सुर्ख़ियों में क्यों?
भारत वैश्विक स्तर पर अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) मॉडल को साझा कर रहा है। इससे देशों को मापनीय, समावेशी और अंतरसंचालनीय डिजिटल शासन प्रणालियों को अपनाने में मदद मिल रही है।
अन्य संबंधित तथ्य
- फरवरी 2026 तक, भारत सरकार ने इंडिया स्टैक और DPI पर सहयोग के लिए 24 देशों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) और समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।
- सहयोग के क्षेत्रों में डिजिटल पहचान, डिजिटल भुगतान, डेटा विनिमय ढांचे और सेवा वितरण प्रणाली शामिल हैं।
- एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस (UPI) अब संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर सहित 8 देशों में सक्रिय हो चुका है।
- 2023 में G20 की अध्यक्षता के दौरान, भारत ने DPI को विकास एजेंडे के केंद्र में रखा है।
- 25 से अधिक देश अपने राष्ट्रीय पहचान कार्यक्रमों के लिए मॉड्यूलर ओपन-सोर्स आइडेंटिटी प्लेटफॉर्म (MOSIP) को अपना रहे हैं या उस पर विचार कर रहे हैं।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) क्या है?
- परिभाषा: DPI सुरक्षित और परस्परसंचालनीय डिजिटल प्रणालियों का एक समूह है। इसे व्यक्तियों तथा संगठनों को सार्वजनिक और निजी सेवाएं प्रदान करने में सहायता के लिए खुला, समावेशी एवं सुलभ बनाया गया है।
- विशेषताएं: यह पारिस्थितिकी तंत्र में एक मध्यवर्ती परत के रूप में कार्य करता है, जो भौतिक अवसंरचना (इंटरनेट, डिवाइस, सर्वर, डेटा सेंटर आदि) तथा क्षेत्रीय अनुप्रयोगों (सूचना प्रणाली, ई-कॉमर्स, सामाजिक सुरक्षा, दूरस्थ शिक्षा और टेलीहेल्थ) के बीच सेतु का कार्य करता है।
- भारत का DPI जन धन, आधार, मोबाइल (JAM) की त्रिआयामी अवधारणा के माध्यम से एक चरणबद्ध और सुनियोजित प्रक्रिया के रूप में विकसित हुआ है। इसने अभूतपूर्व पैमाने पर पहचान, वित्त और कनेक्टिविटी को संबद्ध किया है।
- भारत का DPI सह-निर्माण मॉडल पर आधारित है। सह-निर्माण मॉडल ने निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए एक बेहतर अवसर प्रदान किया है।
डिजिटल सार्वजनिक वस्तुएं (DPGs)
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डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का महत्व

- डिजिटल अवसंरचना की ओर परिवर्तन: अवसंरचना अब सड़कों और बंदरगाहों जैसी भौतिक परिसंपत्तियों से आगे बढ़कर डिजिटल प्रणालियों को भी शामिल कर चुकी है, जो आधुनिक समाजों की रीढ़ बन रही हैं।
- निर्बाध अंतःक्रिया: DPI व्यक्तियों, व्यवसायों और सरकारों के बीच सुरक्षित एवं निर्बाध अंतःक्रिया को सक्षम बनाता है।
- MyGov ऐप: यह सरकारी सेवाओं तक पहुँच को सुव्यवस्थित करता है, जिससे प्रशासनिक खर्च और जटिलताएँ कम होती हैं।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: DPI वास्तविक समय (real-time) में सूचना उपलब्ध कराकर पारदर्शिता बढ़ाता है। साथ ही, नौकरशाही की जटिलताओं को समाप्त करता है तथा निर्णय-निर्माण में मानवीय विवेकाधिकार को कम करता है।
- उदाहरण के लिए, सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) सरकारी निधि का रियल-टाइम ट्रैकिंग करने की सुविधा देता है।
- वित्तीय समावेशन और पहुंच: DPI दूरदराज़ क्षेत्रों में बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच प्रदान करके वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देता है।

