सुर्ख़ियों में क्यों?
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने जैव विविधता अभिसमय (CBD) के अनुच्छेद 26 के अंतर्गत 7वीं राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत की है (यह CBD के तहत एक अनिवार्य दायित्व है)।
अन्य संबंधित तथ्य
- यह रिपोर्ट अद्यतन राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (NBSAP) (2024–30) के तहत 23 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्यों (NBT) की दिशा में हुई प्रगति का आकलन करती है।
- कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचा (KMGBF) को अपनाने के बाद से यह भारत की प्रगति का पहला पूर्ण मूल्यांकन है।
- संपूर्ण-सरकार और संपूर्ण-समाज दृष्टिकोण: भारत ने अपनी रणनीति को अद्यतन करने में मंत्रालयों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), महिलाओं, राज्यों, निजी क्षेत्रक और देशज समुदायों जैसे कई हितधारकों को शामिल किया है।

कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचा (Kunming Montreal Global Biodiversity Framework)
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रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएं
- नीति एवं लक्ष्य: सभी 23 संशोधित NBSAP लक्ष्य (142 संकेतकों सहित) सही दिशा में हैं और KMGBF के अनुरूप हैं।
- वन एवं कार्बन: वन एवं वृक्ष आवरण बढ़कर भौगोलिक क्षेत्रफल का 25.17% हो गया है (पंजीकृत वन: 23.59%)।
- वन कार्बन भंडार 7,285.5 मिलियन टन तक पहुंच गया है (जिसमें से 55% मृदा जैविक कार्बन है)।
- पारिस्थितिकी तंत्र की पुनर्बहाली: 24.1 मिलियन हेक्टेयर (mha) भूमि पर पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्बहाल की जा चुकी है या पुनर्बहाली की प्रक्रिया में है।
- भारत 2030 तक 26 mha भूमि पर पारिस्थितिकी तंत्र की पुनर्बहाली के अपने बॉन चैलेंज (Bonn Challenge) संकल्प को प्राप्त करने के करीब है।
- आर्द्रभूमियां: 2026 तक भारत में रामसर स्थलों की संख्या 98 हो गई है (जो 2014 में 26 थी)।
- रामसर स्थलों की संख्या के मामले में भारत एशिया में पहले और विश्व में तीसरे स्थान पर है।
- समष्टि: भारत में 3,682 बाघ (वैश्विक कुल आबादी का >70%), 22,446 हाथी, 4,000 से अधिक गैंडे और 891 एशियाई शेर हैं।
- प्रथम आकलन: रिपोर्ट में 718 हिम तेंदुए और 6,327 नदी डॉल्फिन दर्ज की गई हैं।
- संरक्षित क्षेत्र: यह कुल भूमि क्षेत्र के 5.71% हिस्से पर आच्छादित है; समुद्री संरक्षित क्षेत्रों में भी वृद्धि हुई है।
- नेटवर्क: देश में 574 वन्यजीव अभयारण्य, 390 सामुदायिक रिजर्व, 145 संरक्षण रिजर्व और 106 राष्ट्रीय उद्यान हैं।
- आरक्षित क्षेत्र (रिजर्व): भारत में 58 टाइगर रिजर्व, 33 हाथी रिजर्व और 18 बायोस्फीयर रिजर्व हैं।
- प्रौद्योगिकी एकीकरण: निगरानी के लिए रिमोट सेंसिंग, GIS और DNA-आधारित उपकरणों का उपयोग किया जाता है।
- पर्यावरण स्वीकृतियों और शासन के लिए परिवेश (Parivesh) पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है।
- कृषि-जैवविविधता: 22 प्रलेखित कृषि-जैवविविधता हॉटस्पॉट हैं।
- देश के भौगोलिक क्षेत्र के 8.65% भाग पर कृषि वानिकी का विस्तार है।

जैव विविधता प्रबंधन में निहित मुख्य चुनौतियां
- प्रगति की स्पष्टता का अभाव: यद्यपि सरकार का दावा है कि सभी लक्ष्य निर्धारित प्रगति के मार्ग पर हैं, किंतु रिपोर्ट केवल NBT-1 (जैव विविधता-समावेशी भूमि और समुद्र-उपयोग योजना) और NBT-2 को ही वास्तव में सही दिशा में प्रगति की ओर अग्रसर बताती है।
- अन्य लक्ष्यों के संदर्भ में, रिपोर्ट स्पष्ट अनुमानों के बजाय केवल वर्तमान में चल रही पहलों का विवरण प्रदान करती है।
- भूमि निम्नीकरण: निरंतर प्रयासों के बावजूद, वर्तमान में भारत के लगभग 29.77% भौगोलिक क्षेत्र में निम्नीकरण की स्थिति बनी हुई है।
- वर्ष 2021 की तुलना में 2023 में मैंग्रोव वन आवरण में भी गिरावट दर्ज की गई है।
- शिथिल तटीय नियोजन: निरंतर बदलती विनियामक आवश्यकताओं के कारण, 13 तटीय राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में से केवल 3 ने ही एकीकृत तटीय क्षेत्र प्रबंधन योजना (ICZMP) को मंजूरी दी है (वित्त वर्ष 2020-24)।
- डेटा संग्रह संबंधी समस्याएं: उपग्रह प्रौद्योगिकी में हो रही प्रगति के कारण वर्तमान डेटा की पिछले मूल्यांकनों के साथ तुलना करना कठिन हो गया है। इसके अतिरिक्त, विभिन्न मंत्रालयों के बीच डेटा का बिखराव भी एक बड़ी चुनौती है।
- आक्रामक प्रजातियों का विस्तार: विशेष रूप से बाघों के विचरण वाले राज्यों में इनकी व्यापक वृद्धि देखी गई है। उदाहरण के लिए, क्रोमोलेना ओडोराटा (Chromolaena odorata) में 70% की वृद्धि दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त, प्रोसोपिस जुलीफ्लोरा और मिमोसा डिप्लोड्रिचा जैसी प्रजातियों के प्रसार में भी बढ़ोतरी हुई है।
निष्कर्ष
CBD को सौंपी गई भारत की 7वीं राष्ट्रीय रिपोर्ट यह दर्शाती है कि राष्ट्र अपनी वैश्विक पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं की प्राप्ति की दिशा में व्यापक प्रगति कर रहा है, किंतु साथ ही यह जटिल घरेलू वास्तविकताओं का भी सामना कर रहा है। KMGBF के साथ अपने लक्ष्यों के संरेखित करके भारत ने सराहनीय नेतृत्व प्रदर्शित किया है। प्रमुख प्रजातियों की बढ़ती संख्या, रामसर आर्द्रभूमि नेटवर्क का तीव्र विस्तार और पारिस्थितिकी तंत्र की पुनर्बहाली के लिए किए जा रहे महत्वाकांक्षी प्रयास इस नेतृत्व के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं।