भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर {India–New Zealand Free Trade Agreement (FTA) Signed} | Current Affairs | Vision IAS

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संक्षिप्त समाचार

30 Jun 2026
15 min

यह मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भारत के "विकसित भारत 2047" के दृष्टिकोण के अनुरूप है। इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से अधिक जोड़ना तथा MSME, किसानों, महिलाओं और युवाओं को नए अवसर प्रदान करना है।  

FTA की मुख्य विशेषताएं

  • 100% शुल्क-मुक्त बाजार पहुँच: न्यूजीलैंड सभी भारतीय निर्यातों पर शुल्क समाप्त कर देगा, जिससे MSMEs, कपड़ा, चमड़ा, जूते और रत्न जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा।
  • FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) प्रतिबद्धता: न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
  • संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा: भारत ने 70% टैरिफ लाइनों पर बाजार पहुँच प्रदान की है, जो दोनों देशों के 95% द्विपक्षीय व्यापार को कवर करती हैं। 
    • किसानों और घरेलू उद्योगों को बचाने के लिए लगभग 30% टैरिफ लाइनें अपवर्जन (exclusion) श्रेणी में हैं। उदाहरण के लिए: डेयरी, चीनी, प्याज जैसे वनस्पति उत्पाद, एल्युमिनियम आदि।
  • उत्पत्ति के नियम (Rules of Origin): व्यापार लाभों के दुरुपयोग को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए उत्पाद विशिष्ट उत्पत्ति नियमों (PSRs) का एक मजबूत ढांचा स्थापित किया गया है।
  • प्रतिभा और गतिशीलता (Talent & Mobility): STEM 
    • (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग एवं गणित) के विद्यार्थियों के लिए पोस्ट-स्टडी वर्क वीजाकुशल पेशेवरों के लिए बेहतर अवसर, भारतीय कुशल श्रमिकों के लिए प्रतिवर्ष 5,000 अस्थायी रोजगार वीज़ा का प्रावधान किया गया है।
    • आयुष का वैश्वीकरण (Globalizing AYUSH): न्यूजीलैंड द्वारा पहली बार आयुर्वेद और योग सहित भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को मान्यता देने और उनमें व्यापार को सुविधाजनक बनाने का प्रावधान किया गया है।
    • अन्य: कृषि उत्पादकता साझेदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। भारत को 118 सेवा क्षेत्रों में बाजार पहुँच मिलेगी। साथ ही 139 सेवा क्षेत्रों में सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र (Most Favoured Nation - MFN) का दर्जा प्रदान किया जाएगा।

भारत-न्यूजीलैंड संबंध 

  • बाजार: ओशिनिया क्षेत्र में न्यूजीलैंड भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।
  • व्यापार की मात्रा: द्विपक्षीय व्यापार 49% बढ़कर 2024-25 में 1.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया।
  • सकारात्मक व्यापार संतुलन: भारत न्यूजीलैंड से आयात की तुलना में उसे अधिक निर्यात करता है।
  • प्रवासी (Diaspora): लगभग 3,00,000 की संख्या वाला सशक्त भारतीय प्रवासी समुदाय (न्यूजीलैंड की आबादी का लगभग 5%) एक सांस्कृतिक और आर्थिक सेतु के रूप में कार्य कर रहा है।

हाल ही में रूसी राष्ट्रपति की चीन यात्रा ने रूस की चीन पर बढ़ती निर्भरता को रेखांकित किया। दोनों पक्षों ने 40 से अधिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए और पश्चिमी देशों के प्रभुत्व के खिलाफ एक 'बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था' के लिए अपने समर्थन को दोहराया।  

