ऊर्जा सुरक्षा और भारत की विदेश नीति (Energy Security and India’s Foreign Policy) | Current Affairs | Vision IAS

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ऊर्जा सुरक्षा और भारत की विदेश नीति (Energy Security and India’s Foreign Policy)

30 Apr 2026
1 min

In Summary

  • भारत की विदेश नीति में ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक है, क्योंकि कच्चे तेल के आयात पर भारत की 85% से अधिक निर्भरता है और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसी संवेदनशील समुद्री बाधाएं मौजूद हैं।
  • भारत वैश्विक नेतृत्व (आईएसए, जी20), आपूर्तिकर्ता विविधीकरण, साझेदारी में रणनीतिक स्वायत्तता और विदेशों में ईंधन एवं तेल निवेश में वृद्धि के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा को आगे बढ़ा रहा है।
  • दक्षिण एशियाई पावर ग्रिड, समुद्री सुरक्षा में सुधार और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने जैसी पहलें भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति को मजबूत करती हैं।

In Summary

सुर्ख़ियों में क्यों? 

ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों ने एक व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले लिया है। इसका वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ रहा है। इससे भारत की  विदेश नीति में ऊर्जा सुरक्षा की आवश्यकता और भी महत्वपूर्ण हो गई है। 

हालिया घटनाक्रम जो भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा को अनिवार्य बनाते हैं; 

  • मध्य पूर्व में सैन्य आक्रमण से उत्पन्न अस्थिरता: ईरान ने जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी परिसंपत्तियों और खाड़ी देशों की अवसंरचना को निशाना बनाया। साथ ही वाणिज्यिक जहाजों को धमकियां दीं। इस कार्रवाई के कारण होर्मुज जलसंधि से होने वाले आवागमन में व्यवधान उत्पन्न होने का खतरा उत्पन्न हो गया है।
  • तेल मुद्रास्फीति में वृद्धि: हाल के समय में पश्चिम एशिया में आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के कारण वैश्विक तेल कीमतों में 40–50% से अधिक की वृद्धि हुई है। 
  • भू-राजनीति से भू-अर्थशास्त्र की ओर बदलाव: व्यापार युद्ध, द्विपक्षीय विवाद, राजनीतिक अस्थिरता और क्षेत्रीय विवाद जैसे कई कारणों से यह परिवर्तन हो रहा है। 
    • उदाहरण के लिए, रूस–यूक्रेन युद्ध और अमेरिका द्वारा एकपक्षीय प्रशुल्क अधिरोपण आदि। 

ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में भारत की विदेश नीति को पुनर्संरेखित करने की आवश्यकता

  • भौगोलिक रूप से केंद्रित आयात निर्भरता: भारत अपने कच्चे तेल का 85% से अधिक, प्राकृतिक गैस का लगभग 50% और कोयले का लगभग 25% आयात करता है।
    • आयात पर यह निर्भरता भौगोलिक रूप से संकेंद्रित है, जिसमें आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों के उत्पादकों से प्राप्त किया जाता है।
  • चोक पॉइंट्स के कारण आपूर्ति श्रृंखला में बाधा: उदाहरण के लिए, भारत के कच्चे तेल के आयात का लगभग आधा हिस्सा और उसके LNG तथा LPG शिपमेंट का 60% से अधिक हिस्सा होर्मुज जलसंधि से होकर गुजरता है।
  • गैस-आधारित प्रणालियों की संवेदनशीलता: कच्चे तेल के संबंध में भारत आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाया है और सामरिक पेट्रोलियम भंडार बनाए हैं। इसके विपरीत गैस-आधारित प्रणालियां कम सुरक्षा और सीमित भंडारण के साथ संचालित होती हैं। 
    • LNG विशेष क्रायोजेनिक अवसंरचना पर निर्भर करता है और सामान्यतः इसे केवल सीमित परिचालन मात्रा में ही संग्रहित किया जाता है।
  • ऊर्जा की परस्पर संबद्ध प्रकृति: LPG व्यवधान राजकोषीय और राजनीतिक तनावों में परिणत होते हैं, ये प्रत्यक्ष रूप से उर्वरक की कीमतों को प्रभावित करते हैं और अप्रत्यक्ष रूप से खाद्य मुद्रास्फीति को बढ़ाते हैं, जिससे घरेलू उपभोग और खाद्य प्रणालियों पर असर पड़ता है।
  • ऊर्जा उपलब्धता: भारत में 65% से अधिक आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, यहां विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति और स्वच्छ ईंधन तक पहुँच में प्रायः कठिनाईयां होती हैं। इससे समानता, समावेशन और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे उत्पन्न होते हैं। 
  • ऊर्जा की बढ़ती मांग: औद्योगीकरण, शहरीकरण और बढ़ते मध्यम वर्ग के कारण, भारत की प्राथमिक ऊर्जा खपत बढ़ रही है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुमान के अनुसार, भारत की प्राथमिक ऊर्जा खपत 2013 में लगभग 775 मिलियन टन तेल समतुल्य (Mtoe) थी। यह 2030 तक बढ़कर लगभग 1250 Mtoe हो सकती है। 

ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत की विदेश नीति से संबंधित पहलें

  • वैश्विक मंचों पर नेतृत्व: भारत के नेतृत्व वाली पहलों के माध्यम से भारत वैश्विक मंचों, पर नेतृत्व कर रहा है, जैसे G20 शिखर सम्मेलन में 'जैव-ईंधन गठबंधन' (Biofuel Alliance) और 'अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन' (ISA); 'एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड' (One Sun One World One Grid), आदि।
  • आपूर्तिकर्ताओं का विविधीकरण: भारत के कच्चे तेल के आपूर्तिकर्ताओं की संख्या 2006-07 में 27 थी। वर्तमान में इन देशों की संख्या बढ़कर लगभग 40 हो गई है।
  • रणनीतिक स्वायत्तता की दिशा में प्रयास: भारत "राष्ट्रीय हित सर्वोपरि" की नीति पर कायम है, और रूस, मध्य-पूर्व तथा अमेरिका के बीच अपने ऊर्जा आयात में संतुलन बनाए हुए है।
    • उदाहरण के लिए, हाल के वर्षों में भारत ने जटिल प्रतिबंधों के बीच संतुलन बनाते हुए अमेरिका से तेल आयात बढ़ाया, जबकि रूस के साथ महत्वपूर्ण व्यापार भी बनाए रखा। 
  • दीर्घकालिक निवेश साझेदारियाँ: उदाहरण के लिए, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) का अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के साथ 10-वर्षीय LNG समझौता क्षेत्रीय अस्थिरता के बावजूद स्थिर गैस आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
  • अन्वेषण और उत्पादन क्षेत्र का विस्तार: भारतीय सार्वजनिक उपक्रमों {(ONGC विदेश लिमिटेड (OVL)}, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL), आदि) की 22 देशों में 48 परिसंपत्तियां हैं।
  • दक्षिण एशियाई पावर ग्रिड: भारत नेबरहुड फर्स्ट नीति के तहत निकटवर्ती स्रोतों से ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है। इसके लिए भारत बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, श्रीलंका जैसे देशों में ऊर्जा अवसंरचना का निर्माण और सुदृढ़ीकरण कर रहा है। 
  • समुद्री सुरक्षा: भारत ने चोकपॉइंट्स पर भारतीय जहाजों की समुद्री जागरूकता और सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसमें मर्केंटाइल मरीन डोमेन अवेयरनेस सेंटर (MMDAC) के माध्यम से चौबीसों घंटे निगरानी, रियल-टाइम घटना ट्रैकिंग और भारतीय नौसेना तथा अन्य एजेंसियों के साथ घनिष्ठ समन्वय शामिल है।
  • अन्य उपाय: 
    • वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, राष्ट्रीय जैव-ऊर्जा कार्यक्रम आदि, जैसी पहलों के माध्यम से, भारत अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।
    • रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR): SPR कार्यक्रम का दूसरा चरण चांदीखोल (ओडिशा) और पादुर (कर्नाटक) में भूमिगत इकाइयों के निर्माण कार्य को तेज़ी से आगे बढ़ा रहा है।

निष्कर्ष

भारत की विदेश नीति रणनीतिक स्वायत्तता, संतुलित साझेदारियों और सचेत तटस्थता पर आधारित है। यह ऊर्जा संबंधों के विविधीकरण और क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने पर बल देती है, ताकि जोखिम कम किए जा सकें। यह दृष्टिकोण अनिश्चित वैश्विक वातावरण में भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों की रक्षा करने में मदद करता है। 

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मर्केंटाइल मरीन डोमेन अवेयरनेस सेंटर (Mercantile Marine Domain Awareness Centre - MMDAC)

एक भारतीय समुद्री निगरानी केंद्र जो समुद्री डकैती, तस्करी और अन्य समुद्री खतरों का पता लगाने और प्रतिक्रिया देने के लिए 24x7 निगरानी और सूचना साझाकरण सुनिश्चित करता है।

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission)

भारत सरकार की एक प्रमुख पहल जिसका उद्देश्य हरित हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात को बढ़ावा देना, जिससे ऊर्जा स्वतंत्रता और कार्बन उत्सर्जन में कमी आए।

सामरिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserve - SPR)

ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा कच्चे तेल का संग्रहीत भंडार। यह तेल आपूर्ति में किसी भी व्यवधान के प्रभाव को कम करने में मदद करता है।

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