‘पाथफाइंडर’: भारत का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ऑर्बिटल डेटा सेंटर (ODC) सैटेलाइट {India’s First Artificial Intelligence (AI) Orbital Data Center (ODC) Satellite, Pathfinder} | Current Affairs | Vision IAS

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संक्षिप्त समाचार

30 Jun 2026
18 min

यह स्पेस-टेक कंपनी पिक्सेल और AI स्टार्टअप सर्वम की साझेदारी में बनाया जाएगा। इस साझेदारी में पिक्सेल सैटेलाइट को डिजाइन, निर्माण, प्रक्षेपण और संचालित करेगा, जबकि सर्वम इसका AI बैकबोन (आधार) प्रदान करेगा। 

  • ऑर्बिटल डेटा सेंटर (ODC) देश की अंतरिक्ष आधारित कंप्यूटिंग क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी सुदृढ़ करेगा। साथ ही, यह विदेशी क्लाउड अवसंरचना पर निर्भर हुए बिना स्वतंत्र रूप से कार्य करेगा।

ऑर्बिटल डेटा सेंटर्स (ODCs) क्या है?

  • अर्थ: यह अंतरिक्ष में कार्य करने वाला ऐसी डेटा प्रोसेसिंग और स्टोरेज प्रणाली है, जिसे आवश्यकता के अनुसार बढ़ाई जा सकती है। यह क्लाउड तकनीक पर आधारित प्रणाली है।
    • ये सेंटर्स पृथ्वी पर स्थित क्लाउड प्रणाली के साथ समन्वय में भी कार्य कर सकते हैं या फिर बिना किसी बाहरी सहायता के, अंतरिक्ष में ही स्वतंत्र रूप से भी कार्य कर सकते हैं।

ऑर्बिटल डेटा सेंटर्स का महत्व

  • प्रचुर और निरंतर ऊर्जा: डॉन-डस्क सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट (SSO) में होने के कारण, इसे लगातार और तेज सौर ऊर्जा मिलती रहती है। इस पर रात्रि, मौसम या वायुमंडल का कोई प्रभाव नहीं पड़ता, इसलिए विद्युत की आपूर्ति बिना अवरोध के मिलती रहती है।
  • प्राकृतिक रेडियोएक्टिव शीतलनअंतरिक्ष का गहन निर्वात (वैक्यूम) एक विशाल और ठंडे “हीटसिंक” की तरह कार्य करता है, जिसका परिवेशी तापमान लगभग -270°C होता है। इस कारण डेटा सेंटर्स को शीतलन के लिए जल की जरूरत नहीं पड़ती। इससे ऊर्जा और जल, दोनों की बचत होती है।
    • भूमि पर स्थित 40 मेगावाट (MW) का डेटा सेंटर क्लस्टर प्रतिवर्ष 10 लाख टन से अधिक जल की खपत कर सकता है।
    • क्षमता विस्तार योग्य और तेजी से तैनाती: ODCs को मॉड्यूलर डिजाइन के जरिए आसानी से और लगभग असीमित रूप से विस्तारित किया जा सकता है। इन्हें जमीन पर बड़े डेटा सेंटर बनाने की तुलना में शीघ्र प्रक्षेपित/शुरू किया जा सकता है।
  • भूमि पर स्थित डेटा सेंटर्स की कमियों को दूर करना:
    • विद्युत की उच्च खपत: विश्व आर्थिक मंच के अनुसार बड़े डेटा सेंटर्स वैश्विक विद्युत का लगभग 1.5% उपभोग करते हैं।
    • भूमि अधिग्रहण और स्वीकृति से संबंधित बाधाएं: बड़े (हाइपरस्केल) डेटा सेंटर्स के लिए बहुत अधिक जमीन की जरूरत होती है। साथ ही योजना बनाना, अनुमति लेना और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन जैसी प्रक्रियाएं भी काफी जटिल होती हैं।

 पाथफाइंडर के बारे में

  • श्रेणी: यह 200 किलोग्राम वर्ग का सैटेलाइट होगा। इसके 2026 की चौथी तिमाही तक अंतरिक्ष की कक्षा में पहुंचने का अनुमान है।
  • प्रमुख विशेषताएं:
    • डेटा सेंटर-ग्रेड GPU (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट): पारंपरिक सैटेलाइट्स कम शक्ति वाले प्रोसेसर पर निर्भर होते हैं, वहीं यह अंतरिक्ष में हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC) प्रदान करेगा।
    • हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग कैमरा: इसे पहली बार किसी सैटेलाइट पर तैनात किया जाएगा। इससे डेटा विश्लेषण और निर्णय लेने की प्रक्रिया वास्तविक समय में और तेज हो जाएगी।

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने “व्हीकल-टू-एवरीथिंग (V2X) संचार के लिए विनियामक फ्रेमवर्क” पर एक परामर्श पत्र जारी किया। इस तरह के संचार में सेलुलर-V2X (C-V2X) को प्राथमिक प्रौद्योगिकी माना गया है। C-V2X मौजूदा 4G और 5G नेटवर्क का उपयोग करता है।

  • व्हीकल-टू-एवरीथिंग (V2X) संचार दो मुख्य वायरलेस प्रौद्योगिकियों पर आधारित है: 
    • डेडिकेटेड शॉर्ट-रेंज कम्युनिकेशन (DSRC): वाई-फाई (Wi-Fi) का उपयोग करता है, और 
    • सेलुलर-V2X (C-V2X): यह एक अधिक व्यापक मानक है। यह सेलुलर यानी मोबाइल नेटवर्क पर आधारित है।  

V2X संचार के बारे में

  • V2X एक ऐसी संचार प्रणाली है जिसमें वाहन (गाड़ी) अपने आसपास के अन्य वाहनों, अवसंरचनाओं, पैदल चलने वालों और नेटवर्क के साथ रीयल-टाइम जानकारी (जैसे-अवस्थिति और गति) का आदान-प्रदान करता है। यह संचार शॉर्ट-रेंज या प्रत्यक्ष कनेक्शन के जरिए होता है।
  • यह इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (ITS) और कनेक्टेड मोबिलिटी का एक मुख्य घटक है।

V2X का महत्त्व

  • सड़क सुरक्षा की दृष्टि से: V2X प्रौद्योगिकी गाड़ियों के बीच जानकारी साझा करके दुर्घटनाओं को कम करने में मदद करती है। यह टक्कर से बचाव, सड़क चौराहों का बेहतर प्रबंधन और आपातकालीन सेवा वाले वाहनों के लिए चेतावनी प्रणाली जैसी सुविधाएं प्रदान करती है। इससे दुर्घटनाएं और इससे होने वाली मौतें कम होती हैं।
    • ध्यातव्य है कि सतत विकास लक्ष्य (SDG) 3.6 के तहत 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में घायलों और मौतों की संख्या को आधा करने का लक्ष्य रखा गया है।
      • उदाहरण के लिए: संयुक्त राज्य अमेरिका में फॉरवर्ड कोलिजन वार्निंग सिस्टम ने एक वाहन द्वारा दूसरे वाहन को पीछे से टक्कर मारने की दर में 9% की कमी दर्शाई।
  • यातायात का बेहतर प्रबंधन: V2X तकनीक ट्रैफिक सिग्नल्स को स्मार्ट तरीके से समन्वित करके यातायात संचालन को सुचारु बनाती है और सड़क पर जाम को कम करती है।
  • स्वचालित (ऑटोनोमस) वाहन सहायता: स्वचालित यानी ड्राइवर-रहित गाड़ियों को बाहरी डेटा प्रदान करके बेहतर निर्णय लेने में मदद करती है।
  • पर्यावरण अनुकूल: यह तकनीक ईंधन की खपत और उत्सर्जन को कम करती है। इस प्रकार संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति में योगदान देती है।
  • 5G और स्मार्ट सिटी एकीकरण: V2X तकनीक 5G नेटवर्क के साथ मिलकर तेज और कम देरी वाला संचार संभव बनाती है। इससे स्मार्ट शहरों में जुड़ी हुई और बेहतर शहरी परिवहन व्यवस्था विकसित होती है।

व्हीकल-टू-एवरीथिंग (V2X) अपनाने की चुनौतियां

  • मानकीकरण का अभाव: अलग-अलग संचार प्रोटोकॉल होने के कारण एक समान मानक की कमी है। इससे विभिन्न प्रणालियाँ आपस में सही से जुड़ नहीं पातीं। इससे बड़े स्तर पर इसका उपयोग मुश्किल हो जाता है।
  • सुरक्षा और निजता की रक्षा: साइबर हमलों का खतरा बना रहता है, इसलिए सुदृढ़ एन्क्रिप्शन और डेटा सुरक्षा तंत्र की आवश्यकता है।
  • अवसंरचना में निवेश: यातायात प्रणालियों को इस तकनीक के अनुरूप बनाने और सड़क किनारे इसके लिए अवसंरचना विकसित करने में उच्च लागत आती है।
  • विनियामक और कानूनी मुद्दे: दुर्घटना होने पर जिम्मेदारी, डेटा का स्वामित्व, बीमा आदि को लेकर स्पष्ट नियम नहीं हैं।

 

DRDO ने अपने ‘एक्टिवली कूल्ड फुल स्केल स्क्रैमजेट कम्बस्टर’ (Actively Cooled Full-Scale Scramjet Combustor) का परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस परीक्षण में यह प्रणाली 1,200 सेकंड से अधिक समय तक लगातार संचालित रही। इससे पहले यह अवधि लगभग 700 सेकंड थी।

स्क्रैमजेट प्रणोदन प्रणाली के बारे में

  • अवधारणा: स्क्रैमजेट का पूरा नाम सुपरसोनिक कंबस्टन रैमजेट है।
    • यह एक उन्नत एयर-ब्रीदिंग जेट इंजन है। इसे हाइपरसोनिक गति पर दक्षतापूर्वक कार्य करने के लिए बनाया गया है। इसमें ईंधन का दहन सुपरसोनिक गति पर ही होता है।
  • कार्य-प्रणाली: यह इंजन वाहन की आगे की तेज गति का उपयोग बाहरी हवा को अंदर खींचने और उसे संपीडित (कम्प्रेस) करने के लिए करता है, जिससे कंबस्टर में ईंधन जलाया जाता है।
    • हवा में गति करते समय यह वायुमंडलीय ऑक्सीजन का उपयोग ऑक्सीकारक के रूप में करता है।
  • ईंधन के प्रकार: हाइड्रोजन या उन्नत तरल हाइड्रोकार्बन एंडोथर्मिक (ऊष्माशोषी) ईंधन।
  • लाभ: यह प्रणाली वाहन के कुल वजन को कम करती है, जिससे यह कम लागत में पुनः उपयोग योग्य अंतरिक्ष-यात्रा के लिए अत्यधिक दक्ष प्रणोदन प्रणाली बन जाती है। साथ ही, यह प्रणाली हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के विकास के लिए भी एक आदर्श आधार प्रदान करती है।

विश्व का पहला OptoSAR सैटेलाइट ‘मिशन दृष्टि’ लांच किया गया।

  • भारतीय स्पेस स्टार्टअप गैलेक्सीआई (GalaxEye) द्वारा विकसित यह मिशन स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट से प्रक्षेपित किया गया। यह मिशन भारत में निजी क्षेत्रक द्वारा निर्मित सबसे बड़ा पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation) सैटेलाइट है।

