सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) सांख्यिकीय रिपोर्ट, 2024 (SAMPLE REGISTRATION SYSTEM (SRS) STATISTICAL REPORT 2024) | Current Affairs | Vision IAS

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सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) सांख्यिकीय रिपोर्ट, 2024 (SAMPLE REGISTRATION SYSTEM (SRS) STATISTICAL REPORT 2024)

30 Jun 2026
1 min

In Summary

  • एसआरएस सांख्यिकी रिपोर्ट 2024: टीएफआर 1.9 (प्रतिस्थापन से नीचे), सीबीआर 18.3, आईएमआर 24, यू5एमआर 28।
  • जनसांख्यिकीय लाभांश: कामकाजी उम्र की आबादी 66.4%; वृद्ध आबादी 9.7%। महिलाओं के लिए विवाह की औसत आयु 23.1 वर्ष।
  • चिंताएं: क्षेत्रीय असमानताएं, जनसंख्या की बढ़ती उम्र, जन्म के समय लिंग असंतुलन, उच्च नवजात मृत्यु दर, दुर्घटना/आत्महत्या से होने वाली मौतों में वृद्धि।

In Summary

सुर्ख़ियों में क्यों?

भारत के महापंजीयक कार्यालय (ORGI) ने सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) सांख्यिकीय रिपोर्ट, 2024 जारी की है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • प्रजनन क्षमता से संबंधित प्रवृत्तियां 
    • प्रतिस्थापन स्तर से कम प्रजनन दर: कुल प्रजनन दर (TFR) 1.9 पर स्थिर रही है, जो लगातार पांचवें वर्ष प्रतिस्थापन स्तर (2.1) से कम रही है।
    • जन्म दर में गिरावट: सकल जन्म दर (CBR) कम होकर 18.3 (2024) रह गई।
      • CBR = (वर्ष के दौरान जीवित जन्मों की संख्या ÷ वर्ष के मध्य की कुल जनसंख्या) × 1000
    • शिक्षा और प्रजनन क्षमता के बीच संबंध: महिलाओं की शैक्षिक उपलब्धि में वृद्धि के साथ प्रजनन दर में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई।
  • मृत्यु दर से संबंधित प्रवृत्तियां 
    • सकल मृत्यु दर (CDR): वर्ष 2024 में सकल मृत्यु दर (CDR) 6.4 रही। समग्र मृत्यु दर अभी भी 
    • महामारी-पूर्व स्तरों से अधिक बनी हुई है।
    • शिशु मृत्यु दर: शिशु मृत्यु दर (IMR) घटकर 24 हो गई। केरल में सबसे कम शिशु मृत्यु दर (8) दर्ज की गई।
      • IMR: प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर जन्म से लेकर एक वर्ष की आयु तक होने वाले शिशुओं की मृत्यु की संख्या।
    • पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर: पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (U5MR) 28 रही है, जो बाल जीवन रक्षा में सुधार को दर्शाती है।
    • नवजात मृत्यु का बोझ: सभी शिशु मृत्यु के लगभग 73 प्रतिशत मामले नवजात शिशुओं की मृत्यु से संबंधित थे।
      • नवजात मृत्यु दर (NMR): प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर जन्म से लेकर 29 दिनों की आयु तक होने वाली नवजात शिशुओं की मृत्यु की संख्या।

जनसांख्यिकीय परिवर्तन

  • जनसांख्यिकीय लाभांश: कार्यशील आयु वर्ग (15 से 59 वर्ष) की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 66.4 प्रतिशत हो गई।
  • जनसंख्या की वृद्धावस्था: 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की आबादी 9.7 प्रतिशत तक पहुँच गई है, जो बढ़ती वृद्धावस्था की चुनौती का संकेत देती है।
  • विवाह से संबंधित प्रवृत्तियां: महिलाओं की प्रभावी विवाह आयु का औसत बढ़कर 23.1 वर्ष हो गई है, जबकि केवल 2.1 प्रतिशत महिलाओं का विवाह की कानूनी आयु सीमा 18 वर्ष से पहले हो गया था।

लैंगिक संकेतक

  • जन्म के समय लिंगानुपात (SRB): इसमें मामूली सुधार हुआ और यह प्रति 1,000 पुरुषों पर 918 महिलाओं तक पहुँच गया, हालांकि लैंगिक असंतुलन अभी भी बना हुआ है।
    • जन्म के समय लिंगानुपात (SRB): जन्म के समय प्रति 1,000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या।

स्वास्थ्य संबंधी संकेतक

  • संस्थागत प्रसव: 95.4 प्रतिशत प्रसवों में चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।

मृत्यु के बाह्य कारण

  • सड़क दुर्घटनाएं और आत्महत्याएं: सड़क दुर्घटनाओं के कारण होने वाली मृत्यु की दर बढ़कर 3.2 प्रतिशत हो गई, जबकि कुल मृत्यु के 2.8 प्रतिशत मामले आत्महत्या से संबंधित थे।

सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) के बारे में

  • यह विश्व के सबसे बड़े जनसांख्यिकीय नमूना सर्वेक्षणों में से एक है। यह वर्ष 1971 से राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर प्रजनन क्षमता, मृत्यु दर तथा अन्य जनसांख्यिकीय संकेतकों के आकलन का भारत का प्रमुख स्रोत रहा है।
  • संचालनकर्ता: भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त का कार्यालय (ORGI), गृह मंत्रालय।
  • उद्देश्य: जन्म दर, मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर (IMR) तथा प्रजनन और मृत्यु दर से संबंधित अन्य संकेतकों के विश्वसनीय वार्षिक आकलन उपलब्ध कराना।

निहितार्थ

  • उन्नत जनसांख्यिकीय संक्रमण: प्रतिस्थापन स्तर से लगातार कम बनी हुई प्रजनन दर यह संकेत देती है कि भारत धीमी जनसंख्या वृद्धि वाले एक परिपक्व जनसांख्यिकीय चरण की ओर बढ़ रहा है।
  • जनसांख्यिकीय लाभांश का अवसर: कार्यशील आयु वर्ग (66.4 प्रतिशत) की बढ़ती हिस्सेदारी उच्च आर्थिक विकास, उत्पादकता और बचत की संभावनाएं प्रदान करती है।
  • बाल स्वास्थ्य परिणामों में सुधार: शिशु मृत्यु दर (IMR) और पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (U5MR) में गिरावट मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में हुई प्रगति को दर्शाती है।
  • स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच: संस्थागत प्रसवों की उच्च दर स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच और सुरक्षित प्रसव प्रक्रियाओं का संकेत देती है।
  • सामाजिक विकास में प्रगति: विवाह की औसत आयु में वृद्धि और बाल विवाह की घटनाओं में कमी महिलाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण में सुधार को दर्शाती है।

चिंताएं 

  • प्रतिस्थापन स्तर से लगातार कम प्रजनन दर: कुल प्रजनन दर (TFR) का लगातार प्रतिस्थापन स्तर से नीचे बने रहना दीर्घकालिक जनसांख्यिकीय असंतुलन और कार्यशील जनसंख्या में कमी का कारण बन सकता है। उदाहरण के लिए, जापान और इटली में देखी गई जनसांख्यिकीय शीतकाल की स्थिति।
  • क्षेत्रीय असमानताओं का बने रहना: स्वास्थ्य और जनसांख्यिकीय संकेतकों में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों तथा विभिन्न राज्यों के बीच उल्लेखनीय अंतर भारत के जनसांख्यिकीय परिवर्तन में असमान प्रगति को दर्शाते हैं।
  • जनसंख्या की वृद्धावस्था: वृद्ध जनसंख्या (60 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग) में बढ़ोतरी से वृद्धावस्था स्वास्थ्य सेवाओं, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा की माँग बढ़ने के संकेत मिलते हैं।
  • जन्म के समय लैंगिक असंतुलन: जन्म के समय लिंगानुपात में लगातार असंतुलन पुरुष बच्चों के प्रति सामाजिक और सांस्कृतिक प्राथमिकता तथा लैंगिक भेदभाव को दर्शाता है।
  • नवजात मृत्यु का उच्च बोझ: शिशु मृत्यु के अधिकांश मामलों का नवजात अवस्था में होना मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद कमियों को उजागर करता है।
  • सड़क दुर्घटनाओं और आत्महत्याओं से होने वाली मृत्यु में वृद्धि: दुर्घटनाओं और आत्महत्याओं के कारण होने वाली मृत्यु की बढ़ती संख्या सड़क सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों को रेखांकित करती है।

निष्कर्ष

भारत के जनसांख्यिकीय परिदृश्य में संरचनात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। इसके कारण दीर्घकालिक विकास को बनाए रखने के लिए स्वास्थ्य, कौशल, उत्पादकता और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में निवेश अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो गया है। जैसे-जैसे प्रजनन दर में कमी आ रही है और जीवन प्रत्याशा बढ़ रही है, वैसे-वैसे सभी आयु वर्गों के लिए मानव पूंजी के विकास को बढ़ावा देने तथा समावेशी एवं सुदृढ़ विकास सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान केंद्रित करना आवश्यक हो गया है।

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संस्थागत प्रसव

Deliveries that take place in a healthcare facility, such as a hospital or a recognized health center. This is a crucial indicator for reducing maternal and infant mortality rates.

जन्म के समय लिंगानुपात (SRB)

जन्म के समय लिंगानुपात प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर लड़कों की तुलना में लड़कियों की संख्या को दर्शाता है। इसमें सुधार सामाजिक दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव का संकेत देता है।

जनसांख्यिकीय लाभांश

जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) तब होता है जब किसी देश की कामकाजी आयु की आबादी की संख्या उस पर निर्भर रहने वाली आबादी (बच्चों और बुजुर्गों) से अधिक होती है, जिससे आर्थिक विकास के लिए एक संभावित अवसर मिलता है।

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