- पहुंच और अधिकारों का विस्तार: DPI अब डिजिटल अर्थव्यवस्था में बाज़ारों और अधिकारों तक पहुंच को निर्धारित करता है।
- उदाहरण के लिए, ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC)
- राज्य की क्षमता को सुदृढ़ करना: यह कुशल सब्सिडी वितरण, सुरक्षित बैंकिंग प्रणाली आदि के माध्यम से शासन को बेहतर बनाता है।
- उदाहरण के लिए, आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS)
- आर्थिक अवसरों को बढ़ाना: उदाहरण के लिए, सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM)

DPI से जुड़ी चुनौतियां
- डेटा उल्लंघन और रैंसमवेयर: भारत के DPI का वृहद् पैमाना, इसे साइबर हमलों का प्रमुख लक्ष्य बनाता है। साथ ही, कई सरकारी सेवाओं में आधार के एकीकरण ने खतरनाक "लिंकेज अटैक्स" के माध्यम से क्रमिक गोपनीयता जोखिम उत्पन्न किए हैं।

- डेटा गवर्नेंस के बीच संतुलन: व्यक्तिगत गोपनीयता की रक्षा करने और निरंतर नवाचार को बढ़ावा देने के बीच एक अंतर्निहित तनाव मौजूद होता है।
- 2023 के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम गोपनीयता, स्पष्ट सहमति और डेटा स्थानीयकरण के लिए सख्त मानक निर्धारित करता है। इससे विनियामकीय अनुपालन और DPI की सहज उपलब्धता के बीच संतुलन बनाना एक प्रमुख चुनौती बन जाता है।
- AI-संचालित खतरे: दुर्भावनापूर्ण तत्व और राज्य-प्रायोजित समूह कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके महत्वपूर्ण अवसंरचना पर लक्षित हमले कर सकते हैं। इससे प्रणालियों में क्रमिक विफलता की आशंका बढ़ जाती है।
- डिजिटल विभाजन: व्यापक रूप से अपनाए जाने के बावजूद, DPI की सफलता ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से जारी डिजिटल विभाजन के कारण प्रभावित होती है।
- तकनीकी विश्वसनीयता: UPI जैसे प्लेटफॉर्म अभी भी अवसंरचनात्मक कमियों का सामना कर रहे हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों में कम पहुंच, बैंक सर्वर की खराबी और नेटवर्क की विफलताएं शामिल हैं।
- एल्गोरिथम संबंधी पूर्वाग्रह: DPI में AI पर अत्यधिक निर्भरता के परिणामस्वरूप एल्गोरिथम संबंधी पूर्वाग्रह हो सकता है। इससे भारत की अत्यधिक विविधतापूर्ण आबादी, विभिन्न आर्थिक स्तरों और भिन्न डिजिटल साक्षरता स्तरों के बीच असमानता बढ़ सकती है।
आगे की राह
- डिजिटल संप्रभुता का संरक्षण: चूंकि भारत के DPI मॉडल को MOSIP जैसी पहलों के माध्यम से अन्य देशों द्वारा अपनाया जा रहा है। अतः इस बात पर जोर दिया जाना चाहिए कि DPI उन देशों की सीमाओं के भीतर डेटा संप्रभुता बनाए रखे और वे भारतीय प्रणालियों व डेटा रजिस्ट्रियों पर निर्भर (lock-in) न हों।
- समाज, सरकार और बाजार का एकीकरण: DPI को इन तीनों की सेवा करने, उनके हितों को संतुलित करने और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया जाना चाहिए।
- प्रौद्योगिकी के बजाय परिणामों पर ध्यान: DPI का डिजाइन वास्तविक दुनिया के उपयोग के मामलों और गहन आवश्यकता आकलन द्वारा संचालित होना चाहिए। इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि तकनीक वास्तव में लोगों और फर्मों के लिए विशिष्ट समस्याओं का समाधान करती है।
- डिजिटल विभाजन को पाटना: सतत DPI संवृद्धि के लिए दूरसंचार कनेक्टिविटी के विस्तार और किफायती उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
- वैश्विक सहयोग: समावेशी वैश्विक मानक स्थापित करने, बड़ी तकनीकी कंपनियों द्वारा विनियामकीय दुरुपयोग पर अंकुश लगाने और सुरक्षित सीमा पार डेटा एवं भुगतान प्रवाह को सुगम बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करना आवश्यक है।