‘मिशन दृष्टि’ के बारे में

  • OptoSAR का उपयोग: यह एक ही प्लेटफॉर्म पर मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग (MSI) और सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) को संयोजित करने वाला पहला मिशन है।
  • कक्षा: इस मिशन को सूर्य-तुल्यकालिक निम्न पृथ्वी-कक्षा (Sun-synchronous LEO) में स्थापित किया गया है।
    • LEO में स्थापित सैटेलाइट्स लगभग 160 किलोमीटर से 2,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं।
  • क्षमता: यह हर मौसम में और दिन-रात कार्य कर सकता है और तस्वीरें प्रदान कर सकता है।
    • यह अंतरिक्ष से सुदृढ़ निगरानी में मदद करेगा।
  • रिज़ॉल्यूशन: भारतीय निजी कंपनियों में उच्चतम है। अर्थात, उच्च गुणवत्ता की तस्वीरें उपलब्ध कराएगा। 

OptoSAR के बारे में

  • यह हार्डवेयर (मशीन/उपकरण) और सॉफ्टवेयर (प्रोग्राम) की एक पूरी प्रणाली है, जो मिलकर समन्वय में कार्य करेगी।
  • प्रयुक्त तकनीक: SyncFusion स्टैक।
  • यह मिशन पहले के उपग्रहों की निम्नलिखित कमियों को दूर करता है:
    • ऑप्टिकल सेंसर्स: ये स्पष्ट और समझने में आसान तस्वीरें देते हैं, लेकिन बादल और अंधेरे में कार्य नहीं कर पाते।
    • SAR (सिंथेटिक अपर्चर रडार): यह बादलों के पार निगरानी कर सकता है और दिन-रात, दोनों अवधियों में कार्य कर सकता है। हालांकि, इसकी तस्वीरें समझना थोड़ा मुश्किल होता है।
      • मिशन दृष्टि में उपर्युक्त दोनों की विशेषताएं शामिल हैं। 

स्वीडन भारत के ‘शुक्रयान’ (वीनस ऑर्बिटर) मिशन में शामिल हुआ।

  • शुक्र, पृथ्वी का सबसे निकटतम ग्रह है। माना जाता है कि इसका निर्माण पृथ्वी की समान दशाओं में हुआ था।

वीनस ऑर्बिटर मिशन (VOM) के बारे में

  • यह शुक्र ग्रह का अध्ययन करने के लिए डिजाइन किया गया भारत का पहला वैज्ञानिक मिशन है। इसे 2024 में मंजूरी दी गई थी।
  • उद्देश्य: शुक्र ग्रह की सतह और उपसतह, वायुमंडलीय प्रक्रियाओं और शुक्र के वायु मंडल पर सूर्य के प्रभाव की बेहतर समझ विकसित करना।
  • इसे मार्च 2028 में प्रक्षेपित करने की योजना है।
  • अंतरिक्ष यान के विकास और प्रक्षेपण की जिम्मेदारी इसरो की होगी।
  • LVM-3 नामक प्रक्षेपण यान इस अंतरिक्ष मिशन को दीर्घवृत्ताकार पार्किंग कक्षा (Elliptical Parking Orbit - EPO) में स्थापित करेगा।

हाल ही में, वैज्ञानिकों ने नासा के मावेन (MAVEN) मिशन के आंकड़ों का उपयोग करते हुए पहली बार किसी ग्रह के वायुमंडल में ज्वान-वुल्फ प्रभाव (Zwan-Wolf effect) को दर्ज किया। इससे पहले यह प्रभाव केवल चुंबकमंडल (मैग्नेटोस्फीयर) में ही दर्ज किया गया था।

  • मार्स एटमोस्फ़ीएयर एंड वोलेटाइल एवोल्युशन (MAVEN) अंतरिक्ष यान एक रोबोटिक ऑर्बिटर है। इसे मंगल ग्रह के ऊपरी वायुमंडल का सर्वेक्षण करने के लिए प्रक्षेपित किया गया है।
  • चुंबकमंडल किसी ग्रह के चारों ओर का वह क्षेत्र होता है जहां ग्रह का चुंबकीय क्षेत्र प्रभावी होता है।

