सुर्ख़ियों में क्यों?
भारत में परीक्षा प्रणाली के बारे में
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा पेपर लीक के कथित आरोपों के बीच NEET (UG) 2026 को रद्द किया गया था। यह भारत की परीक्षा प्रणाली की विफलता से संबंधित व्यापक चिंताओं को दर्शाता है।
भारत में परीक्षा प्रणाली
- विद्यालय स्तर की परीक्षाएं : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), भारतीय विद्यालय प्रमाणपत्र परीक्षा परिषद (CISCE) तथा राज्य बोर्डों जैसे बोर्डों द्वारा आयोजित की जाती हैं।
- उच्चतर शिक्षा प्रवेश परीक्षाएं : इनका संचालन NTA द्वारा किया जाता है। प्रमुख परीक्षाओं में NEET-UG, JEE Main तथा कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) शामिल हैं।
- भर्ती परीक्षाएं : इनका आयोजन संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) तथा राज्य लोक सेवा आयोगों जैसी एजेंसियों द्वारा किया जाता है।

भारत की परीक्षा प्रणाली की विफलता के कारण
- सामाजिक दबाव: प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश तथा प्रतिष्ठित सरकारी नौकरियां प्राप्त करने की
- अपेक्षाएं, असफलता का भय तथा शैक्षणिक संस्थानों एवं सरकारी नौकरियों में उपलब्ध सीटों तथा अभ्यर्थियों की संख्या के बीच व्यापक मांग-आपूर्ति अंतर परीक्षा प्रणाली पर अत्यधिक दबाव उत्पन्न करते हैं।
- सीमित पर्येवेक्षण : कमजोर पर्येवेक्षण व्यवस्था, प्रशासनिक कमियां, पेपर लीक करने वाले गिरोहों का अस्तित्व तथा अधिकारियों या सेवा प्रदाताओं के बीच मिलीभगत जैसी परिस्थितियां पेपर लीक को बढ़ावा देने वाला वातावरण निर्मित करती हैं।
- उदाहरण के लिए, SSC CGL 2017 परीक्षा का पेपर लीक।
- इसके अतिरिक्त, "एक राष्ट्र, एक परीक्षा" दृष्टिकोण क्षेत्रीय और शैक्षिक विविधताओं की अनदेखी करता है, जिससे एक ही परीक्षा पर अत्यधिक दबाव उत्पन्न होता है।
- नीतिगत अस्थिरता: परीक्षा की पद्धति या पात्रता मानदंडों में बार-बार परिवर्तन से अभ्यर्थियों के बीच भ्रम और मानसिक तनाव उत्पन्न होता है।
- उदाहरण के लिए, NEET के लिए अधिकतम आयु सीमा लागू करना और बाद में उसे समाप्त कर देना।
- अपर्याप्त निवारक व्यवस्था: जाँच प्रक्रियाओं में देरी, दोषसिद्धि की कम दर तथा असंगत दंड व्यवस्था परीक्षा संबंधी कदाचार से जुड़े जोखिमों की धारणा को कम कर देती है।
- प्रौद्योगिकी का दुरुपयोग: डिजिटल प्रौद्योगिकी में प्रगति के कारण एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से लीक हुए पेपरों का तेजी से प्रसार और बिक्री संभव हो गई है।
- नैतिक मूल्यों में गिरावट: नैतिक शिक्षा और ईमानदारी पर पर्याप्त बल न दिए जाने तथा साथियों के प्रभाव के कारण नकल करना और सफलता प्राप्त करने के लिए लीक पेपर जैसे अनुचित साधनों का उपयोग सामान्य बात बन जाती है।
भारत की परीक्षा प्रणाली की विफलता के प्रभाव
- योग्यता-आधारित व्यवस्था का क्षरण: नकल और पेपर लीक जैसी घटनाएं योग्यता-आधारित चयन के मूल सिद्धांत को कमजोर करती हैं। इससे कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ मिलता है और परीक्षाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
- जनविश्वास में कमी: परीक्षा संबंधी अनियमितताओं की बार-बार होने वाली घटनाएं भर्ती एजेंसियों, शैक्षणिक संस्थानों तथा सरकारी निकायों के प्रति लोगों के विश्वास को कमजोर करती हैं और निष्पक्षता तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करने की संस्थागत क्षमता पर लोगों का विश्वास कम हो जाता है।
- उदाहरण के लिए, मध्य प्रदेश का व्यापम घोटाला परीक्षाओं के प्रति लोगों के विश्वास को कमजोर करता है।
- शासन व्यवस्था पर प्रभाव: परीक्षाओं के रद्द होने से प्रायः लंबे समय तक मुकदमेबाजी, जाँच और पुनः परीक्षाएं आयोजित करनी पड़ती है, जिससे रिक्त पदों को भरने में देरी होती है तथा प्रशासनिक दक्षता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