भारत पर प्रभाव 

  • रणनीतिक संतुलनकर्ता के रूप में रूस की भूमिका में कमी: रूस की चीन पर बढ़ती निर्भरता भारत-चीन तनावों में उसकी तटस्थता को कमजोर कर रही है।
  • रक्षा संबंधी कमजोरियां: भारत की रूसी हथियारों (जैसे कि S-400 व स्टेल्थ फ्रिगेट्स) पर निर्भरता आपूर्ति में देरी के संकट का सामना कर रही है। साथ ही, रूस द्वारा चीन को अत्याधुनिक सैन्य प्लेटफॉर्मों की बिक्री से भारत की सुरक्षा चिंताएं बढ़ी हैं। 
  • रूस–चीन–पाकिस्तान के उभरते संबंध: उदाहरण के लिए, रूस हथियारों की बिक्री और रियायती तेल निर्यात के माध्यम से पाकिस्तान के साथ अपने संबंध सुदृढ़ कर रहा है।
  • बहुपक्षीय मंचों पर चुनौतियां: उदाहरण के लिए, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में रूस और चीन के बीच सहयोग बढ़ रहा है।
  • भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर दबाव: रूस-चीन की बढ़ती नजदीकी और संयुक्त राज्य अमेरिका की अनिश्चित नीतियाँ भारत की बहु-पक्षीय मंचों के साथ जुड़ने की रणनीति को सीमित कर रही हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य में पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरानी जहाजों को जब्त किए जाने के प्रत्युत्तर में ईरान ने अन्य देशों के जहाजों पर हमला किए हैं।

  • होर्मुज जलसंधि का सबसे संकरा हिस्सा पूरी तरह से ईरान और ओमान, दोनों के प्रादेशिक जल क्षेत्र में आता है। इसका संचालन संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय (UNCLOS) के तहत “ट्रांजिट पैसेज” नियमों के अनुसार होता है।

अंतर्राष्ट्रीय  जल क्षेत्रक में ‘नौवहन की स्वतंत्रता’ को विनियमित करने वाली व्यवस्था

  • संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय (UNCLOS):
    • मुख्य सिद्धांत: ग्लोबल कॉमन्स (साझा वैश्विक संसाधन), नौवहन की स्वतंत्रता, संसाधन से संबंधित अधिकार और विवाद समाधान।
    • यह अभिसमय समुद्री क्षेत्रों को निम्नलिखित रूपों में परिभाषित करता है:

समुद्री क्षेत्र 

दूरी या सीमा

अधिकारों की अनुमति

प्रादेशिक सागर

12 समुद्री मील तक

  • पारगमन मार्ग (Transit Passage) की अनुमति होती है। यह विदेशी जहाजों को किसी देश के समुद्री मार्ग से बिना अनावश्यक रोक-टोक के आवागमन का अधिकार देता है। हालांकि यह स्वतंत्रता पूरी तरह असीमित नहीं होती। कुछ नियम लागू होते हैं, जैसे — 
    • जहाज किस उद्देश्य से गुजर रहा है;
    • उसे किस निर्धारित मार्ग से जाना है;
    • वह अनावश्यक रूप से रुक या देरी नहीं कर सकता;
    • मार्ग में सामान लादने या उतारने जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध हो सकता है।
  • बिना रोक-टोक यात्रा का अधिकार (Right of Innocent Passage): यह वाणिज्यिक जहाजों और युद्धपोतों, दोनों पर लागू होता है। यहां ‘इनोसेंट’ का अर्थ है कि जहाज संबंधित राष्ट्र के लिए कोई खतरा उत्पन्न नहीं करता है। 

अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ)

200 समुद्री मील तक

  • नौवहन की पूर्ण स्वतंत्रता नहीं है।  
  • तटीय देशों के संप्रभु अधिकार: देशों को संसाधनों के दोहन और ऊर्जा उत्पादन पर अधिकार प्राप्त है। साथ ही कृत्रिम संरचनाओं, समुद्री वैज्ञानिक अनुसंधान, पर्यावरण संरक्षण तथा UNCLOS द्वारा निर्धारित अन्य दायित्वों से संबंधित क्षेत्राधिकार प्राप्त है। 

खुला समुद्र (High Seas)

