क्षेत्रीय संपर्क योजना – संशोधित उड़ान {REGIONAL CONNECTIVITY SCHEME (RCS) – MODIFIED UDAN} | Current Affairs | Vision IAS

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क्षेत्रीय संपर्क योजना – संशोधित उड़ान {REGIONAL CONNECTIVITY SCHEME (RCS) – MODIFIED UDAN}

30 Apr 2026
1 min

In Summary

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हवाईअड्डे के विकास और संचालन एवं रखरखाव सहायता के लिए 28,840 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 10 वर्षों (वित्त वर्ष 2027-36) के लिए आरसीएस-संशोधित यूडीएन को मंजूरी दी।
  • यह योजना पारिस्थितिकी तंत्र दृष्टिकोण, चुनौती-आधारित कार्यान्वयन और घरेलू एयरोस्पेस को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर भारत को एकीकृत करने पर केंद्रित है।
  • संसदीय समिति ने विमानन सुरक्षा संबंधी चिंताओं, मार्ग की स्थिरता संबंधी मुद्दों, डीजीसीए में कर्मचारियों की कमी और यात्री अधिकारों के ढांचे के अभाव को उजागर किया।

In Summary

सुर्ख़ियों में क्यों?

हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2035-36 तक 10 वर्ष की अवधि के लिए क्षेत्रीय संपर्क योजना (RCS ) - संशोधित उड़ान को मंजूरी दी है।

क्षेत्रीय संपर्क योजना –संशोधित उड़ान के घटक

कुल परिव्यय ₹28,840 करोड़ है, जिसे पूर्णतः सरकारी बजटीय सहायता द्वारा समर्थित किया गया है।

  • एयरोड्रोम का विकास (CAPEX): अगले आठ वर्षों में मौजूदा अप्रयुक्त हवाई पट्टियों से 100 हवाई अड्डों का विकास करना।
  • संचालन एवं रखरखाव (O&M) सहायता: लगभग 441 एयरोड्रोम को तीन वर्षों के लिए संचालन एवं रखरखाव सहायता प्रदान करने का लक्ष्य है। इसकी अधिकतम सीमा प्रति हवाई अड्डा ₹3.06 करोड़ प्रति वर्ष और प्रति हेलीपोर्ट/वाटर एयरोड्रोम ₹0.90 करोड़ प्रति वर्ष है।
  • आधुनिक हेलीपैडों का विकास: पर्वतीय, दूरस्थ, द्वीपीय और आकांक्षी क्षेत्रों में ₹15 करोड़ प्रति हेलीपैड की लागत से 200 आधुनिक हेलीपैडों का निर्माण करना है।
  • व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF): बाजार के दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखते हुए, एयरलाइन ऑपरेटरों को 10 वर्षों तक VGF सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव है।
    • योजना के अंतर्गत, एयरलाइन संचालकों को आवंटित मार्गों पर परिचालन के लिए VGF के रूप में वित्तीय सहायता प्राप्त होती है।
  • आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी विमानन क्षमता: दुर्गम भूभागों में विमानों की कमी को दूर करने और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने हेतु पवन हंस के लिए दो एचएएल ध्रुव हेलीकॉप्टर और एलायंस एयर के लिए दो एचएएल डॉर्नियर विमानों की खरीद की जाएगी।

योजना की प्रमुख विशेषताएं

  • व्यापक हस्तक्षेप: क्षेत्रीय विमानन में मौजूद अवसंरचना और परिचालन संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए इसे मूल योजना के उन्नत रूप में तैयार किया गया है। 
  • पारितंत्र आधारित दृष्टिकोण: यह केवल नई उड़ान मार्ग शुरू करने तक सीमित न रहकर, मजबूत हवाई अड्डा अवसंरचना, विश्वसनीय परिचालन सहायता और एयरलाइनों के लिए व्यवहार्य पारिस्थितिकी तंत्र पर ध्यान केंद्रित करता है। 
  • चैलेंज मोड कार्यान्वयन: समय पर कार्य संपन्न होने, गुणवत्ता और संधारणीयता सुनिश्चित करने के लिए उड़ान हवाई अड्डों को 'चैलेंज मोड' के तहत विकसित किया जाएगा।
  • स्वदेशी प्रोत्साहन: क्षेत्रीय उड़ान आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए घरेलू एयरोस्पेस क्षेत्र को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को एकीकृत करता है।

उड़ान से संबंधित मुद्दे और चुनौतियाँ

  • विमानन सुरक्षा संबंधी चिंताएँ: एक संसदीय स्थायी समिति ने प्रणालीगत सुरक्षा मुद्दों को उजागर किया, जिनमें शामिल हैं:
    • एक ही एयरलाइन के ऑडिट में 100 सुरक्षा चूकें चिन्हित की गईं तथा 19 सुरक्षा उल्लंघन नोटिस जारी किए गए।
    • ऑडिट किए गए 754 विमानों में से 377 में बार-बार तकनीकी खामियां पाई गईं।
      • हाल ही में अहमदाबाद दुर्घटना में 260 लोगों की मृत्यु हो गई।
  • मार्ग स्थिरता: मंत्रालय ने उन मार्गों के लिए एक संरचित निकास रणनीति के अभाव को स्वीकार किया है जो अपने VGF सब्सिडी अवधि को पूरा कर चुके हैं।
  • परिचालन संबंधी रुकावटें: आवंटित 925 मार्गों में से 327 मार्गों को कोविड-19 महामारी, विमानों की कमी, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, रखरखाव संबंधी समस्याओं और यात्रियों की कम मांग जैसे कारणों से बंद कर दिया गया।
    • 150 से अधिक आवंटित मार्ग अभी भी शुरू नहीं हुए हैं।
  • कर्मचारियों की कमी: नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को कर्मचारियों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है, जहां 48.3% पद रिक्त हैं और स्वीकृत 1,630 पदों के मुकाबले केवल 843 कर्मचारी कार्यरत हैं।
  • यात्री अधिकार: प्रतिवर्ष 350 मिलियन से अधिक यात्रियों को सेवा देने के बावजूद, भारत में मुआवजे और विलंब प्रबंधन को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक वैधानिक यात्री अधिकार ढांचा मौजूद नहीं है।

आगे की राह

  • संसदीय स्थायी समिति की सिफ़ारिशें
    • स्वतंत्र सुरक्षा समीक्षा: व्यापक सुरक्षा समीक्षा करने और प्रणालीगत विफलताओं के मूल कारण का विश्लेषण करने के लिए विमानन सुरक्षा पर एक स्वतंत्र उच्च-स्तरीय समिति गठित की जाए
    • औपचारिक प्रभाव आकलन: उड़ान योजना का एक औपचारिक, स्वतंत्र प्रभाव आकलन किया जाए, जिसमें प्रति यात्री लागत, मार्ग-वार व्यवहार्यता तथा आत्मनिर्भर बनने वाले मार्गों के अनुपात का मूल्यांकन शामिल हो। 
    • DGCA क्षमता निर्माण: DGCA में कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए एक व्यापक, समयबद्ध भर्ती तथा प्रतिनियुक्ति कार्यक्रम तैयार किया जाए और उसे क्रियान्वित किया जाए।
    • यात्री अधिकार चार्टर: मुआवजे, विलंब प्रबंधन और जवाबदेही मानकों को संबोधित करने के लिए भारतीय वायुयान अधिनियम 2024 के तहत एक औपचारिक यात्री अधिकार चार्टर विकसित किया जाए।
    • अधिक पारदर्शिता: भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के पूंजी निवेश कार्यक्रमों की संसदीय निगरानी एवं पारदर्शिता में सुधार किया जाए।

उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) योजना के बारे में

  • शुभारंभराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति (NCAP) 2016 के तहत परिकल्पित तथा 21 अक्टूबर 2016 को आधिकारिक रूप से प्रारंभ किया गया। 
  • प्रकार: केंद्रीय क्षेत्रक योजना।
  • मंत्रालय: नागरिक उड्डयन मंत्रालय
  • कार्यान्वयन एजेंसी: भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI)।
  • उद्देश्य: बाजार-संचालित, वित्तीय रूप से समर्थित मॉडल के माध्यम से आम नागरिक के लिए हवाई यात्रा को सुलभ और किफायती बनाकर विमानन का लोकतंत्रीकरण करना।
  • प्रमुख तंत्र: एयरलाइनों को व्यवहार्यता अंतर निधि (VGF) प्रदान करता है, हवाई किराए पर सीमा निर्धारित करता है। साथ ही केंद्र, राज्यों और हवाई अड्डे के संचालकों के बीच एक सहयोगात्मक शासन मॉडल का उपयोग करता है।
  • हितधारकों के लिए प्रोत्साहन: इसमें हवाई अड्डे के संचालकों द्वारा लैंडिंग और पार्किंग शुल्क में छूट, केंद्र सरकार द्वारा ATF उत्पाद शुल्क पर 2% की सीमा और राज्य सरकारों द्वारा ATF पर वैट को 1% या उससे कम करना शामिल है।
  • उपलब्धियां (मार्च 2026 तक):
    • चरणबद्ध विस्तार (उड़ान 1.0 से 5.0 श्रृंखला): सेवा से वंचित/कम सेवा वाले हवाई अड्डों, हेलीपैडों (उड़ान 2.0), पर्यटन मार्गों एवं सीप्लेन (उड़ान 3.0), तथा पहाड़ी/द्वीपीय क्षेत्रों (उड़ान 4.0) को कवर करने के लिए उत्तरोत्तर विस्तारित किया गया और अंतिम-मील कनेक्टिविटी में विविधता लाई गई (उड़ान  5.0 से 5.5)।
    • मार्च 2026 तक 95 हवाई अड्डों, हेलीपोर्ट और वाटर एरोड्रोम में 663 वायु मार्ग संचालित हो चुके हैं।
    • स्थापना के बाद से चुनिंदा एयरलाइनों को व्यवहार्यता अंतर निधि के रूप में ₹4,593.28 करोड़ वितरित किए गए। 
    • भारत के समग्र हवाईअड्डों के नेटवर्क को 2014 में 74 से बढ़ाकर 2024 में 159 करने के लिए सहायता प्रदान की गई।
  • क्षेत्र-विशिष्ट उड़ान पहल
    • कृषि उड़ान: किसानों को उनकी शीघ्र नष्ट होने वाली कृषि उपज के सुगम हवाई परिवहन की सुविधा प्रदान करके सहायता करना। 
    • अंतर्राष्ट्रीय उड़ान (IACS): अंतर्राष्ट्रीय हवाई संपर्क योजना का उद्देश्य भारतीय राज्य राजधानियों और टियर-2 शहरों को प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय गंतव्यों से सीधे जोड़ना है ताकि स्थानीय व्यापार, पर्यटन और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सके।
    • उड़ान यात्री कैफे:  इन्हें हवाई यात्रा को अधिक समावेशी बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है, जहाँ उच्च गुणवत्ता वाला भोजन किफायती दामों पर उपलब्ध कराया जाता है (उदाहरण के लिए, चाय 10 रुपये में, समोसे 20 रुपये में)। यह वर्तमान में भारत के 17 हवाई अड्डों पर कार्यरत है।
    • समुद्री विमान संचालन: उड़ान राउंड 5.5 विशेष रूप से 50 से अधिक चिन्हित जल निकायों के लिए बोलियां आमंत्रित करने के लिए शुरू किया गया था।
    • लाइफलाइन उड़ान: कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान शुरू की गई इस पहल के तहत सैकड़ों उड़ानें संचालित की गईं, ताकि दूरदराज के क्षेत्रों तथा द्वीपीय इलाकों में महत्वपूर्ण चिकित्सा सामग्री, टीके और आवश्यक आपूर्ति का परिवहन किया जा सके।

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लाइफलाइन उड़ान

कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई एक पहल, जिसके तहत दूरदराज के क्षेत्रों और द्वीपीय इलाकों में महत्वपूर्ण चिकित्सा सामग्री, टीके और आवश्यक आपूर्ति के परिवहन के लिए सैकड़ों उड़ानें संचालित की गईं।

अंतर्राष्ट्रीय उड़ान (IACS)

एक योजना जिसका उद्देश्य भारतीय राज्य राजधानियों और टियर-2 शहरों को प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय गंतव्यों से सीधे जोड़ना है, ताकि स्थानीय व्यापार, पर्यटन और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सके।

कृषि उड़ान

एक क्षेत्र-विशिष्ट उड़ान पहल जिसका उद्देश्य किसानों को उनकी शीघ्र नष्ट होने वाली कृषि उपज के सुगम और तीव्र हवाई परिवहन की सुविधा प्रदान करके सहायता करना है, जिससे नुकसान कम हो और किसानों की आय बढ़े।

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