- अभ्यर्थियों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव: पेपर लीक होने के कारण परीक्षाओं के रद्द होने या दोबारा आयोजित होने से वास्तविक अभ्यर्थियों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है और उनके भविष्य तथा करियर को लेकर अनिश्चितता पैदा होती है।
- प्रशासनिक और वित्तीय बोझ: नई परीक्षाएं आयोजित करने, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने तथा जाँच प्रक्रियाएं संचालित करने के लिए बड़े पैमाने पर लोक संसाधनों की आवश्यकता होती है, जिससे राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय और प्रशासनिक बोझ पड़ता है।
- संवैधानिक और नैतिक मूल्यों के लिए खतरा: परीक्षा संबंधी अनियमितताएं संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में निहित समानता, निष्पक्षता और समान अवसर के सिद्धांतों का उल्लंघन करती हैं।
आगे की राह
के. राधाकृष्णन समिति, 2024 की सिफारिशें
- NTA का पुनर्गठन: उच्च शिक्षा से संबंधित प्रवेश परीक्षाओं के संचालन तक ही NTA की भूमिका को सीमित किया जाए।
- प्रौद्योगिकी, संचालन, उत्पाद, परीक्षा सुरक्षा और निगरानी जैसे क्षेत्रों को शामिल करते हुए 10 विशिष्ट प्रभाग स्थापित किए जाएं।
- परीक्षा लेखा-परीक्षण, नैतिकता एवं पारदर्शिता तथा हितधारक संबंधों के लिए उप-समितियों के साथ एक सशक्त संचालन निकाय का गठन किया जाए।
- महानिदेशक (एजेंसी प्रमुख) का पद एक समर्पित नेतृत्व पद होना चाहिए, जो बाहरी प्रभावों से मुक्त हो, ताकि सुचारु और निरंतर संचालन सुनिश्चित किया जा सके।
- मिश्रित या हाइब्रिड प्रक्रिया को अपनाना: कंप्यूटर-सहायता प्राप्त सुरक्षित परीक्षण के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षण (CBT) और कागज-आधारित परीक्षा (PPT) दोनों विधियों को अपनाया जाए। इससे पेपरों की छपाई, भंडारण और परिवहन के दौरान सुरक्षा संबंधी जोखिमों को कम करने में मदद मिलेगी।
- परीक्षा केंद्र: कम-से-कम 1,000 सुरक्षित परीक्षा केंद्र स्थापित किए जाएं, जिनमें प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों को प्राथमिकता दी जाए।
- केंद्रीय विद्यालयों और नवोदय विद्यालयों के साथ सहयोग करके 400 से 500 केंद्रों का एक राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार किया जाए, जहां एक ही CBT सत्र में 2 से 2.5 लाख अभ्यर्थियों को समायोजित किया जा सके।
- बहु-सत्रीय और बहुस्तरीय परीक्षा व्यवस्था: जब अभ्यर्थियों की संख्या 2 लाख से अधिक हो, तो बहु-सत्रीय और बहुस्तरीय परीक्षा प्रणाली लागू की जाए।
- प्रश्नपत्रों के कठिनाई स्तर में अंतर के बावजूद निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सामान्यीकरण (नॉर्मलाइजेशन) और अंकन प्रणाली को स्पष्ट रूप से परिभाषित, प्रलेखित और संप्रेषित किया जाए।
- मोबाइल परीक्षा केंद्र: पूर्वोत्तर क्षेत्र, उत्तरी हिमालयी राज्यों तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह जैसे दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच की बाधाओं को दूर करने के लिए मोबाइल परीक्षा केंद्र स्थापित किए जाएँ।
- राज्य और जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करना: उच्च महत्त्व वाली परीक्षाओं के संचालन और अनियमितताओं की रोकथाम के लिए जिला मजिस्ट्रेट के नेतृत्व वाली समितियों और राज्य सरकारों के साथ समन्वय स्थापित किया जाए।
- डिजीएग्जाम (DigiExam) की शुरुआत: DigiYatra की तर्ज पर आधार-आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित डेटा विश्लेषण प्रणाली से युक्त DigiExam की शुरुआत की जाए, ताकि फर्जी अभ्यर्थियों की समस्या को रोका जा सके।