केंद्र सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि (सेवानिवृत्त) को देश का अगला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) नियुक्त किया।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के बारे में
- पद का सृजन: CDS का पद वर्ष 2019 में सृजित किया गया था। यह 1999 की के. सुब्रमण्यम समिति (कारगिल समीक्षा समिति) की रिपोर्ट के आधार पर 2001 में गठित मंत्रियों के समूह (GoM) की सिफारिशों पर सृजित किया गया।
- CDS के कार्य और जिम्मेदारियां:
- वह तीनों सेनाओं के मामलों पर रक्षा मंत्री के प्रधान सैन्य सलाहकार की भूमिका निभाता है।
- सैन्य कार्य विभाग (DMA) का प्रमुख: पदेन सचिव के रूप में, CDS सशस्त्र बलों के मामलों, खरीद (पूंजी अधिग्रहण को छोड़कर), और एकीकरण (प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक आदि में "संयुक्तता" को बढ़ावा देना) की देखरेख करता है।
- चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी का स्थायी अध्यक्ष: वह तीनों सेना प्रमुखों के बीच समन्वय करने के लिए "समकक्षों में प्रथम" के रूप में कार्य करता है।
- रणनीतिक कार्य: थिएटर कमांड, परमाणु प्राधिकरण (परमाणु कमान प्राधिकरण के सैन्य सलाहकार) और नीति एवं योजना निर्माण।
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1 sourceप्रस्तावित स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट में ड्रोन, रडार, आधुनिक कैमरे और अन्य अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियां शामिल होंगी। इस योजना का उद्देश्य बांग्लादेश और पाकिस्तान के साथ लगने वाली भारतीय सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित और अभेद्य बनाना है।
भारत में स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट की ज़रूरत क्यों है?

- विशाल स्थलीय सीमा: भारत सात देशों (बांग्लादेश, चीन, पाकिस्तान, नेपाल, म्यांमार, भूटान और अफगानिस्तान) के साथ 15,106.7 किलोमीटर लंबी स्थलीय सीमा साझा करता है।
- अवैध गतिविधियां रोकने के लिए: घुसपैठ, संगठित अपराध, नशीले पदार्थों की तस्करी, पशु तस्करी, हथियारों की तस्करी और नकली मुद्रा के कारोबार को रोकने के लिए सीमाओं पर सख्त निगरानी रखना आवश्यक है।
- नए प्रकार के सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए: जैसे साइबर हमले, हाइब्रिड वॉरफेयर और ड्रोन के माध्यम से होने वाली घुसपैठ से निपटने के लिए।
- दुर्गम भू-भाग और प्रतिकूल जलवायु दशाएं: भारत की सीमा पर मरुस्थल, ग्लेशियर, झीलें, नदियाँ, बर्फ से ढकी चोटियां, दलदली ज़मीन और घने जंगल हैं। इन स्थलों पर चौबीसों घंटे सुरक्षा बलों को तैनात रखना कठिन होता है।
- प्रौद्योगिकी के माध्यम से दक्षता बढ़ाना: सीमा सुरक्षा का प्रबंधन एकीकृत तरीके से, रियल टाइम में और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के अधिक उपयोग के माध्यम से करने की आवश्यकता है।
स्मार्ट सीमा-सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम
- एंटी-ड्रोन सिस्टम: वायु जनित खतरों से निपटने के लिए जैमिंग और डिटेक्शन तकनीकों का एकीकरण किया गया। उदाहरण के लिए: IG T-शुल पल्स एंटी-ड्रोन सिस्टम।
- व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली (CIBMS): सीमा की वास्तविक समय में निगरानी के लिए स्मार्ट फेंसिंग (स्मार्ट बाड़), सेंसर, रडार, सीसीटीवी कैमरे और कमांड-कंट्रोल सिस्टम उपयोग किए जा रहे हैं।
- BOLD-QIT प्रोजेक्ट: यह सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा भारत-बांग्लादेश सीमा पर शुरू की गई एक हाई-टेक 'स्मार्ट फेंसिंग' पहल है।
सिपरी (SIPRI) ने 'वैश्विक सैन्य व्यय के रुझान, 2025' रिपोर्ट जारी की है।
