भारत-कनाडा संबंध (India-Canada Relations) | Current Affairs | Vision IAS

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भारत-कनाडा संबंध (India-Canada Relations)

30 Apr 2026
1 min

सुर्ख़ियों में क्यों? 

कनाडा के प्रधानमंत्री द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत आए।

यात्रा के मुख्य परिणाम

  • व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) वार्ता: CEPA के लिए विचारार्थ विषयों' (Terms of Reference - ToR) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके साथ ही एक व्यापक व्यापार समझौते के लिए वार्ता शुरू हो गई है। इसका उद्देश्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।
  • परमाणु ऊर्जा: भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग और कनाडा की कंपनी 'कैमेको' (Cameco) के बीच लगभग 2.6 बिलियन डॉलर का समझौता किया गया है। इसके तहत भारत के परमाणु रिएक्टरों के लिए यूरेनियम अयस्क कॉन्सेंट्रेट्स (2027–2035) की आपूर्ति की जाएगी।
  • महत्वपूर्ण खनिज: सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाएं विकसित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। साथ ही खनन और प्रसंस्करण के क्षेत्र में निवेश, प्रौद्योगिकी साझाकरण और सहयोग पर बल दिया गया है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा: सौर, पवन, बायोमास और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इसमें ज्ञान का आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण शामिल है।
  • बहुपक्षीय: कनाडा वैश्विक जैव-ईंधन गठबंधन (GBA) और अंतर्राष्ट्रीय सौर ऊर्जा गठबंधन (ISA) में शामिल होगा। भारत इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) में 'संवाद भागीदार' के रूप में उसके प्रवेश का समर्थन करता है।
  • संयुक्त दलहन प्रोटीन उत्कृष्टता केंद्र पर आशय की घोषणा की गई है: राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और प्रबंधन संस्थान, कुंडली (NIFTEM-K) में इसकी स्थापना की जाएगी। 
  • संस्थागत: भारत-कनाडा रक्षा संवाद की स्थापना की जाएगी और संसदीय मैत्री समूह का गठन किया जाएगा।
  • अन्य: त्रिपक्षीय सहयोग (भारत–कनाडा–ऑस्ट्रेलिया), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE)–मिटैक्स (Mitacs) के मध्य साझेदारी और कुंडली स्थित राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान में संयुक्त दलहन प्रोटीन उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना हेतु आशय घोषणा की गई है।

कनाडा के साथ यूरेनियम समझौते का महत्त्व (Significance of Uranium Deal with Canada)

  • ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु विस्तार: यह परमाणु रिएक्टरों के लिए यूरेनियम की विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करता है, जिससे 2047 तक भारत के 100 गीगावाट परमाणु क्षमता के लक्ष्य को समर्थन मिलता है।
  • आयात पर निर्भरता: घरेलू अयस्क निम्न-गुणवत्ता वाला है। अतः लगभग 70% यूरेनियम आयात किया जाता है। यह समझौता आयात पर निर्भरता की समस्या का समाधान करता है।
    • भारत का अयस्क 'निम्न श्रेणी' का है (0.02-0.45% सांद्रता)। वहीं, कनाडा के पास उच्च श्रेणी का अयस्क है, जो भारतीय अयस्क से 10-100 गुना अधिक समृद्ध है।
    • भारत के लिए यूरेनियम अयस्क का आयात करना, उसके निष्कर्षण की तुलना में सस्ता है।
  • आपूर्ति विविधीकरण: कजाकिस्तान, रूस और उज्बेकिस्तान से आगे आपूर्ति का विस्तार करता है।
  • रणनीतिक साझेदारी: कनाडा के साथ संबंधों को मजबूत करती है और कूटनीतिक सामान्यीकरण का संकेत देती है।
  • कैमेको के साथ यह समझौता भारत-कनाडा असैन्य परमाणु सहयोग समझौते (2010) के अंतर्गत आता है।
    • शांतिपूर्ण उपयोग और जवाबदेही का प्रावधान: भारत यह सुनिश्चित करता है कि कनाडा से प्राप्त सभी परमाणु सामग्री का उपयोग पूरी तरह से शांतिपूर्ण और गैर-विस्फोटक उद्देश्यों के लिए ही किया जाए। साथ ही विखंडनीय सामग्री का उचित ब्यौरा (ट्रैकिंग/विवरण) भी रखा जाए।
  • अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA सुरक्षा उपाय): यह समझौता IAEA सुरक्षा उपायों के तहत संचालित होता है, जिसके अंतर्गत आयातित यूरेनियम को IAEA की निगरानी में रखा जाता है।
  • सामान्य सिद्धांत: भारत में, आयातित यूरेनियम का उपयोग करने वाले रिएक्टर IAEA के सुरक्षा उपायों के अंतर्गत शामिल हैं, जबकि घरेलू यूरेनियम का उपयोग करने वाले रिएक्टर सुरक्षा उपायों के दायरे से बाहर हैं।