समुद्र की ओर EEZ से आगे

  • सार्वजनिक संपदा (Res communis): यह सभी देशों के लिए खुला है। 
  • अपवाद:
    • यदि कोई जहाज प्रादेशिक जल में अपराध करके भाग जाता है, तो उसका पीछा किया जा सकता है।
    • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्पष्ट अनुमति होने पर कार्रवाई की जा सकती है।
    • बिना किसी देश की पहचान वाले जहाजों पर कार्रवाई की जा सकती है।
    • जब जहाज के ध्वजवाहक राष्ट्र (Flag State) की सहमति हो, तब भी उसे रोका जा सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय जल क्षेत्रक में ‘नौवहन की स्वतंत्रता’ के समक्ष प्रमुख चुनौतियां

  • भू-राजनीतिक और रणनीतिक: देशों द्वारा चोकपॉइंट्स और समुद्री मार्गों का उपयोग दबाव बनाने, नाकेबंदी करने और आपसी शक्ति प्रतिस्पर्धा के लिए किया जाता है। इससे समुद्र में नौवहन की स्वतंत्रता अक्सर बाधित होती है।
  • कानून में अस्पष्टता: UNCLOS के नियमों की व्याख्या अलग-अलग तरीके से की जाती हैं। साथ ही, इनका सही से क्रियान्वयन भी नहीं हो पा रहा है।
  • एकपक्षीय कार्रवाई और प्रतिबंध: संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने घरेलू कानूनों के तहत वेनेजुएला और क्यूबा से संबंधित तेल व्यापार करने वाले जहाजों के आवागमन को अवरुद्ध किया। 
  • सुरक्षा से संबद्ध खतरे: समुद्री डकैती, आतंकवाद, आदि।

चीन के राष्ट्रपति ने बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ वार्ता के दौरान "थ्यूसीडाइड्स ट्रैप" (Thucydides Trap) और पेलोपोनेसियन युद्ध का मुद्दा उठाया।

थ्यूसीडाइड्स ट्रैप के बारे में:

  • उत्पत्ति: यह शब्दावली हार्वर्ड के राजनीतिक वैज्ञानिक ग्राहम एलिसन द्वारा रचित है।
    • उन्होंने इसका नाम प्राचीन यूनानी इतिहासकार थ्यूसीडाइड्स के नाम पर रखा था, जिन्होंने पेलोपोनेसियन युद्ध का विवरण लिखा था।
      • पेलोपोनेसियन युद्ध एथेंस और स्पार्टा के बीच 431 ईसा पूर्व में शुरू हुआ एक दीर्घकालिक युद्ध था। 
  • अर्थ: यह उस खतरे का वर्णन करता है जो तब उत्पन्न होता है जब एक उभरती हुई शक्ति किसी स्थापित (प्रमुख) शक्ति को विस्थापित करने की धमकी देती है, जिससे संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। 
  • वर्तमान में प्रासंगिकता: इसका उपयोग संयुक्त राज्य अमेरिका (स्थापित शक्ति) और चीन (उभरती वैश्विक शक्ति) जैसे जटिल और तनावपूर्ण भू-राजनीतिक संबंधों का विश्लेषण करने के लिए किया जाता है। 

भारत और यूरोपीय संघ ने 15.2 मिलियन यूरो (लगभग 169 करोड़ रुपये) की संयुक्त पहल शुरू की। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रिकल वाहनों (EV) की बैटरियों के पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना है। यह पहल भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) के वर्किंग ग्रुप-2 के तहत शुरू की गई है।  

  • यह पहल यूरोपीय संघ के होराइजन यूरोप कार्यक्रम और भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय के माध्यम से वित्त पोषित की जाएगी। 

भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) के बारे में:

  • प्रारंभ: फरवरी 2023 में
  • उद्देश्य: इसका उद्देश्य चीन पर यूरोपीय संघ की निर्भरता और रूस पर भारत की निर्भरता को कम करते हुए भारत और यूरोप को रणनीतिक स्वायत्तता की ओर ले जाने का प्रयास करना है।
  • तीन मुख्य कार्य समूह (WGs):
    • WG 1: रणनीतिक प्रौद्योगिकियां, डिजिटल शासन और कनेक्टिविटी।
    • WG 2: हरित और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियां।
    • WG 3: लचीली मूल्य श्रृंखलाएं, व्यापार और निवेश।

भारत और वियतनाम ने अपने द्विपक्षीय संबंधों का दर्जा बढ़ाकर "विस्तारित व्यापक रणनीतिक साझेदारी" किया।   

  • भारत और वियतनाम ने अपने संबंधों को और अधिक मजबूत करते हुए इसे “उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा दिया है। यह पहले से विद्यमान 2016 की ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’  का उन्नत रूप है। 
  • यह निर्णय वियतनाम के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान लिया गया।

वियतनाम के राष्ट्रपति की भारत यात्रा की मुख्य विशेषताएं और परिणाम

  • व्यापार और आर्थिक सहयोग: भारत और वियतनाम के बीच द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य 2030 तक 25 बिलियन डॉलर निर्धारित किया गया है। वर्तमान में यह लगभग 16 बिलियन डॉलर है।
    • दोनों पक्षों ने आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौते (AITIGA) की शीघ्र समीक्षा और उसे संपन्न करने पर जोर दिया।
  • 13 रणनीतिक समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर: ये समझौते अति-महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) के क्षेत्र में सहयोग, डिजिटल कनेक्टिविटी और फिनटेक, स्वास्थ्य-देखभाल सेवा, प्राचीन चाम पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण आदि क्षेत्रकों में किए गए हैं।
  • रक्षा और सुरक्षा सहयोग: दोनों देश रणनीतिक कूटनीति-रक्षा वार्ता (2+2) तंत्र स्थापित करेंगे।
  • समुद्री क्षेत्रक में सहयोग: वियतनाम हिंद-प्रशांत महासागर पहल (IPOI) में शामिल हो गया है।
    • हिंद-प्रशांत महासागर पहल  एक स्वैच्छिक और गैर-संधि आधारित पहल है। इसे भारत ने वर्ष 2019 में थाईलैंड में हुए 'पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS)' के दौरान शुरू किया था। इसका उद्देश्य एक स्वतंत्र, खुला  और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देना है।

भारत के लिए वियतनाम का महत्व

  • एक्ट ईस्ट पॉलिसी: वियतनाम आसियान में भारत का एक मुख्य भागीदार है। साथ ही, वह भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति'विज़न महासागर' (MAHASAGAR) और हिंद-प्रशांत विजन में एक महत्वपूर्ण सहयोगी है।
  • भू-रणनीतिक स्थिति: वियतनाम की भौगोलिक स्थिति हिंद-प्रशांत क्षेत्र में व्यापारिक समुद्री मार्गों की निरंतरता और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
  • चीन को प्रतिसंतुलित करना: दोनों देश संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय (UNCLOS) 1982 के अनुसार दक्षिण चीन सागर में नौवहन की स्वतंत्रता और नियम-आधारित व्यवस्था का समर्थन करते हैं।
  • आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण: वियतनाम के साथ सहयोग से भारत को अति-महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के आयात और दुर्लभ मृदा खनिजों (rare earths) की आपूर्ति में मदद मिलती है। इससे भारत के विनिर्माण क्षेत्रक को मजबूती मिलती है। इससे वैश्विक स्तर पर इनकी आपूर्ति के लिए चीन पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलती है।
  • ऊर्जा सुरक्षा: भारतीय कंपनियों ने दक्षिण चीन सागर के वियतनामी क्षेत्रों में तेल और गैस अन्वेषण परियोजनाओं में निवेश किया है। ये क्षेत्र हाइड्रोकार्बन के निक्षेप के मामले में अत्यंत समृद्ध हैं।

भारत ने 10वें हिंद महासागर संवाद (IOD) की मेजबानी की। इसकी थीम “बदलते विश्व में हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region in a Transforming World)” थी। 

  • IOD, इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (IORA) के तहत एक प्रमुख ट्रैक-1.5 प्लेटफॉर्म है।
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मणिपुर और मिजोरम के बनेई मेनाशे समुदाय के 240 से अधिक सदस्यों को इजराइल सरकार द्वारा तेल अवीव में स्थानांतरित किया गया। 

बनेई मेनाशे समुदाय के बारे में:

