भारत ने 'पहुंच और लाभ साझाकरण (ABS) पर नागोया प्रोटोकॉल' के कार्यान्वयन पर पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत की (India Submits 1st National Report on Implementation of Nagoya Protocol) | Current Affairs | Vision IAS

Upgrade to Premium Today

Start Now
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

अपना ज्ञान परखें

आर्थिक अवधारणाओं में महारत हासिल करने और नवीनतम आर्थिक रुझानों के साथ अपडेट रहने के लिए गतिशील और इंटरैक्टिव सत्र।

ESC

भारत ने 'पहुंच और लाभ साझाकरण (ABS) पर नागोया प्रोटोकॉल' के कार्यान्वयन पर पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत की (India Submits 1st National Report on Implementation of Nagoya Protocol)

30 Apr 2026
1 min

In Summary

  • नागोया प्रोटोकॉल के तहत पहुंच और लाभ साझाकरण (एबीएस) के कार्यान्वयन में भारत अग्रणी है, जिसने 12,830 अनुमोदन और 3,556 अनुपालन प्रमाण पत्र जारी किए हैं।
  • जैव विविधता प्रबंधन समितियों (एबीएस) के लिए 216 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई गई, जिसमें से 139 करोड़ रुपये समुदायों और किसानों को वितरित किए गए, जिन्हें 2.76 लाख जैव विविधता प्रबंधन समितियों का समर्थन प्राप्त है।
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सहयोगात्मक अनुसंधान जैसे गैर-मौद्रिक लाभों को 395 एबीएस अनुमोदनों में शामिल किया गया था।

In Summary

यह रिपोर्ट पहुंच और लाभ साझाकरण (Access and Benefit Sharing: ABS) प्रावधानों को लागू करने की दिशा में भारत की प्रगति पर प्रकाश डालती है। साथ ही, यह रिपोर्ट भारत की अद्यतन राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (NBSAP) के लक्ष्य-13 में योगदान को भी रेखांकित करती है।

ABS पर नागोया प्रोटोकॉल के बारे में

  • नागोया प्रोटोकॉल जैव विविधता अभिसमय (CBD) के तहत एक पूरक समझौता है।
    • जैव विविधता अभिसमय वर्ष 1992 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण और विकास सम्मेलन अर्थात रियो "पृथ्वी शिखर सम्मेलन" में अपनाया गया एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है। यह अभिसमय 1993 में लागू हुआ था।
  • उद्देश्य: आनुवंशिक संसाधनों से होने वाले लाभों का उचित और न्यायसंगत तरीके से साझाकरण सुनिश्चित करना, जिससे जैव विविधता के संरक्षण और संधारणीय उपयोग में योगदान मिल सके।
  • यह प्रोटोकॉल 2010 में अपनाया गया और 2014 में लागू हुआ।
  • प्रोटोकॉल के तहत मुख्य दायित्व:
    • पहुंच (Access): जैव संसाधनों तक पहुँच के लिए सेवा-प्रदाता से पूर्व सूचित सहमति (PIC) की आवश्यकता होती है।
    • लाभ साझाकरण (Benefit Sharing): लाभों को परस्पर सहमति की शर्तों (MAT) के आधार पर उचित और न्यायसंगत रूप से साझा किया जाना चाहिए।
    • अनुपालन (Compliance): यह दायित्व सुनिश्चित करता है कि संसाधनों का उपयोग पूर्व सूचित सहमति (PIC) और परस्पर सहमत शर्तों (MAT) के अनुसार किया जा रहा है।
  • भारत उपर्युक्त प्रावधानों को जैव-विविधता अधिनियम, 2002 के माध्यम से लागू करता है। इसमें निम्नलिखित त्रिस्तरीय संस्थागत संरचना शामिल है:
    • राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA),
    • राज्य जैव विविधता बोर्ड / संघ राज्य क्षेत्र जैव विविधता परिषदें,
    • स्थानीय स्तर पर जैव-विविधता प्रबंधन समितियां (BMCs)समितियाँ

रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर

  • कार्यान्वयन के स्तर पर प्रदर्शन: भारत ने 12,830 ABS अनुमोदन जारी किए और 3,556 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अनुपालन प्रमाण पत्र प्रकाशित किए (वैश्विक हिस्सेदारी का लगभग 60%) । ये प्रदर्शन मजबूत कार्यान्वयन को दर्शाते हैं। 
  • लाभ साझाकरण के परिणाम: ₹216.31 करोड़ जुटाए गए, जिसमें से ₹139.69 करोड़ समुदायों, किसानों और जैव-विविधता प्रबंधन समितियों को वितरित किए गए।
  • क्षमता निर्माण: स्थानीय स्तर पर 2.76 लाख से अधिक जैव-विविधता प्रबंधन समितियां स्थापित की गई हैं। इसके अतिरिक्त, 3,724 कार्यक्रमों और 600 से अधिक पहलों के माध्यम से 2.56 लाख व्यक्तियों को प्रशिक्षित किया गया है।
  • गैर-मौद्रिक लाभ: 395 अनुमोदनों में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, क्षमता निर्माण और सहयोगात्मक अनुसंधान जैसे लाभ शामिल हैं।

Explore Related Content

Discover more articles, videos, and terms related to this topic

RELATED TERMS

3

Compliance Certificate

An internationally recognized certificate issued under the Nagoya Protocol to provide evidence that the utilization of a specific genetic resource has been granted with the prior informed consent of the Party providing the resource and in accordance with mutually agreed terms.

Biodiversity Management Committees (BMCs)

Local-level bodies established under the Biological Diversity Act, 2002, tasked with preserving, conserving, and promoting biological diversity, as well as documenting and securing knowledge, innovations, and practices of local communities related to biodiversity.

National Biodiversity Authority (NBA)

A statutory body constituted under the Biological Diversity Act, 2002, to implement India's obligations under the Convention on Biological Diversity (CBD). It regulates activities related to accessing biological resources and sharing benefits arising from their use.

Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet