केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने सेवा उत्पादन सूचकांक के संकलन के लिए एक दृष्टिकोण पत्र जारी किया है।
- विनिर्माण से संबंधित गतिविधियां औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में दर्ज की जाती हैं। इसके विपरीत अब तक सेवा क्षेत्रक में अल्पकालिक गतिविधियों को दर्ज करने के लिए कोई सूचकांक नहीं था। इससे समग्र आर्थिक प्रदर्शन के आकलन में डेटा की कमी की समस्या उत्पन्न हो रही थी।
प्रस्तावित सेवा उत्पादन सूचकांक की मुख्य विशेषताएं
- प्रस्तावित आधार वर्ष: 2024-25
- डेटा स्रोत: वस्तु एवं सेवा कर (GST) डेटा, क्षेत्रक आधारित मंत्रालयों से प्रशासनिक डेटा और सेवा क्षेत्रक के निगमित उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण (Annual Survey of Incorporated Services Sector Enterprises)।
- कवरेज : इस सूचकांक को विशेष रूप से औपचारिक क्षेत्रक की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें थोक और खुदरा व्यापार, परिवहन, बैंकिंग, बीमा, रियल एस्टेट, संचार आदि उप-क्षेत्रक शामिल हैं।
- LEADS राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों का लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में प्रदर्शन का मूल्यांकन करने वाली एक प्रमुख रिपोर्ट है। इसे भारत सरकार के उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) द्वारा जारी किया जाता है।
- LEAPS 2025 पुरस्कार: इस अवसर पर 'लॉजिस्टिक्स एक्सीलेंस, एडवांसमेंट एंड परफॉर्मेंस शील्ड' (LEAPS) पुरस्कार भी दिए गए। ये पुरस्कार कुल 13 श्रेणियों में प्रदान किए गए हैं। इसमें मूल लॉजिस्टिक्स, MSMEs, स्टार्टअप और विशेष श्रेणियां शामिल हैं।
LEADS रिपोर्ट के बारे में

- इसे 2018 में विश्व बैंक के लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स (LPI) की तर्ज पर तैयार किया गया था।
- LEADS 2025 में अब चार-स्तरीय प्रदर्शन ढांचा शामिल किया गया है। पहले की रिपोर्टों में त्रिस्तरीय प्रदर्शन मानदंड अपनाया गया था।
- इसमें वस्तुनिष्ठ संकेतकों को लगभग 59% भारांश दिया गया है, जैसे कि विनियामकीय सहायता और लॉजिस्टिक्स सुविधाएं। साथ ही, धारणा आधारित संकेतकों (Perception Indicators) को भी शामिल किया गया है, जैसे— लॉजिस्टिक्स अवसंरचना, सेवाएं और धारणीय लॉजिस्टिक्स।
भारत के लॉजिस्टिक्स क्षेत्रक के बारे में
- लॉजिस्टिक्स लागत: वित्तीय वर्ष 2023-2024 के आंकड़ों के अनुसार, GDP की लगभग 8%
- प्रमुख चुनौतियां:
- अवसंरचना की कमियां: खराब सड़कें, पत्तनों पर अधिक यातायात और सभी जगह रेल संपर्क नहीं होना, आदि।
- परिवहन के लिए सड़क मार्ग पर अधिक निर्भरता: भारत में 60% से अधिक माल ढुलाई सड़कों के माध्यम से होती है। इससे ईंधन की खपत, ट्रैफिक जाम और परिवहन लागत में बढ़ोतरी होती है।
- असंगठित क्षेत्र: लॉजिस्टिक्स क्षेत्रक में छोटे ऑपरेटरों/ कंपनियों का दबदबा है, जिससे परिचालन में अक्षमता उत्पन्न होती है।
- अन्य चुनौतियां: जटिल विनियामक प्रक्रियाएं और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाने की धीमी गति।
लॉजिस्टिक्स क्षेत्रक को सुदृढ़ करने के लिए प्रमुख पहलें![]()
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1 sourceकेंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय TEAM पहल के माध्यम से भारत के सबसे लघु व्यवसायों के डिजिटल रूपांतरण को गति दे रहा है।
TEAM पहल के बारे में
- योजना का प्रकार: केंद्रीय क्षेत्रक योजना। इसे 2024 में प्रारंभ किया गया।
- उद्देश्य: सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को उत्पादन से लेकर विपणन एवं वितरण तक संपूर्ण ई-कॉमर्स सहायता प्रदान करना, ताकि वे 'ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स' (ONDC) के माध्यम से डिजिटल कॉमर्स इकोसिस्टम में प्रभावी ढंग से भाग ले सकें।
- ONDC का उद्देश्य डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क के माध्यम से वस्तुओं और सेवाओं के आदान-प्रदान के सभी पहलुओं के लिए खुले नेटवर्क को बढ़ावा देना है।