  • यह मणिपुर और मिजोरम का एक यहूदी-पहचान वाला समुदाय है। 
  • ये मिज़ो-कुकी जनजातियों से संबंधित हैं। ये जनजातियां “इजरायल की दस खोई हुई जनजातियों" (मेनाशे की जनजाति) में से एक की वंशज होने का दावा करती हैं।
  • इस जनजाति को 722 ईसा पूर्व में असीरियाई विजेताओं द्वारा निर्वासित कर दिया गया था।
  • बनेई मेनाशे का अर्थ हिब्रू में मनश्शे की संतान है। मनश्शे जोसेफ का प्रथम पुत्र था। 

बेलगोरोड क्षेत्र (रूस): हाल ही में रूस के बेलगोरोड क्षेत्र (Belgorod Region) पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए, जिनमें जनहानि हुई तथा महत्वपूर्ण ऊर्जा अवसंरचना को नुकसान पहुंचा।

  • यह दक्षिण-पश्चिमी रूस में स्थित है, और यूक्रेन के साथ राज्य की सीमा भी साझा करता है।
  • यह एक औद्योगिक केंद्र है, जो रूस के एक-तिहाई लौह अयस्क का उत्पादन करता है और कृषि में अग्रणी है। 
  • फ़ॉकलैंड द्वीप समूह: UK ने फ़ॉकलैंड द्वीप समूह पर संप्रभुता में किसी भी बदलाव को खारिज कर दिया है। वहीं द्वीप के संबंध में संयुक्त राज्य अमेरिका की नीति अभी भी समीक्षाधीन है। 
    • यह दक्षिण अटलांटिक महासागर में यूनाइटेड किंगडम का एक आंतरिक रूप से स्वशासित विदेशी क्षेत्र है। 
    • फ़ॉकलैंड एक द्वीपसमूह है, जिसमें दो बड़े द्वीप (पूर्वी फ़ॉकलैंड और पश्चिमी फ़ॉकलैंड) और कई सौ छोटे द्वीप शामिल हैं। 
    • यह दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी सिरे से लगभग 480 किमी उत्तर-पूर्व में और मैगलन जलडमरूमध्य (Strait of Magellan) के पूर्व में समान दूरी पर स्थित है।
    • इन द्वीपों पर अर्जेंटीना द्वारा दावा किया जाता है, और इसी विवाद के कारण 1982 में युद्ध हुआ था।
  • प्रतास द्वीप: हाल ही में चीन के तटरक्षक बल का एक जहाज दक्षिण चीन सागर के उत्तरी भाग में स्थित रणनीतिक महत्व वाले प्रतास द्वीपों (Pratas Islands) के निकट देखा गया, जो ताइवान के नियंत्रण में हैं। 
    • इसे डोंगशा द्वीप (Dongsha Island) के रूप में भी जाना जाता है, यह तीन द्वीपों का एक छोटा समूह है जो दक्षिण चीन सागर में स्थित एक प्रवाल वलय बनाता है, और यह ताइवान द्वारा शासित है। 
    • इसकी विशेषता गोलाकार एटोल (वलय) संरचना है, जिसमें डोंगशा द्वीप समुद्र तल से ऊपर एकमात्र द्वीप है, जबकि अन्य दो (उत्तरी वेरेकर बैंक और दक्षिणी वेरेकर बैंक) जलमग्न हैं।
    • यह चीन और ताइवान के बीच विवादित है।
  • दक्षिण चीन सागर के अन्य द्वीप: स्प्रैटली द्वीप (Spratly Islands), पारसेल द्वीप (Paracel Islands), और स्कारबोरो शोल (Scarborough Shoal)। 

अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने विश्व प्रवासन रिपोर्ट 2026 (World Migration Report 2026) जारी की।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • वैश्विक प्रवासन: 2024 में लगभग 304 मिलियन लोग अपने जन्म वाले देश से बाहर रह रहे थे, जो वैश्विक आबादी का 3.7% है, जबकि 1990 में यह 2.9% था।
  • शीर्ष प्रवास मार्ग: मैक्सिको-अमेरिका (पहला), अफगानिस्तान-ईरान (दूसरा), सीरिया-तुर्की (तीसरा), रूस-यूक्रेन (चौथा), भारत-UAE (पांचवां) और भारत-अमेरिका (छठा)
  • विकास को गति देने वाला प्रवासन: 2024 में वैश्विक स्तर पर विप्रेषण (Remittances) अनुमानतः 905 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें निम्न और मध्यम आय वाले देशों को भेजे गए 685 बिलियन डॉलर शामिल हैं।
  • भारत से संबंधित:
    • UAE में भारतीय प्रवासियों की संख्या 3 मिलियन से अधिक थी, जबकि USA में भारतीय प्रवासियों की संख्या लगभग 3.2 मिलियन (मैक्सिकन प्रवासियों के बाद दूसरी सबसे बड़ी संख्या) थी।
    • भारत में पुरुष अप्रवासियों की तुलना में महिला अप्रवासियों की हिस्सेदारी अधिक थी।
    • भारत से पुरुषों का प्रवासन मुख्य रूप से खाड़ी देशों में श्रम प्रवासन के कारण हुआ है। 
  • हाल ही में न्यूयॉर्क में दूसरा अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन समीक्षा मंच (IMRF) 2026 आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित प्रवासन पर वैश्विक समझौते (Global Compact for Safe, Orderly and Regular Migration - GCM) के कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा करना, कमियों की पहचान करना, सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना तथा भविष्य की वैश्विक प्रवासन व्यवस्था को दिशा देना है। 
    • IMRF का आयोजन प्रत्येक चार वर्ष में एक बार किया जाता है। 
  • रेखांकित की गई प्रमुख चिंताएं: 
    • असमान पहुंच और बढ़ता विस्थापन
      • अधिकांश विस्थापन संघर्ष, पर्यावरणीय दबावों और संरचनात्मक कमजोरियों के संयुक्त प्रभाव के कारण होते हैं।
    • प्रवासियों की मृत्यु, हिरासत और उनका शोषण।
    • बढ़ता भेदभाव और प्रवासी-विरोधी विमर्श।
  • संयुक्त राष्ट्र महासचिव द्वारा रेखांकित की गई छह प्राथमिकताएं:
    • अधिकार-आधारित प्रवासन शासन सुनिश्चित करना। 
    • संकट में फंसे प्रवासियों की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना कि उनकी वापसी सुरक्षित और सम्मानजनक हो। 
    • तस्करों और मानव-तस्करी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करना। 
    • छात्रों, श्रमिकों, परिवारों और सुरक्षा व आश्रय चाहने वाले लोगों के लिए नियमित प्रवासन मार्गों का विस्तार करना।
    • विकास और रोजगार के माध्यम से मूल कारणों का समाधान करना।
    • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना। 

सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित प्रवासन पर वैश्विक समझौता (GCM)

  • इसे 19 दिसंबर 2018 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाया गया था।
  • यह अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन के सभी आयामों को कवर करने वाला पहला अंतर-सरकारी समझौता है। 
    • यह एक कानूनी रूप से गैर-बाध्यकारी, सहकारी ढांचा है जो राज्यों की संप्रभुता और अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत उनके दायित्वों को कायम रखता है। 
  • यह वैश्विक समझौता प्रवासन प्रशासन को मजबूत करने, वर्तमान में प्रवासन से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करने और सतत विकास में प्रवासन के योगदान का लाभ उठाने का एक अभूतपूर्व अवसर प्रदान करता है। 
    • यह सम्झौता सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा में निहित है, जिसमें सदस्य देश सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित प्रवासन को सुविधाजनक बनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताते हैं। 

ग्लोबल नेटवर्क अगेंस्ट फूड क्राइसिस ने वैश्विक खाद्य संकट रिपोर्ट, 2025 जारी की। यह वैश्विक खाद्य संकट रिपोर्ट का 10वां संस्करण है। 

  • रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में 47 देशों के 266 मिलियन (26.6 करोड़) से अधिक लोगों ने उच्च स्तर की गहन खाद्य असुरक्षा का सामना किया।
  • इसका मुख्य कारण संघर्ष है। इससे पहले चरम मौसमी घटनाएं सबसे बड़ा कारण थीं