- SIPRI (स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट) संघर्ष, हथियार नियंत्रण और निरस्त्रीकरण पर शोध के लिए समर्पित एक स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय संस्थान है। इसकी स्थापना 1966 में स्टॉकहोम (स्वीडन) में हुई थी।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर:
- 2025 में सैन्य मद में सबसे अधिक व्यय करने वाले शीर्ष 5 देशों का कुल वैश्विक सैन्य व्यय में 58% हिस्सा रहा। ये देश हैं; संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, रूस, जर्मनी और भारत।
- 92.1 बिलियन डॉलर के कुल सैन्य व्यय के साथ भारत विश्व में पांचवां सबसे बड़ा सैन्य व्यय करने वाला देश (कुल वैश्विक व्यय का 3.2%) है।
- पिछले वर्ष की तुलना में भारत के सैन्य व्यय में 8.9% की वृद्धि दर्ज की गई।
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1 sourceरक्षा मंत्री ने आंध्र प्रदेश में उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (Advanced Medium Combat Aircraft: AMCA) कार्यक्रम फैसिलिटी की आधारशिला रखी।

उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (AMCA) के बारे में
- स्वदेशी स्टील्थ फाइटर: AMCA भारत का स्वदेशी 5वीं पीढ़ी का मध्यम वजन वाला, स्टील्थ बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है।
- विकासकर्ता: वैमानिकी विकास एजेंसी ( ADA), DRDO
- वेरिएंट्स: GE-F414 इंजन युक्त AMCA Mk1; स्वदेशी इंजन युक्त AMCA Mk2
- समय-सीमा: प्रोटोटाइप 2028-29 तक तैयार हो जाने का अनुमान है और इसे 2034-35 तक सेना में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।वर्तमान में संचालित (ऑपरेशनल) 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के उदाहरण: F-22 और F-35 (संयुक्त राज्य अमेरिका), सुखोई Su-57 (रूस), चेंगदू J-20 (चीन)।
5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान AMCA का सामरिक महत्व
- भारतीय वायुसेना का आधुनिकीकरण: मिग-29 और मिराज विमानों के चरणबद्ध रूप से सेवा से हटने के बाद उत्पन्न महत्वपूर्ण क्षमता अंतर को भरने में मदद करेगा तथा भारतीय वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या को फिर से मजबूत करेगा।
- तकनीकी संप्रभुता: विदेशी रक्षा प्लेटफॉर्मों पर निर्भरता कम करेगा और ‘मेक इन इंडिया’ के माध्यम से दीर्घकालिक रक्षा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा।
- आत्मनिर्भर भारत: मजबूत घरेलू एयरोस्पेस औद्योगिक प्रणाली विकसित कर भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को सशक्त बनाएगा।
भारत ने ओडिशा स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से 'दिव्यास्त्र' मिसाइल का दूसरा सफल उड़ान परीक्षण किया।
'दिव्यास्त्र' मिसाइल के बारे में
- यह मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) सिस्टम से युक्त एक उन्नत अग्नि मिसाइल है।
- MIRV प्रणाली: इसे मूल रूप से 1960 के दशक की शुरुआत में विकसित किया गया था। यह प्रणाली किसी एकल मिसाइल को कई परमाणु हथियार एक साथ ले जाने में सक्षम बनाती है, जिनमें से प्रत्येक स्वतंत्र रूप से अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम है।
- संयुक्त राज्य अमेरिका (MIRV तकनीक विकसित करने वाला पहला देश), रूस, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और चीन के पास भी MIRV तकनीक है।
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1 sourceस्वदेशी रूप से विकसित वायु अस्त्र-1 के अधिक ऊंचाई वाले परीक्षणों को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
वायु अस्त्र-1 के बारे में
- यह एक लॉयटरिंग म्यूनिशन है, जिसे कामिकेज़/सुसाइड ड्रोन भी कहा जाता है। यह हवा में मंडराने, निगरानी करने और सटीक हमले करने में सक्षम है।