ज्वान-वुल्फ प्रभाव के बारे में

  • यह एक ऐसी परिघटना है जिसमें विद्युत आवेशित कण चुंबकीय संरचनाओं, जिन्हें फ्लक्स ट्यूब कहा जाता है, के साथ दबाव में आगे बढ़ते हैं, ठीक वैसे ही जैसे टूथपेस्ट ट्यूब से दबाकर बाहर निकाला जाता है।
  • यह प्रभाव ग्रह के चारों ओर सौर पवन को विक्षेपित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अल्फ्वेनिक/किंक तरंगों से उत्पन्न तरंग-जनित व्यवधान पर नया अध्ययन, सूर्य की सतह की तुलना में उसके कोरोना के अत्यधिक उच्च तापमान होने की व्याख्या कर सकता है।

  • सूर्य कोरोना: सूर्य के वायुमंडल की सबसे बाहरी परत जो सूर्य की सतह से अंतरिक्ष में लाखों किलोमीटर ऊपर तक फैली हुई है।
  • तापमान विरोधाभास: कोरोना का तापमान लगभग 1 मिलियन °C तक पहुँच जाता है, जो सूर्य की सतह/ प्रकाश मंडल के तापमान (लगभग 5,500°C) से कहीं अधिक है।

अल्फ्वेनिक/किंक तरंगों के बारे में

  • अल्फ्वेनिक/किंक तरंगें: ये अनुप्रस्थ मैग्नेटोहाइड्रोडायनामिक (MHD) तरंगें हैं, जो सूर्य के कोरोना में चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के साथ चलती हैं और कोरोना की प्लाज्मा संरचनाओं में पार्श्व (साइडवेज) दोलन उत्पन्न करती हैं। 
  • कोरोना के उच्च तापमान को समझने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

वैज्ञानिकों ने पहली बार वेला सुपरक्लस्टर की सीमा का मानचित्रण किया है।

वेला सुपरक्लस्टर के बारे में:

  • यह कम से कम 20 गैलेक्सी क्लस्टर का संग्रह है। इनमें से प्रत्येक में सैकड़ों या हजारों आकाशगंगाएं हैं, जो गुरुत्वाकर्षण के तहत एकल निकाय के रूप में जुड़ी हैं।
  • यह लगभग 300 मिलियन प्रकाश-वर्ष में फैला है। इसमें लगभग 30 मिलियन बिलियन सूर्यों के बराबर पदार्थ है। 
  • यह पृथ्वी से लगभग 800 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर ‘जोन ऑफ अवॉयडेंस’ (ZoA) क्षेत्र में स्थित है। 
    • जोन ऑफ अवॉयडेंस रात्रि आकाश का लगभग 20% हिस्सा है, जो आकाशगंगा की धूल और तारों के कारण ढका रहता है। इससे पृष्ठभूमि में मौजूद आकाशगंगाएँ सामान्य (ऑप्टिकल) दूरबीनों से दिखाई नहीं देती हैं। 
  • यह लानियाकेया से अधिक विशाल है। लानियाकेया वह सुपरक्लस्टर है, जिसमें पृथ्वी और हमारी आकाशगंगा शामिल है।

भारत के चंद्रयान-3 मिशन को अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोनॉटिक्स एंड एस्ट्रोनॉटिक्स (AIAA) द्वारा 2026 के प्रतिष्ठित गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

गोडार्ड एस्ट्रोनॉटिक्स पुरस्कार के बारे में

  • महत्त्व: यह अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए AIAA द्वारा प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च पुरस्कार है।
  • पृष्ठभूमि: इस पुरस्कार को तरल ईंधन आधारित रॉकेट इंजन विकास के अग्रणी रॉबर्ट एच. गोडार्ड के नाम पर रखा गया। 1975 में इस पुरस्कार का वर्तमान विस्तारित मानदंड निर्धारित किया गया।

चंद्रयान-3 मिशन के बारे में

  • ऐतिहासिक लैंडिंग: 23 अगस्त, 2023 को, चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला पहला अंतरिक्ष यान बनकर इतिहास रच दिया।
  • मिशन की अवधि: एक चंद्र दिवस (लगभग 14 पृथ्वी दिवस)।
  • घटक: विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर।