- यह विश्व बैंक द्वारा समर्थित 'रेजिंग एंड एक्सीलरेटिंग MSME परफॉरमेंस' (RAMP) कार्यक्रम के तहत एक परिवर्तनकारी उप-योजना है।
- MSMEs की कार्यान्वयन क्षमता और पहुंच बढ़ाने के लिए 2022 में RAMP कार्यक्रम प्रारंभ किया गया था।
- कार्यान्वयन अवधि: 2024 से 2027 तक 3 वर्ष।
- कार्यान्वयन एजेंसी: राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (NSIC)।
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1 sourceकेंद्रीय वित्त मंत्रालय ने FEMA के तहत 10% तक चीन की हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियों के लिए FDI नियमों में निजात संबंधी अधिसूचना जारी की है।
- यह अधिसूचना उन विदेशी कंपनियों को स्वचालित मार्ग के तहत भारत में निवेश की अनुमति प्रदान करती है, जिनमें चीनी हिस्सेदारी 10% तक है।
- वर्ष 2020 में, भारत ने उन देशों से आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) पर अंकुश लगा दिया था जिनके साथ भारत भूमि सीमा साझा करता है।
FDI नियमों में किए गए अन्य बदलाव:

- बीमा क्षेत्रक में 100% FDI: निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों और मध्यस्थों (जैसे ब्रोकरों में) को सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना (स्वचालित मार्ग) 100% FDI की अनुमति है।
- हालांकि, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में विदेशी निवेश की ऊपरी सीमा अभी भी 20% ही रहेगी।
- ये परिवर्तन आधिकारिक तौर पर विदेशी मुद्रा प्रबंधन (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026 के द्वारा लागू किए गए थे।
- महत्व: भारत में विदेशी निवेश बढ़ेगा, व्यापार करना आसान होगा, अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, आदि।

RBI ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को ₹2.86 लाख करोड़ के अपने अब तक का सर्वाधिक अधिशेष हस्तांतरण को स्वीकृति प्रदान की है।
RBI अधिशेष के बारे में

- अधिशेष का अर्थ है - व्यय से अधिक आय अर्जित होना।
- RBI की आय के स्रोत: रुपया प्रतिभूतियों को धारण करने पर ब्याज, तरलता समायोजन सुविधा (LAF), सीमांत स्थायी सुविधा (MSF), ऋण और अग्रिम, तथा विदेशी स्रोत।
- RBI अपनी किसी भी आय, लाभ या प्राप्ति पर आयकर या सुपर-टैक्स देने के लिए उत्तरदायी नहीं है।
- RBI का व्यय: नोटों की छपाई, एजेंसी शुल्क जिसमें बैंकों, प्राथमिक डीलरों आदि का कमीशन और कर्मचारी लागत शामिल है।
- RBI की आय के स्रोत: रुपया प्रतिभूतियों को धारण करने पर ब्याज, तरलता समायोजन सुविधा (LAF), सीमांत स्थायी सुविधा (MSF), ऋण और अग्रिम, तथा विदेशी स्रोत।
“भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल” (BMI पूल) का उद्देश्य निरंतर समुद्री-बीमा कवरेज की सुविधा प्रदान करना और भारत के समुद्री व्यापार को वैश्विक अस्थिरता से सुरक्षित रखना है।
भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल क्या है?
- यह सरकार द्वारा समर्थित समुद्री-बीमा पूल है जिसकी क्षमता 1.5 बिलियन डॉलर है तथा इसे ₹12,980 करोड़ (1.4 बिलियन डॉलर) की संप्रभु गारंटी प्राप्त है।
- संबंधित मंत्रालय/विभाग: केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत वित्तीय सेवा विभाग।
- कवरेज (बीमा सुरक्षा): इसमें प्रमुख समुद्री जोखिमों; जैसे कि हल एंड मशीनरी, कार्गो, प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी (P&I) और युद्ध संबंधी जोखिम शामिल हैं। यह कवरेज निम्नलिखित के लिए है:
- भारतीय ध्वज वाले या भारतीय नियंत्रण वाले पोत के लिए।
- भारत आने वाले या भारत से रवाना होने वाले पोत के लिए।
- शासन व्यवस्था :
- पूल प्रशासक: जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC Re)
- पूल के कार्यों और जोखिम प्रबंधन की देखरेख के लिए क्रमशः एक शासी निकाय और एक अंडर राइटिंग कमेटी गठित की गई हैं।
- BMI पूल कैसे कार्य करता है?