- सुसाइड ड्रोन एक मानव रहित हवाई हथियार है, जो लक्ष्य क्षेत्र के ऊपर कुछ समय तक मंडरा सकता है और फिर अपने साथ लगे विस्फोटक के साथ लक्ष्य से टकराकर उसे नष्ट कर देता है।
- मारक क्षमता और पेलोड: इससे 10 किलोग्राम वजनी वॉरहेड के साथ 100 किलोमीटर तक की रेंज का परीक्षण किया गया।
- विशेषताएं: सटीकता और रात्रि में सक्रिय रहने की क्षमता, अधिक ऊंचाई पर मंडराने की क्षमता, इंटेलिजेंट कॉम्बैट जैसी विशेषताएं, आदि।
INS महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया है। यह नीलगिरी-श्रेणी (प्रोजेक्ट 17A) का छठा और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDSL) द्वारा निर्मित चौथा पोत है।
- प्रोजेक्ट 17A के अन्य पोत हैं: दूनागिरि, तारागिरि, उदयगिरि, हिमगिरि, नीलगिरि।
प्रोजेक्ट 17A के बारे में
- प्रोजेक्ट 17A के तहत आधुनिक फ्रिगेट्स (युद्धपोत) बनाए जा रहे हैं। ये बहुउद्देशीय और कई मिशनों वाले युद्धपोत हैं।
- इन्हें वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो (WDB) द्वारा डिजाइन किया गया है और वॉरशिप ओवरसीइंग टीम (मुंबई) द्वारा इसकी निगरानी की गई है।
- P17A जहाजों को P17 (शिवालिक-श्रेणी) की तुलना में उन्नत हथियारों और सेंसर सूट से सुसज्जित किया गया है। ये तीन तरह के युद्ध में सक्षम हैं: सतह पर हमला, हवा में हमला, पनडुब्बी के खिलाफ।
- ये पोत कंबाइंड डीजल या गैस (CODOG) प्रणोदन संयंत्रों से सुसज्जित हैं। इनमें एक डीजल इंजन और एक गैस टर्बाइन, शामिल होते हैं।
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1 sourceDRDO और भारतीय वायु सेना (IAF) ने ओडिशा में टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑगमेंटेशन (TARA) हथियार का पहला उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किया।
TARA के बारे में:
- यह भारत की पहली स्वदेशी ग्लाइड हथियार प्रणाली है। यह गैर-निर्देशित वारहेड्स को सटीक-निर्देशित हथियारों में बदल देती है।
- विकास: इसका विकास रिसर्च सेंटर इमारत (RCI), हैदराबाद द्वारा DRDO की अन्य प्रयोगशालाओं से सहयोग से किया गया है।
- लाभ: इसकी 'स्टैंड-ऑफ' क्षमता पायलटों को दुश्मन की वायु रक्षा कवरेज के बाहर से बम गिराने में सक्षम बनाती है।
- तैनात होने के बाद, ये बम उच्च सबसोनिक गति (>650 किमी/घंटा) से ग्लाइड करते हैं, जिनकी रेंज 80 किमी से अधिक होती है, इससे उन्हें रोकना कठिन हो जाता है।
- भारत में अन्य ग्लाइड बम: गौरव (LRGB), SAAW (स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड वेपन) आदि।
हाल ही में ईरानी सरकारी मीडिया द्वारा होर्मुज जलसंधि (Strait of Hormuz) में समुद्र के नीचे बिछी केबल्स के ऑपरेटरों पर शुल्क लगाने का प्रस्ताव वैश्विक अंडरसी केबल नेटवर्क के समक्ष बढ़ते जोखिमों को दर्शाता है।
अंडरसी केबल्स के बारे में
- अंडरसी यानी समुद्र के नीचे बिछी केबल्स फाइबर ऑप्टिक लाइनें होती हैं। ये वैश्विक डेटा संचार के लिए समुद्री नितल पर बिछाई जाती हैं। ये वास्तव में आधुनिक डिजिटल कनेक्टिविटी की रीढ़ के रूप में कार्य करती हैं।

- ये केबल्स "अदृश्य राजमार्ग" (invisible highways) की तरह हैं। ये विश्व के 95% से 99% अंतर्राष्ट्रीय डेटा ट्रैफ़िक प्रसारित करती हैं।
- संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने 2010 में सबमरीन केबल को "अति-महत्वपूर्ण संचार अवसंरचना" (क्रिटिकल कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर) के रूप में वर्णित किया था।
- सैटेलाइट से बेहतर: सबसी केबल्स बहुत अधिक बैंडविड्थ संचारित करती हैं और सैटेलाइट्स की तुलना में अधिक प्रभावी, किफायती और विश्वसनीय होती हैं।