व्यक्ति-केंद्रित (Egocentric) डेटा संग्रह में तेजी से हो रही वृद्धि ने निगरानी, सहमति और श्रम विस्थापन से जुड़े नैतिक प्रश्नों को जन्म दिया है। 

ईगोसेंट्रिक डेटा के बारे में

  • इगोसेन्ट्रिक डेटा से आशय उन वीडियो और सेंसर रिकॉर्डिंग से है, जिन्हें किसी कार्य को करने वाले व्यक्ति के दृष्टिकोण से रिकॉर्ड किया जाता है। 
    • आमतौर पर सिर, छाती या कलाई पर लगाए गए कैमरों से यह डेटा एकत्र किया जाता है। इसमें वही दृश्य दिखाई देता है जो कोई व्यक्ति किसी कार्य को करते समय देखता है, जैसे हाथों की गतिविधियां, वस्तुओं के साथ संपर्क, स्थानों में मार्ग ढूंढना आदि।
  • महत्त्व:
    • इसे इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि यह वही दृश्य दृष्टिकोण प्रदर्शित करे, जो किसी रोबोट को कार्य के दौरान प्राप्त होता है।
    • यह विजन-लैंग्वेज-एक्शन (VLA) मॉडलों को प्रशिक्षित करने के लिए उपयोगी है, जो ऐसे AI सिस्टम हैं जो दृश्य समझ, भाषा निर्देश और शारीरिक गतिविधियों को एक साथ जोड़ते हैं।
  • संबंधित चिंताएं: निगरानी रखना, निजता का उल्लंघन, जिम्मेदारी को लेकर अस्पष्टता, प्रतिपूर्ति को लेकर अस्पष्टता।

संचार मंत्रालय ने सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम (CBS) की शुरुआत की।

CBS के बारे में

  • यह दूरसंचार-आधारित लोक चेतावनी प्रणाली है। यह संस्थाओं को एक निर्धारित क्षेत्र के भीतर मोबाइल उपकरणों के जरिए एक साथ, भू-लक्षित अलर्ट प्रसारित करने में सक्षम बनाती है।
    • यह कॉमन एलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP)-आधारित सचेत (SACHET) प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत है।
  • यह राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के सहयोग से सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) द्वारा विकसित एक स्वदेशी तकनीक है।
    • C-DOT, दूरसंचार विभाग (DoT) के तहत कार्य करता है। 
  • यह पारंपरिक SMS-आधारित प्रणालियों की तुलना में अधिक प्रभावी है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि लक्षित क्षेत्रों के भीतर बड़ी आबादी तक महत्वपूर्ण सूचना को शीघ्रता और कुशलता से प्रसारित की जा सके।

79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा का आयोजन जेनेवा में किया गया।

  • 79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा की मुख्य थीम"वैश्विक स्वास्थ्य को फिर से आकार देना: एक साझा जिम्मेदारी" (Reshaping global health: a shared responsibility) थी। इस सभा के दौरान रोगाणुरोधी प्रतिरोध यानी एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) सहित कई मुद्दों पर महत्वपूर्ण संकल्प अपनाए गए और कई निर्णय लिए गए।

रोगाणुरोधी प्रतिरोध पर वैश्विक कार्य योजना (GAP-AMR) 2026–2036:

  • परिचय: यह GAP-AMR का दूसरा संस्करण है। यह 2015 में अपनाई गई पहली योजना के एक दशक के कार्यान्वयन के अनुभवों पर आधारित है।
  • लक्ष्य: वर्ष 2030 तक इंसानों में बैक्टीरियल AMR (रोगाणुरोधी प्रतिरोध) से जुड़ी मौतों में 10% की कमी लाना, कृषि-खाद्य प्रणालियों में रोगाणुरोधी दवाओं के उपयोग को घटाना तथा प्रतिरोधी सूक्ष्मजीवों (माइक्रोब्स) से होने वाले पर्यावरणीय प्रदूषण को कम करना ताकि 2024 के संयुक्त राष्ट्र महासभा के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
  • समन्वय: इसके लिए तकनीकी सहायता और समन्वय विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और उसके चार साझेदारों अर्थात खाद्य और कृषि संगठन (FAO), संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP), और विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH) द्वारा प्रदान किया जाएगा।

रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) के बारे में:

  • अर्थ: रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) तब होता है जब बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और परजीवी पर एंटीबायोटिक्स, एंटीवायरल, एंटीफंगल जैसी रोगाणुरोधी दवाइयां प्रभावी सिद्ध नहीं होती। 
  • रोग के मामलें: AMR के कारण वर्ष 2050 तक प्रतिवर्ष 3.9 करोड़ (39 मिलियन) मौतें हो सकती हैं।
  • AMR से निपटने हेतु प्रमुख पहलें:
    • भारत में: AMR पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAP-AMR) और ‘रेड लाइन अवेयरनेस’ अभियान
    • वैश्विक स्तर पर: WHO की ‘वैश्विक रोगाणुरोधी प्रतिरोध और उपयोग निगरानी प्रणाली’ (GLASS)

79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा में अपनाए गए अन्य प्रमुख संकल्प:

  • विकिरण और स्वास्थ्य पर पहला संकल्प: इसमें विकिरण से सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय प्रणालियों को मजबूत करने हेतु आयनकारी और गैर-आयनकारी, दोनों तरह के विकिरणों को शामिल किया गया है।
  • सभी के लिए स्वास्थ्य की इकोनॉमिक्स पर रणनीति (2026–2030): इसमें ऐसे कदम बताए गए हैं, जिनसे स्वास्थ्य-देखभाल को व्यवस्थित रूप से आर्थिक, राजकोषीय और औद्योगिक नीतियों में शामिल किया जा सके। 

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वैश्विक हेपेटाइटिस रिपोर्ट, 2026 जारी की।

  • इस रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर हेपेटाइटिस से होने वाली मौतों, विशेषकर हेपेटाइटिस B और C से होने वाली मौतों के मामले में भारत शीर्ष देशों में शामिल है।

हेपेटाइटिस के बारे में

  • यह यकृत की सूजन है, जो मुख्यतः हेपेटाइटिस वायरस के कारण होती है। हालांकि, अन्य प्रकार के संक्रमण, मादक पदार्थों (जैसे- शराब, कुछ दवाएं) के सेवन, और ऑटोइम्यून बीमारियां भी इसका कारण बन सकती हैं।
  • 5 मुख्य हेपेटाइटिस वायरस: टाइप A, B, C, D और E हैं।
    • टाइप B और C दीर्घकालिक बीमारी (chronic disease) का कारण बनते हैं और लिवर सिरोसिस तथा कैंसर का सबसे आम कारण हैं।
    • हेपेटाइटिस A और E आमतौर पर संक्रमित भोजन/पानी के सेवन के कारण होते हैं।
    • हेपेटाइटिस B, C और D आमतौर पर संक्रमित शरीर के तरल पदार्थों (body fluids) के पैरेंट्रल संपर्क (जैसे खून के जरिए, इंजेक्शन, ट्रांसफ्यूजन) से फैलते हैं।

एक अंतर्राष्ट्रीय समिति ने पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) का नाम बदलकर PMOS कर दिया है।

  • PCOS प्रजनन आयु की महिलाओं को प्रभावित करने वाला एक सामान्य हार्मोनल विकार है।
  • इसमें, अंडाशय अतिरिक्त एण्ड्रोजन (पुरुष विशेषताओं को नियंत्रित करने वाले हार्मोन) का उत्पादन करते हैं। इससे अनियमित मासिक धर्म, डिम्बग्रंथि पुटी (ovarian cysts), मुँहासे, वजन बढ़ना और प्रजनन संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
  • “PCOS” को भ्रामक शब्दावली माना गया क्योंकि इसके निदान वाली कई महिलाओं के अंडाशय पॉलीसिस्टिक नहीं होते हैं। नया नाम निदान और उपचार, दोनों को अधिक सटीक तरीके से प्रस्तुत करता है।

