने (ट्रुएंसी) की घटनाओं में गिरावट दर्ज की है।
    • शैक्षणिक लाभ: खुश रहने वाले छात्र अक्सर उच्च स्तर की आत्म-प्रभावकारिता और बेहतर याददाश्त दिखाते हैं, जिससे कल्याण और उपलब्धि के बीच एक "सद्गुण चक्र" (virtuous cycle) बनता है।
      • उदाहरण के लिए: चिली (2024) में हुए शोध में पाया गया कि जो छात्र "स्कूल में खुश" होने की बात कहते हैं, वे सामाजिक-आर्थिक कारकों को ध्यान में रखने के बावजूद गणित और भाषा में लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

निष्कर्ष

विश्व प्रसन्नता रिपोर्ट 2026 इस बात की पुष्टि करती है कि प्रसन्नता ही नैतिक शासन की अंतिम परीक्षा है। भारत की रैंकिंग इस बात की याद दिलाती है कि विकास को समावेशी, दयालु और न्यायपूर्ण होना चाहिए। एक वास्तविक नैतिक राष्ट्र वह है जहाँ नागरिक न केवल लंबा जीवन जीते हैं, बल्कि एक सुखी, गरिमापूर्ण और सार्थक जीवन व्यतीत करते हैं।

नीतिशास्त्र केस स्टडी 

भारत ने हाल ही में विश्व प्रसन्नता रिपोर्ट (WHR) रैंकिंग में मामूली सुधार दिखाया है, जो 2025 में 118वें स्थान से बढ़कर 2026 में 116वें स्थान पर पहुँच गया है। हालांकि, दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के बावजूद, समग्र कल्याण के मामले में देश अभी भी अपने कई पड़ोसियों से पीछे है।

एक तेजी से शहरीकरण हो रहे जिले में तैनात जिला मजिस्ट्रेट (DM) एक चिंताजनक प्रवृत्ति देखता है:

  • आय बढ़ रही है, लेकिन युवाओं में तनाव, चिंता और सामाजिक अलगाव बढ़ रहा है।
  • सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से मानसिक स्वास्थ्य गिर रहा है।
  • शहरी अभिजात वर्ग और ग्रामीण प्रवासियों के बीच असमानता बढ़ रही है।
  • भ्रष्टाचार की धारणा के कारण स्थानीय शासन में विश्वास घट रहा है।

DM पर उच्च अधिकारियों की ओर से मुख्य रूप से आर्थिक संकेतकों, जैसे - बुनियादी ढांचे का विकास और निवेश प्रवाह पर ध्यान केंद्रित करने का भारी दबाव है। दूसरी ओर, नागरिक समाज समूह मानसिक कल्याण, सामाजिक एकजुटता और नैतिक शासन में सुधार के उद्देश्य से विशेष पहलों की मांग कर रहे हैं। 

इसी समय, DM दिल्ली के 'हैप्पीनेस करिकुलम' और भूटान के 'सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता' मॉडल से प्रेरित होकर एक "जिला खुशहाली पहल" शुरू करने पर विचार कर रहा है। हालांकि, वह इसकी व्यवहार्यता, परिणामों के मापन और पहले से ही काम के बोझ से दबे कर्मचारियों पर पड़ने वाले अतिरिक्त प्रशासनिक बोझ को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है।

प्रश्न

  1. उपर्युक्त मामले में शामिल प्रमुख नैतिक मुद्दों की पहचान कीजिए।
  2. आर्थिक विकास और समग्र कल्याण के बीच संघर्ष पर चर्चा कीजिए। क्या इस स्थिति में जीडीपी (GDP) विकास को प्राथमिकता देना नैतिक रूप से उचित है?
  3. जिला मजिस्ट्रेट के लिए एक संतुलित कार्य योजना का सुझाव दीजिए।

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सकल घरेलू उत्पाद (GDP)

Gross Domestic Product (GDP) is a monetary measure of the market value of all the finished goods and services produced within a country's borders in a specific time period. It serves as a broad measure of a nation's economic health.

जिला मजिस्ट्रेट (DM)

भारतीय प्रशासनिक सेवा का एक अधिकारी जो किसी जिले का सर्वोच्च कार्यकारी मजिस्ट्रेट होता है। डीएम पर जिले के प्रशासन, विकास और कानून व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है।

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