सुर्ख़ियों में क्यों?
अमेरिका और इज़राइल ने "ऑपरेशन एपिक फ्यूरी" के तहत ईरान पर समन्वित सैन्य हमले किए। इसके कारण पश्चिम एशियाई क्षेत्र में दीर्घकालिक संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
संघर्ष के बारे में
- अमेरिका और इजराइल के बड़े पैमाने पर किए गए हमलों में ईरान की सैन्य परिसंपत्तियों और उसके शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया गया। इसके परिणामस्वरूप ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु हो गई।
- ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पश्चिम एशियाई क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों, इजराइल और खाड़ी देशों के ऊर्जा व नागरिक अवसंरचना को निशाना बनाया।
संघर्ष के कारण | राष्ट्र | विवरण |
भू-राजनीतिक हित | इजराइल | ईरान के परमाणु कार्यक्रम को स्थायी रूप से निष्क्रिय करना और "एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस" (लेबनान, यमन, इराक और सीरिया में ईरान समर्थित मिलिशिया) को खत्म करना। |
संयुक्त राज्य अमेरिका | क्षेत्रीय प्रभुत्व बनाए रखना, सत्ता परिवर्तन को बढ़ावा देना और ईरान को अमेरिकी हितों के लिए एक रणनीतिक खतरे के रूप में समाप्त करना। | |
भू-आर्थिक हित | संयुक्त राज्य अमेरिका | हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र के सहयोगियों के लिए समुद्री ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित करना, वैश्विक तेल कीमतों को नियंत्रित करना, अब्राहम समझौते और I2U2 जैसे रणनीतिक समझौतों को बढ़ावा देना। |
परमाणु हथियारों से संबंधित चिंताएं | अमेरिका और इजराइल | इन खुफिया आकलनों के आधार पर रणनीतिक कार्रवाई करना कि ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम तकनीकी रूप से ऐसे बिंदु के करीब पहुँच रहे हैं जहाँ से वापसी संभव नहीं होगी। |
ईरान | अमेरिका के समझौते से बाहर होने के बाद, संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) के प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए यूरेनियम संवर्धन को काफी बढ़ा दिया। | |
क्षेत्रीय प्रॉक्सी गुट (छद्म समूह) | ईरान | IRGC कुद्स फोर्स के माध्यम से क्षेत्रीय उग्रवादी समूहों (जैसे हमास, हिज़्बुल्लाह, हूती और शिया मिलिशिया) को वित्तपोषित करना, हथियार देना और प्रशिक्षण प्रदान करना। |
मध्य पूर्व में युद्ध की लागत
श्रेणी | प्रभाव क्षेत्र | मुख्य विवरण |
मानवीय लागत | बढ़ती लागत | ईंधन और परिवहन लागत में वृद्धि से क्रय शक्ति कम हो जाती है। इससे खाद्य असुरक्षा की स्थिति गंभीर होती है और लोगों की आय व जीवन-यापन पर दबाव पड़ता है। |
विकास संबंधी क्षति | ईरान में मानव विकास सूचकांक (HDI) में सर्वाधिक तेजी से गिरावट देखी गई है। इससे उसकी मानव विकास प्रगति 1 से 1.5 वर्ष पीछे चली गई है। | |
निर्धनता | बढ़ती लागत के कारण 14 देशों में लगभग 8.8 मिलियन लोग (जिसमें अकेले ईरान के 5 मिलियन से अधिक लोग शामिल) गरीबी के दुष्चक्र में फंस सकते हैं। | |
आजीविका | खाड़ी देशों के श्रम बाजार में व्यवधान उत्पन्न होने से प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवारों को तात्कालिक रूप से आय और रोजगार के गंभीर आघातों का सामना करना पड़ सकता है। | |
पर्यावरणीय लागत | वायु प्रदूषण | बमबारी से क्षतिग्रस्त रिफाइनरियों (तेहरान, अघदेसियेह, शहरान, करज) द्वारा विषाक्त हाइड्रोकार्बन, सल्फर और नाइट्रोजन के यौगिकों, भारी धातुओं तथा PFAS का उत्सर्जन हुआ। इसने पर्यावरण में एक दीर्घकालिक विषाक्त प्रभाव उत्पन्न किया है। |
स्वास्थ्य संकट | विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आने से समय से पूर्व जन्म, जन्म के समय कम वजन और फेफड़ों के विकास में बाधा जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। इसका सर्वाधिक दुष्प्रभाव गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर पड़ता है। | |
जल संकट | जल की कमी से जूझ रहे ईरान में हुई क्षति से पूरी व्यवस्था के विफल होने का खतरा बढ़ गया है। इसके परिणामस्वरूप बेरोजगारी, विस्थापन, कमजोर शासन और खाद्य कीमतों में अस्थिरता जैसी समस्याएं और बढ़ सकती हैं। | |
प्रदूषण | तेल, रसायन और हथियार स्थलों पर हमलों से मृदा और सीमा-पार जल स्रोतों में विषाक्त अवशेष फैल जाते हैं। | |
आर्थिक लागत | भू-आर्थिक जोखिम | WEF की 2026 की 'वैश्विक जोखिम रिपोर्ट' में सशस्त्र संघर्षों को वैश्विक बाजारों, आपूर्ति श्रृंखलाओं और भू-राजनीति को नया रूप देने वाला एक प्रमुख कारक माना गया है। |
बंदरगाहों पर भीड़ | होर्मुज जलसंधि के बंद होने के कारण जहाजों को लंबे रास्तों से गुजरना पड़ा। इसके परिणामस्वरूप विश्व भर के बंदरगाहों पर भारी भीड़ जमा हो गई। | |