भारत-कनाडा संबंधों का महत्व

  • आर्थिक और रणनीतिक जुड़ाव: व्यापारिक संबंधों का विस्तार हुआ है। द्विपक्षीय व्यापार लगभग 8.66 बिलियन अमेरिकी डॉलर (2024-2025) तक पहुँच गया है, जो अभी भी मौजूद अपार संभावनाओं का संकेत देता है।
    • दोनों देशों के बीच 75 वर्षों से भी अधिक पुराने राजनयिक संबंध हैं, जिन्हें वर्ष 2018 में औपचारिक रूप से 'रणनीतिक साझेदारी' (Strategic Partnership) के स्तर तक उन्नत किया गया था।
  • ऊर्जा साझेदारी: दोनों देश यूरेनियम, LNG और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग कर रहे हैं, जो भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करता है।
  • प्रवासी संबंध: लगभग 1.8 मिलियन भारत-कनाडाई लोगों की उपस्थिति, जो एक मजबूत सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक सेतु का काम करती है।
  • शिक्षा और गतिशीलता: कनाडा में लगभग 4 लाख भारतीय छात्र हैं, जो मानव पूंजी को मजबूत करते हैं और लोगों के बीच संबंधों को सुदृढ़ बनाते हैं।
  • कृषि और खाद्य सुरक्षा: भारत की खाद्य सुरक्षा और कृषि क्षेत्र के लिए कनाडा से दालों और उर्वरकों की आपूर्ति अत्यंत महत्वपूर्ण है; उदाहरण के लिए, कनाडा पोटाश का विश्व का सबसे बड़ा उत्पादक है।
  • रणनीतिक एकीकरण: दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम-आधारित व्यवस्था का समर्थन करते हैं, साथ ही जलवायु पहलों और बहुपक्षीय मंचों में सहयोग करते हैं, यह उनके साझा वैश्विक हितों को दर्शाता है, उदाहरण के लिए, G20 के तहत सहयोग, कनाडा की हिंद-प्रशांत रणनीति, आदि।

भारत-कनाडा संबंधों के समक्ष उपस्थित चुनौतियां  

  • खालिस्तान उग्रवाद: कनाडा में खालिस्तान-समर्थक समूह मौजूद हैं, यहां भारतीय प्रवासियों, वाणिज्य दूतावासों तथा मंदिरों को निशाना बनाने की घटनाएं होती रहती हैं । उदाहरण के लिए, बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI)।
  • निज्जर मुद्दा (2023): हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जुड़े आरोपों के कारण एक गंभीर कूटनीतिक संकट और गहन विश्वास की कमी उत्पन्न हो गई है।
    • राजनयिक तनाव: राजनयिकों का निष्कासन, वीजा सेवाओं का निलंबन, और संस्थागत संवाद तंत्रों में व्यवधान जैसी समस्याएं बनी हुई हैं।
  • आंतरिक मामलों पर व्याख्यान: उदाहरण के लिए, भारत में कृषि आंदोलनों और अल्पसंख्यक मुद्दों पर कनाडा द्वारा दिए गए व्याख्यान संबंधों को कमजोर करते हैं। 
  • आप्रवासन और आवागमन संबंधी मुद्दे: भारतीय छात्रों की संख्या में गिरावट और वीज़ा नियमों में सख्ती ने लोगों के आपसी संबंधों और शैक्षिक आदान-प्रदान को प्रभावित किया है।

निष्कर्ष

भारत और कनाडा एक संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाकर सुरक्षा चिंताओं का समाधान कर सकते हैं और एक-दूसरे की संवेदनशीलताओं का सम्मान कर सकते हैं। व्यापार, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी में सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ प्रवासी भारतीयों के संबंधों का उपयोग कर विश्वास निर्माण को बढ़ावा दिया जा सकता है और द्विपक्षीय साझेदारी को और सुदृढ़ किया जा सकता है। 

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