- घरेलू बीमा कंपनियां पूल के सदस्यों की संयुक्त क्षमता का उपयोग करके पॉलिसी जारी करती हैं।
- पूल की संयुक्त अंडरराइटिंग क्षमता लगभग 950 करोड़ रुपये है।
- क्लेम का निपटान:
- 100 मिलियन डॉलर तक के दावों का भुगतान पूल की अपनी क्षमता से किया जाएगा।
- 100 मिलियन डॉलर से अधिक के दावों की स्थिति में अंतिम सुरक्षा उपाय (last resort) के रूप में संप्रभु गारंटी सक्रिय होगी।
- घरेलू बीमा कंपनियां पूल के सदस्यों की संयुक्त क्षमता का उपयोग करके पॉलिसी जारी करती हैं।
BMI पूल की आवश्यकता क्यों है?
- भू-राजनीतिक अस्थिरता का समाधान: बढ़ती वैश्विक अस्थिरता और पश्चिम एशिया के तनावों ने समुद्री परिवहन के जोखिमों को बहुत बढ़ा दिया है।

- उदाहरण के लिए: लाल सागर, होर्मुज जलसंधि आदि में व्यवधानों ने बीमा प्रीमियम को बढ़ा दिया है।
- प्रतिबंधों के प्रभाव को कम करना: देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंध अचानक विदेशी पुनर्बीमा/ बीमा सहायता को रोक सकते हैं, जिससे शिपिंग संचालन और व्यापार बाधित हो सकते हैं।
- अन्य कारण:
- अंडरराइटिंग और क्लेम के निपटान में देश में विशेषज्ञता प्राप्त करना;
- विदेशी बीमाकर्ताओं पर निर्भरता को कम करके विदेशी मुद्रा के बाहर जाने को कम करना;
- भारत के लिए सामुद्रिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और वित्तीय संप्रभुता प्राप्त करना तथा व्यापार सुरक्षा को बढ़ाना।
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1 sourceउद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) ने 'भव्य' (BHAVYA) योजना के कार्यान्वयन के लिए दिशानिर्देश जारी किए।
भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) के बारे में
- योजना का प्रकार: केंद्रीय क्षेत्रक की एक योजना
- मंत्रालय: DPIIT के माध्यम से वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय।
- उद्देश्य: देश को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण केंद्र बनाना, जहां उद्योगों के लिए अनुकूल परिवेश उपलब्ध हो ताकि निवेशक आसानी से निवेश कर सकें, घरेलू आपूर्ति श्रृंखला मजबूत हो और रोजगार के अवसर बढ़ें।
- लक्ष्य: राज्यों, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSUs) और निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी में 100 'प्लग-एंड-प्ले' औद्योगिक पार्क विकसित करना।
- प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क ऐसे तैयार औद्योगिक क्षेत्र होते हैं जहां पहले से ही सड़क, विद्युत और जल जैसी सुविधाएं तथा आवश्यक स्वीकृतियां उपलब्ध होती हैं, ताकि उद्योग तुरंत संचालन प्रारंभ कर सकें।

- योजना अवधि: 6 वर्ष (2026-27 से 2031-32),
- परिव्यय: 33,660 करोड़ रुपये,
- पात्रता: ग्रीनफील्ड (नई परियोजनाएं) और पात्र ब्राउनफील्ड औद्योगिक पार्क।
- न्यूनतम भूमि आवश्यकता:
- गैर-पर्वतीय राज्यों के लिए 100 एकड़;
- पर्वतीय राज्यों, पूर्वोत्तर (NE) राज्यों, संघ राज्य क्षेत्रों और छोटे राज्यों के लिए 25 एकड़।
- साथ ही, 1000 एकड़ तक के बड़े पार्कों के विकास की भी अनुमति दी गई है।
- वित्त पोषण व्यवस्था: वित्तीय सहायता राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास और निवेश ट्रस्ट (NICDIT) के माध्यम से प्रदान की जाती है। यह सहायता मुख्य रूप से इक्विटी योगदान के रूप में होती है।
- प्रति परियोजना (निजी
- विकासकर्ता को छोड़कर) इक्विटी मोड में 1 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक की धनराशि निम्नलिखित के लिए दी जाएगी:
- मुख्य अवसंरचना विकास (आंतरिक सड़कें, ICT और प्रशासनिक प्रणालियां)।
- मूल्य-वर्धित अवसंरचना विकास (तैयार फैक्ट्री शेड, वेयरहाउसिंग)।
- सामाजिक अवसंरचना विकास (श्रमिक आवास और सहायता सुविधाएं)।