मुद्रास्फीतिजनित मंदी (स्टैगफ्लेशन) | ईरान के ऊर्जा केंद्रों (खार्ग द्वीप, साउथ पार्स) पर हुए हमलों के कारण 'ब्रेंट क्रूड' तेल की कीमतें $110 प्रति बैरल के पार पहुँच गईं। मध्य-पूर्व में नौवहन के बीमा की दरें 50% तक बढ़ गईं, जिससे दुनिया भर में स्थायी मुद्रास्फीति बढ़ गई है। | |
लॉजिस्टिक्स | युद्ध के कारण नौवहन (शिपिंग) और बीमा लागत में वृद्धि का प्रभाव वैश्विक स्तर पर पड़ा (ताइवान के सेमीकंडक्टर उद्योग से लेकर ब्राजील के कृषि क्षेत्रक और दक्षिण कोरिया के स्टील उद्योग तक)। | |
आपूर्ति श्रृंखलाएं | इस संघर्ष के कारण विश्व भर में हीलियम की आपूर्ति में लगभग 33% की कमी हुई है। इसके कारण सेमीकंडक्टर, मेडिकल इमेजिंग और उच्च-तकनीकी (हाई-टेक) जैसे क्षेत्रकों में गंभीर रुकावटें आई हैं। | |
सरकारी ऋण | विकसित देशों का पहले से उच्च ऋण और बढ़ सकता है, जबकि इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड जैसे एशियाई देशों में राजकोषीय घाटा बढ़ने का खतरा है। | |
खाद्य सुरक्षा | इनपुट लागत | पिछले एक महीने में यूरिया उर्वरक की कीमत लगभग 30% बढ़ गई है और सोयाबीन तेल की कीमत दो वर्ष के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। |
उर्वरक आपूर्ति संकट | मध्य-पूर्व से आने वाले उर्वरकों की आपूर्ति बाधित होने से कृषि आपूर्ति श्रृंखला पर सीधा प्रभाव पड़ा है। |

भारत पर प्रभाव
- ऊर्जा आयात: भारत का लगभग 50% तेल (2.5 - 2.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन) होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है। तेल की कीमत में प्रत्येक $1/बैरल की वृद्धि से भारत के वार्षिक आयात बिल में $1.8 - $2 अरब की बढ़ोतरी होती है।
- गैस पर निर्भरता: इस जलसंधि से भारत का 80 - 85% LPG और 60% LNG आयात किया जाता है।
- कृषि: प्राकृतिक गैस की बढ़ती कीमतों के कारण वैश्विक उर्वरक कीमतों में 40% तक वृद्धि हुई है, जबकि यूरिया और अमोनिया उत्पादन लागत का 70% हिस्सा गैस पर निर्भर होता है।
- भारत का यूरिया सब्सिडी बजट इस वित्त वर्ष में लगभग $12.7 अरब है। इससे सरकारी खर्च पर भारी दबाव पड़ता है।
- भू-राजनीति: इस संघर्ष ने इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEEC) की प्रगति को लगभग रोक दिया है तथा ईरान और मध्य एशिया के साथ कनेक्टिविटी योजनाओं को जटिल बना दिया है।
- सुरक्षा सीमाएं: कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता ने हिंद महासागर में क्षेत्रीय सुरक्षा प्रदाता के रूप में भारत की नौसैनिक भूमिका की सीमाओं को उजागर किया है।
- प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा: खाड़ी देशों में रहने और काम करने वाले लगभग 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा एक प्रमुख राष्ट्रीय चिंता है।
भारत द्वारा उठाए गए कदम
- निकासी: भारत ने नागरिक उड्डयन संसाधनों का उपयोग करते हुए त्वरित और बड़े पैमाने पर निकासी अभियान चलाया, जिसमें आर्मेनिया और अजरबैजान जैसे देशों का सहयोग लिया गया।
- आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण: केंद्र सरकार ने 7 इंटर-मिनिस्ट्रियल एम्पावर्ड ग्रुप बनाए, जो त्वरित अनुक्रिया टीमों के रूप में कार्य कर रहे हैं।
- तेल और गैस: सरकार रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का प्रभावी प्रबंधन कर रही है और प्राथमिक उपभोक्ताओं के लिए गैस आपूर्ति बनाए रखने हेतु स्पॉट मार्केट से अतिरिक्त RLNG (Regasified LNG) की खरीद कर रही है।
- कृषि: उर्वरक विभाग ने आपातकालीन वैश्विक खरीद प्रक्रिया शुरू की है और भारत रूस, मोरक्को, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, इंडोनेशिया और मिस्र जैसे देशों से आपूर्ति स्रोतों का विविधीकरण कर रहा है।
- कूटनीतिक पहल: प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया के विभिन्न देशों के नेताओं के साथ सीधे संवाद स्थापित किया है।
- आर्थिक स्थिरीकरण कोष: सरकार ने बाह्य आघातों और आपूर्ति श्रृंखला के व्यवधानों से निपटने के लिए ₹573 अरब (लगभग $6.20 अरब) के आर्थिक स्थिरीकरण कोष के गठन का प्रस्ताव रखा है।
निष्कर्ष
भू-राजनीतिक और परमाणु चिंताओं से प्रेरित यह संघर्ष एक क्षेत्रीय युद्ध में बदल गया है। इसने होर्मुज जलसंधि जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को रणनीतिक हथियार के रूप में उपयोग किया और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की गंभीर कमजोरी को उजागर किया। भारत के लिए, ये कमजोरियां दीर्घकालिक रणनीतिक पुनर्मूल्यांकन की मांग करती हैं। इसके तहत भारत को अपनी हरित ऊर्जा संक्रमण को तेज करना होगा और अस्थिर फारस की खाड़ी क्षेत्र से परे महत्त्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं का स्थायी विविधीकरण करना होगा।