- डिजिटल चोकपॉइंट्स: लाल सागर, होमुर्ज जलसंधि जैसे संकीर्ण समुद्री गलियारों में कई अंडरसी केबल्स एक साथ आकर मिलती हैं। इसलिए ये अक्सर "डिजिटल चोकपॉइंट्स" कहलाते हैं।
भारत पर प्रभाव
- वित्तीय क्षेत्र: उदाहरण के लिए, तीव्र डेटा कनेक्टिविटी पर निर्भर रहने वाली शेयर ट्रेडिंग (स्टॉक ट्रेडिंग) और बैंकिंग प्रणालियां कुछ ही मिनटों में ठप हो सकती हैं।
- आईटी और आउटसोर्सिंग क्षेत्रक: उदाहरण के लिए, भारत का ‘सूचना प्रौद्योगिकी और बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट (IT-BPM)’ उद्योग अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करने के लिए निर्बाध वैश्विक कनेक्टिविटी पर निर्भर करता है।
- रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के समक्ष खतरे: उदाहरण के लिए, सैन्य संचार और खुफिया जानकारी साझा करना खतरनाक सिद्ध हो सकता है।
राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने 2025 के लाल किला विस्फोट में दुर्लभ विस्फोटक मिश्रण TATP के उपयोग को रेखांकित किया।
ट्राइएसीटोन ट्राइपरॉक्साइड (C9H18O6) के बारे में
- इसे "मदर ऑफ सैटर्न" और एसीटोन पैरॉक्साइड के रूप में भी जाना जाता है। यह एक अर्ध-स्थिर क्रिस्टलीय ठोस पदार्थ है, जो आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसे तैयार करना अपेक्षाकृत आसान होता है।
- मुख्य विशेषताएं: यह कार्बनिक पैरॉक्साइड विस्फोटकों की श्रेणी से संबंधित है।
- यह टक्कर, घर्षण, स्थैतिक विद्युत और गर्मी की स्थिति में विस्फोट हो सकता है।
- यह अत्यधिक खतरनाक होता है, तथा इसकी अल्प मात्रा (1 ग्राम) भी आघात और क्षति पहुंचा सकती है।
- आतंकी घटनाओं में उपयोग: पेरिस (2015), ब्रुसेल्स (2016), मैनचेस्टर एरिना (2017) जैसे प्रमुख आतंकी हमलों में इसका उपयोग किया गया था।
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1 sourceनारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने ‘ऑपरेशन रेजपिल’ के तहत कैप्टागन (Captagon) की तस्करी में शामिल पहले अंतर्राष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का पर्दाफाश किया।
कैप्टागन के बारे में
- कैप्टागॉन मुख्य रूप से फेनेथाइलीन और एम्फेटामाइन से बना होता है। फेनेथाइलीन का उपयोग ADHD, अवसाद और नार्कोलेप्सी जैसे विकारों के उपचार में किया जाता था।
- फेनेथाइलीन और एम्फेटामाइन, दोनों ही नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट, 1985 के अंतर्गत साइकोट्रोपिक सब्सटेंस माने जाते हैं।
- NDPS अधिनियम मादक पदार्थों और मन:प्रभावी पदार्थों (साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज) के उत्पादन, संग्रहण, तस्करी और खपत को प्रतिबंधित और विनियमित करने के लिए बनाया गया है।
- इसे “जिहादी ड्रग” के नाम से भी जाना जाता है (ISIS जैसे चरमपंथी समूहों द्वारा उपयोग किया जाता है)।
- व्यसन और दुरुपयोग की चिंताओं के बाद 1980 के दशक में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसे प्रतिबंधित कर दिया गया था। बाद में इसे साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज पर संयुक्त राष्ट्र अभिसमय की अनुसूची II के तहत सूचीबद्ध किया गया।
- CINBAX अभ्यास: यह भारतीय थल सेना का रॉयल कंबोडियाई सेना के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास है।
- प्रगति 2026 अभ्यास: यह मेघालय के उमरोई मिलिट्री स्टेशन में भारतीय सेना के नेतृत्व में आयोजित होने वाला एक बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास है।
- प्रतिभागी देश: कुल 12 राष्ट्र (भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, श्रीलंका और वियतनाम)।
- प्रगति (PRAGATI) का अर्थ है; हिंद महासागर क्षेत्र में विकास और रूपांतरण हेतु क्षेत्रीय सेनाओं की साझेदारी।