- बाहरी अवसंरचना विकास के लिए भी परियोजना लागत का 25% तक सहायता प्रदान की जाएगी।
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1 sourceकेंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) 5.0’ को स्वीकृति दी।
- आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) वर्ष 2020 में आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत प्रारंभ की गई थी। इसका उद्देश्य कोविड-19 संकट से प्रभावित व्यवसायों, विशेष रूप से MSMEs, को अपने व्यवसाय संचालन देयताओं को पूरा करने और फिर से कार्य प्रारंभ करने में मदद करना था।
- इस योजना के तहत सदस्य ऋणदाता संस्थानों (Member Lending Institutions - MLIs) को कर्जदारों द्वारा ECLGS के तहत लिए गए ऋण की अदायगी न होने की स्थिति में होने वाले नुकसान पर 100% गारंटी प्रदान की जाती है।
- यह योजना केंद्रीय वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के परिचालन अधिकार क्षेत्र में आती है।
- नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) को इन ऋणों के प्रबंधन और गारंटी प्रदान करने हेतु स्थापित किया गया है।
ECLGS 5.0 की मुख्य विशेषताएं
- उद्देश्य: पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न अल्पकालिक नकदी (लिक्विडिटी) की कमी से निपटने के लिए पात्र कर्जदारों को दिए गए अतिरिक्त ऋण की डिफॉल्ट राशि पर, NCGTC द्वारा सदस्य ऋण संस्थानों (MLIs) को गारंटी कवरेज प्रदान करना।
- पात्र कर्जदार:
- MSMEs और गैर-MSMEs जिनके पास 31 मार्च, 2026 तक विद्यमान कार्यशील पूंजी (Working Capital) सीमा उपलब्ध हो।
- अनुसूचित यात्री विमानन कंपनियां, जिनके पास 31 मार्च, 2026 तक बकाया ऋण सुविधाएं उपलब्ध हों।
- उपर्युक्त सभी उधारकर्ताओं के ऋण खाते मानक (Standard Assets) की श्रेणी में होने चाहिए।
- गारंटी कवरेज:
- MSMEs के लिए 100%;
- गैर-MSMEs के साथ-साथ एयरलाइन क्षेत्रक के लिए 90%।
- ऋण की अवधि:
- MSMEs/गैर-MSMEs के लिए 5 वर्ष (1 वर्ष के मोरेटोरियम सहित)।
- विमानन क्षेत्रक के लिए 7 वर्ष (2 वर्ष के मोरेटोरियम सहित)।
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1 sourceभारत के नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने भारत के स्वर्ण बाजार को औपचारिक रूप देने के लिए इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGRs) की शुरुआत की।
- बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE), 2022 में EGR की शुरुआत करने वाला भारत का पहला स्टॉक एक्सचेंज बना था।
EGRs के बारे में
- ये डिमैट प्रतिभूतियां होती हैं, जो भौतिक स्वर्ण के स्वामित्व का प्रतिनिधित्व करती हैं। यह स्वर्ण भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा मान्यता प्राप्त वॉल्ट्स में सुरक्षित रखा जाता है और डिपॉजिटरी के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखा जाता है।
- प्रत्येक EGR पूरी तरह भौतिक स्वर्ण द्वारा समर्थित होता है, जिसकी गुणवत्ता सुनिश्चित होती है, और इसे एक्सचेंज में खरीदा-बेचा जा सकता है। इससे स्वर्ण वित्तीय प्रणाली का हिस्सा बन जाता है।
- EGR को कभी भी भौतिक स्वर्ण के रूप में बदला जा सकता है, जबकि गोल्ड ETF का आमतौर पर नकद में निपटान होता है।
- विनियामक: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI)।
- परिसंपत्ति की श्रेणी: प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम (SCRA), 1956 के तहत प्रतिभूतियां।
- बाजार में भागीदार: खुदरा निवेशक, जौहरी, बुलियन व्यापारी आदि।
Article Sources
1 sourceयह रूपरेखा केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने जारी की है। यह रूपरेखा पूंजी, श्रम, नवाचार (इनोवेशन) एवं डिजिटल क्षेत्रों में ज्ञान आधारित योगदान को मापने का प्रयास करती है।
ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के बारे में
- परिभाषा: यह ऐसी उपभोग और उत्पादन प्रणाली है, जिसमें भौतिक संसाधनों और प्राकृतिक साधनों की तुलना में मानव पूंजी; जैसे कि सूचना, कौशल, तकनीकी विशेषज्ञता और बौद्धिक संपदा के उपयोग पर अधिक ध्यान दिया जाता है।
- ज्ञान के प्रकार:
- संहिताबद्ध ज्ञान (Codified Knowledge): ऐसी सूचना जिसे सहज रूप से दस्तावेजों में दर्ज किया जा सके और डिजिटल माध्यम से साझा किया जा सके (जैसे — क्या है और क्यों है)।
- अप्रत्यक्ष ज्ञान (Tacit Knowledge): अनुभव पर आधारित कौशल और क्षमताएं होती हैं, जिन्हें लिखित रूप में व्यक्त करना और दूसरों तक पहुंचाना कठिन होता है, (जैसे कि — कैसे करना है और किसके माध्यम से करना है)।
- ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था का महत्व:
- बढ़ते प्रतिफलों पर आधारित : यह नवाचार के प्रसार, ज्ञान के बार-बार उपयोग और दीर्घकालिक सतत आर्थिक संवृद्धि के माध्यम से लगातार बढ़ते प्रतिफल उत्पन्न करती है।
- मूल्य सृजन में परिवर्तन: पेटेंट और कॉपीराइट जैसे बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPRs) के माध्यम से विज्ञान और नवाचार का व्यवसायीकरण करती है। OECD के प्रमुख देशों में ज्ञान-आधारित गतिविधियां GDP में 50% से अधिक योगदान देते हैं।
- उच्च-कौशल युक्त रोजगार: यह उच्च वेतन वाले रोजगार के अवसर उत्पन्न करती है और कुशल “ज्ञान कर्मियों” की मांग में वृद्धि करती है।

- राष्ट्रीय नवाचार प्रणाली:
- यह शिक्षा संस्थानों, सरकार और उद्योगों को जोड़ने वाले गतिशील नेटवर्क पर आधारित होती है, जो एक-दूसरे से सीखने और नवाचार के प्रसार को बढ़ावा देते हैं।
- ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के उदाहरण: केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की डिजिटल इंडिया पहल, पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी, आयुष (Ayush), जी.आई. टैग, आदि।
Article Sources
1 sourceहाल ही में, ऑयल इंडिया लिमिटेड ने राजस्थान में एक नए प्राकृतिक गैस निक्षेप की खोज की है।
- यह खोज डांडेवाला क्षेत्र के 'सानू फॉर्मेशन' में गैस की पहली बार उपस्थिति की पुष्टि करती है।
प्राकृतिक गैस के बारे में
- संरचना: इसका मुख्य घटक मीथेन (CH₄) होता है, जिसमें आंशिक मात्रा में प्राकृतिक गैस तरल पदार्थ (NGLs) और गैर-हाइड्रोकार्बन गैसें जैसे- CO₂ और जल वाष्प भी पाई जाती है।
- भारत में अनुमानित भंडार: लगभग 1,000 बिलियन क्यूबिक मीटर है, जिसमें सबसे बड़ा भंडार पश्चिमी अपतटीय क्षेत्र में है, जिसके बाद पूर्वी अपतटीय क्षेत्र का स्थान आता है।
हाल ही में,पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) और मिजोरम सरकार ने मिजोरम अदरक मिशन प्रारंभ किए। इसका उद्देश्य मिजोरम के GI-प्रमाणित अदरक की खेती को बढ़ावा देना है।
अदरक के बारे में
- वैज्ञानिक नाम: जिंगिबर ऑफिसिनेल रोस्क (Zingiber officinale Rosc) (फैमिली: ज़िंगिबेरेसी)।
- उत्पादन में भारत की स्थिति: भारत अदरक का अग्रणी वैश्विक उत्पादक है।
- प्रमुख उत्पादक राज्य: मध्य प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश।
आदर्श कृषि-जलवायु दशाएं
- जलवायु: उष्ण और आर्द्र (1500 मीटर की ऊंचाई तक)।
- तापमान: 12-35°C.
- वर्षा: बुवाई के लिए मध्यम वर्षा (लगभग 1500 मिलीमीटर वार्षिक) और फसल तैयार होने से पहले शुष्क मौसम की आवश्यकता होती है।
- मृदा: अच्छी जल निकासी युक्त भुरभुरी बलुई दोमट, चिकनी दोमट, या ह्यूमस से प्रचुर लेटराइट दोमट मृदा।
महत्व
- एंटीऑक्सीडेंट और सूजन रोधी (एंटी-इंफ्लेमेटरी) गुण।
- मतली का उपचार करने; रक्त शर्करा (HbA1c) और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित बनाए रखने में अत्यधिक प्रभावी।