ग्लोबल नेटवर्क अगेंस्ट फूड क्राइसिस के बारे में

  • स्थापना: इसकी स्थापना 2016 में विश्व मानवीय शिखर सम्मेलन में यूरोपीय संघ (EU) और WFP (विश्व खाद्य कार्यक्रम) के साथ खाद्य और कृषि संगठन (FAO) द्वारा की गई थी।
  • उद्देश्य: यह मानवीय और विकास क्षेत्रक में कार्य करने वालों की एक बहु-हितधारक पहल है। इसमें अलग-अलग संगठन खाद्य संकट के मूल कारणों से निपटने और संधारणीय समाधानों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता के लिए एकजुट हुए हैं। 

संबंधित सुर्खियां: हंगर मैप 

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने एक नया AI-आधारित खाद्य अलर्ट प्लेटफॉर्म 'हंगर मैप' (Hunger Map) आरंभ किया है। यह रियल-टाइम निगरानी को बेहतर बनाता है, ताकि वैश्विक भुखमरी से निपटने के लिए मानवीय प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

WFP के बारे में (मुख्यालय: रोम) 

  • यह विश्व की सबसे बड़ी मानव-सहायता एजेंसी है। यह आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों की जान बचाने के साथ-साथ समुदायों को आत्मनिर्भर और आपदाओं के प्रति अधिक लचीला (Resilient) बनाने के लिए कार्य करती है। 
  • WFP की स्थापना 1961 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) और खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा की गई थी।
  • यह संगठन 120 से अधिक देशों में कार्य कर रहा है।
  • वित्त-पोषण: सरकारों, कॉरपोरेट्स और निजी दाताओं से स्वैच्छिक दान द्वारा। 

AIIB ने उन सदस्यों की सहायता करने के लिए ‘ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक लचीलापन सुविधा’ शुरू की है, जिनका विकास मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष से प्रभावित हो सकता है।

  • यह दो वर्षों के लिए 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक की समयबद्ध वित्तपोषण व्यवस्था प्रदान करता है। 
  • AIIB ने उन सदस्यों का समर्थन करने के लिए एक ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक लचीलापन सुविधा शुरू की है जिनका विकास मध्य पूर्व में संघर्ष से प्रभावित हो सकता है।
  • यह दो वर्षों में 10 अरब अमेरिकी डॉलर तक का समयबद्ध वित्तपोषण पैकेज प्रदान करता है।
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ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलसंधि में कार्गो संचालन की देखरेख और प्रबंधन के लिए एक नए विनियामक निकायPGSA’ के गठन की घोषणा की है।

फारस की खाड़ी जलसंधि प्राधिकरण (PGSA) के बारे में

  • यह महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग से जुड़े घटनाक्रमों की निगरानी और संचालन के समन्वय के लिए जिम्मेदार संस्था है।  
  • नई व्यवस्था के तहत जहाजों को इस प्राधिकरण द्वारा जारी निर्देशों का पालन करना होगा और होर्मुज जलसंधि में प्रवेश करने से पहले ट्रांजिट परमिट प्राप्त करना होगा।
  • यह होर्मुज जलसंधि के लिए ट्रांजिट टोल प्रणाली संचालित करेगा, हालांकि इसकी पूरी जानकारी अभी तक ईरान द्वारा सार्वजनिक नहीं की गई है। 
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प्रवासी (Diaspora)

अपने मूल देश से बाहर रहने वाले किसी राष्ट्र या जातीय समूह के लोग, जो अक्सर सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को बनाए रखते हैं।

व्यापार संतुलन

किसी देश द्वारा निर्यात की गई वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य तथा आयात की गई वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य के बीच का अंतर। यदि निर्यात मूल्य आयात मूल्य से अधिक है, तो व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है।

सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र (Most Favoured Nation - MFN)

विश्व व्यापार संगठन (WTO) के तहत एक सिद्धांत, जिसके अनुसार एक देश अपने सभी व्यापारिक भागीदारों को समान व्यापार व्यवहार प्रदान करता है, बिना किसी भेदभाव के।

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