PMOS के बारे में: 

  • PMOS अनेक हार्मोनल मार्गों, केंद्रीय चयापचय संबंधी विकारों तथा व्यापक शारीरिक जोखिमों को उजागर करता है।
    • पॉलीएंडोक्राइन: कई हार्मोन-उत्पादक प्रणालियों की उपस्थिति।
    • चयापचय संबंधी (Metabolic): इसमें चयापचय संबंधी विकार, इंसुलिन प्रतिरोध तथा हृदय-चयापचय संबंधी विकारों को प्रमुख विशेषताओं के रूप में माना जाता है।
    • ओवेरियन: अनियमित मासिक धर्म, बंध्यापन और ओव्यूलेशन की समस्याएं।
    • सिंड्रोम: यह एक जटिल बहु-प्रणाली संबंधी विकार है, न कि केवल किसी एक अंग से जुड़ी समस्या।

हंटावायरस (Hantavirus) के प्रकोप के कारण डच ध्वज वाले क्रूज जहाज MV होंडियस पर 150 व्यक्ति फंस गए हैं। इनमें 3 व्यक्तियों की मृत्यु हो गई है।

हंटावायरस के बारे में

  • यह एक जूनोटिक वायरस है, जो चूहों (रैट और माइस) जैसे कृन्तकों (rodents) में पाया जाता है और इंसानों में गंभीर बीमारी उत्पन्न कर सकता है।
  • संक्रमण: इंसान आमतौर पर संक्रमित चूहों या उनके मूत्र, मल या लार के संपर्क में आने के कारण इस रोग से संक्रमित होते हैं।
  • यह 2 प्रकार के सिंड्रोम का कारण बनता है:
    • हंटावायरस कार्डियोपल्मोनरी सिंड्रोम (HCPS): फेफड़ों और हृदय को प्रभावित करने वाली तेजी से गंभीर होने वाली स्थिति।
    • हेमरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम (HFRS)
  • इसका कोई विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है।

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान से रोग उत्पन्न करने वाले अमीबा, विशेषकर मस्तिष्क भक्षी अमीबा का खतरा बढ़ सकता है।

मस्तिष्क भक्षी अमीबा के बारे में

  • यह पूरे विश्व में मृदा, और उष्ण ताजे जल की झीलों, नदियों, तालाबों और गर्म झरनों में पाया जाता है।
  • यह नाक के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है, और मस्तिष्क के ऊतकों पर हमला करता है।
    • इसके कारण प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएनसेफेलाइटिस (PAM) नामक संक्रमण हो सकता है।
    • PAM, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का एक दुर्लभ और अत्यंत गंभीर संक्रमण है, जो हमेशा प्राण-घातक होता है।

आयुष अनुदान पोर्टल को आयुष ग्रिड पहल के तहत प्रारंभ किया गया है। इसका उद्देश्य अनुदान प्रस्तावों के प्रस्तुतीकरण, प्रक्रिया, स्वीकृति और निगरानी को डिजिटल बनाना है।

आयुष ग्रिड पहल के बारे में

  • यह केंद्रीय आयुष मंत्रालय द्वारा 2018 में शुरू की गई एक डिजिटल पहल है। इसका उद्देश्य आयुष क्षेत्रक के लिए एकीकृत, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित डिजिटल प्रणाली का निर्माण करना है।
  • इस पहल के तहत, आयुष अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली (A-HMIS) और ई-औषधि (e-Aushadhi) सहित कई डिजिटल प्लेटफॉर्म्स विकसित किए गए हैं।
  • यह आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) का अनुपालन करता है और इसमें शिक्षा, अनुसंधान, औषधीय पादप प्रशासन, औषधि विनियमन आदि क्षेत्रक शामिल हैं।

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