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भारत औद्योगिक विकास योजना (Bharat Audyogik Vikas Yojna (BHAVYA)}

30 Apr 2026
1 min

In Summary

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्त वर्ष 2026-27 से 2031-32 तक 33,660 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 100 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क विकसित करने के लिए भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्या) को मंजूरी दी।
  • एनआईसीडीसी द्वारा कार्यान्वित भव्य परियोजना का उद्देश्य मुख्य, मूल्यवर्धित और सामाजिक अवसंरचना के लिए ₹1 करोड़/एकड़ तक की वित्तीय सहायता के साथ निवेश के लिए तैयार पार्क (100-1000 एकड़) विकसित करना है।
  • यह योजना सतत डिजाइन, पीएम गतिशक्ति के साथ तालमेल, व्यापार करने में आसानी, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को बढ़ावा देती है, जिससे आत्मनिर्भर भारत को समर्थन मिलता है।

In Summary

सुर्ख़ियों में क्यों?

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) को मंजूरी दी है। इसके तहत ₹33,660 करोड़ के आवंटन के साथ 100 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे।

BHAVYA की मुख्य विशेषताएं

  • नोडल मंत्रालय: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय।
  • उद्देश्य: शहरों के भीतर और उनके आस-पास 100 निवेश के लिए तैयार 'प्लग-एंड-प्ले' औद्योगिक पार्क (100–1000 एकड़) विकसित करना है। यह कार्य राज्यों, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्रक के उपक्रमों और निजी क्षेत्रक के साथ साझेदारी में किया जायेगा। 
  • योजना की अवधि: यह योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 से शुरू होकर 2031-32 तक छह (6) वर्षों की अवधि के लिए लागू रहेगी। इसके लिए ₹ 33,660 करोड़ का परिव्यय निर्धारित किया गया है।
  • कार्यान्वयन तंत्र: इसका कार्यान्वयन राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC) द्वारा, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के तहत, राज्यों और निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी में किया जाता है।
  • कार्यान्वयन विधि:
    • राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की सरकार या केंद्रीय PSU प्रायोजक एजेंसी होगी।
    • पार्क का विकास एक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) द्वारा किया जाएगा। इस SPV का गठन DPIIT के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास और कार्यान्वयन ट्रस्ट (NICDIT) तथा राज्य की नोडल एजेंसी द्वारा किया जाएगा।
      • SPV इस योजना के तहत सृजित परिसंपत्तियों का स्वामी होगा और विकसित किए जाने वाले औद्योगिक पार्क की योजना, निर्माण, संचालन तथा रखरखाव के लिए उत्तरदायी होगा।
  • वित्तीय सहायता: पात्र परियोजनाओं के लिए प्रति एकड़ ₹1 करोड़ तक की सहायता उपलब्ध होगी। निजी विनिर्माणकर्ताओं के साथ साझेदारी में विकसित पार्कों को प्रति एकड़ ₹50 लाख तक या अवसंरचना लागत का 50%, इनमें से जो भी कम हो की सहायता प्राप्त होगी। वित्तीय सहायता निम्नलिखित के लिए प्रदान की जाती है:
    • मुख्य अवसंरचना हेतु: आंतरिक सड़कें, भूमिगत उपयोगिता सुविधाएं (यूटिलिटीज), जल निकासी, साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्र, ICT और प्रशासनिक प्रणालियां।
    • मूल्य वर्धित अवसंरचना हेतु: तैयार कारखाने (शेड), मांग के अनुसार निर्मित इकाइयां (built-to-suit), परीक्षण प्रयोगशालाएं, गोदाम।
    • सामाजिक अवसंरचना हेतु: श्रमिकों के लिए आवास और सहायक सुविधाएं।
    • बाहरी अवसंरचना (External infrastructure) के लिए परियोजना लागत के 25% तक अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जाएगी।
  • लाभार्थी:
    • प्राथमिक: विनिर्माण इकाइयां, MSMEs, स्टार्टअप और वैश्विक निवेशक जो तैयार औद्योगिक अवसंरचना की तलाश में हैं।
    • द्वितीयक: श्रमिक, लॉजिस्टिक्स प्रदाता, सेवा क्षेत्रक के उद्यम और स्थानीय समुदाय।

महत्व

  • संधारणीय और भविष्योन्मुख औद्योगिक पार्क डिज़ाइन
    • एकीकृत भूमिगत उपयोगिता गलियारों के साथ हरित ऊर्जा और सतत संसाधन उपयोग सुनिश्चित होगा, जिससे कुशल रखरखाव और निर्बाध औद्योगिक संचालन के लिए खुदाई-मुक्त वातावरण संभव हो सकेगा।
    • बहुआयामी कनेक्टिविटी के लिए पीएम गति शक्ति के सिद्धांतों के अनुरूप, नए मानक स्थापित किये जायेंगे
  • व्यवसाय करने में सुगमता: पूर्व स्वीकृत जमीन, तैयार अवसंरचना, सिंगल विंडो सिस्टम और राज्यों द्वारा किए गए निवेशक अनुकूल सुधार किये जा रहे हैं।
    • भव्य निवेशकों के लिए प्रवेश की बाधाओं को काफी हद तक कम कर देगा।
  • रोजगार सृजन: विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और सेवाओं के क्षेत्रों में लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।
  • क्षेत्रीय औद्योगिक विकास: क्लस्टर-आधारित विकास के माध्यम से तथा उद्योगों, आपूर्तिकर्ताओं और सेवा प्रदाताओं की एक ही स्थान पर उपस्थिति को सक्षम बनाएगा।

निष्कर्ष

भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) की मंजूरी 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में भारत की यात्रा में एक परिवर्तनकारी कदम है, जो देश की विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करता है। साथ ही, यह कदम निर्यात को बढ़ावा देता है और एक सुदृढ़, समावेशी तथा वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था की नींव रखता है।

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आत्मनिर्भर भारत

यह भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य देश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। इसमें स्वदेशी विनिर्माण, नवाचार और आयात पर निर्भरता कम करना शामिल है।

पीएम गति शक्ति

यह भारत सरकार की एक मास्टर प्लान है जो विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को एकीकृत करके अवसंरचना विकास में तेजी लाने पर केंद्रित है। यह भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) पर आधारित योजना के माध्यम से मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को बढ़ाती है।

राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास और कार्यान्वयन ट्रस्ट (NICDIT)

एक ट्रस्ट जिसे औद्योगिक गलियारों के विकास और कार्यान्वयन के लिए धन आवंटित किया जाता है, जैसा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में ₹3,000 करोड़ के आवंटन से दर्शाया गया है।

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