माही बांसवाड़ा राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना {Mahi Banswara Rajasthan Atomic Power Project} | Current Affairs | Vision IAS
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संक्षिप्त समाचार

12 Nov 2025
3 min

हाल ही में, प्रधानमंत्री ने माही बांसवाड़ा राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना (MBRAPP) की आधारशिला रखी।

  • अवस्थिति: माही नदी पर माही बांध के निकट बांसवाड़ा, राजस्थान
  • क्षमता: 4 x 700 MWe PHWR {स्वदेशी प्रेसराइज़्ड हेवी वाटर रिएक्टर (PHWRs) की 4 परमाणु ऊर्जा इकाइयाँ}। 
  • इसका विकास अणुशक्ति विद्युत निगम (ASHVINI) द्वारा किया जाएगा। यह न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) और नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NTPC) का एक संयुक्त उद्यम है। 
  • यह परियोजना भारत की 'फ्लीट मोड (Fleet mode)' पहल का हिस्सा है।
    • इस पहल के तहत, दस एकसमान 700 MW रिएक्टर पूरे भारत में समान डिजाइन और खरीद योजनाओं के तहत बनाए जा रहे हैं। 

भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता  

  • भारत में वर्तमान में 7 परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में 24 रिएक्टर हैं। इनकी स्थापित परमाणु ऊर्जा क्षमता 8180 मेगावाट (MW) है (30 जनवरी, 2025)। 
    • सरकार ने इसे 2031-32 तक बढ़ाकर 22,480 MW करने की योजना बनाई है। 
  • 2022-23 में भारत के कुल विद्युत उत्पादन में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी 3.61% थी। यह इसे पाँचवाँ सबसे बड़ा गैर-जीवाश्म ईंधन विद्युत स्रोत बनाता है। 
  • भारत वर्तमान में अपने तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम (NPP) के पहले चरण में है। 
    • पहला चरण यूरेनियम-ईंधन वाले PHWRs पर आधारित है।
    • दूसरा और तीसरा चरण क्रमशः प्लूटोनियम-ईंधन और थोरियम का उपयोग करके फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBRs) पर आधारित हैं। 

हाल ही में, BSNL द्वारा भारत का पहला पूरी तरह से स्वदेशी 4G (5G-रेडी) नेटवर्क शुरू किया गया है। इसे C-DOT, तेजस और TCS के बीच सहयोग से विकसित किया गया है। 

  • यह भारत को 5G को तेज़ी से अपनाने और 6G के लिए आधार तैयार करने हेतु प्रौद्योगिकियों को तुरंत विकसित करने की क्षमता प्रदान करता है। 

स्वदेशी 4G स्टैक का महत्व 

  • सामरिक स्वायत्तता: यह भारत को अपनी दूरसंचार अवसंरचना को खुद से नियंत्रित करने के लिए सशक्त बनाएगा। इससे विदेशी प्रौद्योगिकियों और विदेशी विक्रेताओं पर निर्भरता कम होगी और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित होगी। 
  • क्लाउड नेटिव: यह नेटवर्क को तेजी से आधुनिक बनाने, क्षमता बढ़ाने और 5G को अपनाने को आसान बनाएगा। 
  • उपलब्धता में सुधार: यह जनजातीय क्षेत्रों, दूरस्थ गांवों और पहाड़ी क्षेत्रों को बेहतर डिजिटल सेवाएँ प्रदान करके उन्हें लाभ पहुंचा सकता है। 
  • आपूर्ति श्रृंखला का विकास: देश में ही विनिर्माण और उपयोग रोज़गार पैदा कर रहा है आपूर्ति व्यवस्था में सुधार कर रहा है, और कुशल घरेलू कार्यबल तैयार कर रहा है।
  • तकनीकी क्षमता: इसके साथ, भारत अब विश्व स्तर पर उन चुनिंदा पांच राष्ट्रों में से एक बन गया है जिनके पास पूरी तरह से स्वदेशी 4G सेवाएं शुरू करने की क्षमता है।  

इसे अनुसंधान राष्ट्रीय शोध प्रतिष्ठान (ANRF) की कार्यकारी परिषद ने स्वीकृति प्रदान की है। इसका उद्देश्य योजना का सुगम कार्यान्वयन, निजी क्षेत्र की प्रभावी भागीदारी और दीर्घकालिक नवाचार सुनिश्चित करना है। 

  • ANRF की स्थापना अनुसंधान राष्ट्रीय शोध प्रतिष्ठान (ANRF) अधिनियम, 2023 के तहत की गई है।   
  • यह वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए उच्च-स्तरीय रणनीतिक दिशा प्रदान करने वाले एक शीर्ष निकाय के रूप में कार्य करता है। 
  • 2008 के अधिनियम द्वारा स्थापित विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (SERB) का विलय ANRF में कर दिया गया है। 

अनुसंधान विकास एवं नवाचार (RDI) योजना के बारे में 

  • परिचय: 1 जुलाई, 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 1 लाख करोड़ रुपये की RDI निधि स्थापित की गई है। 
  • नोडल विभाग: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST)।
  • वित्त-पोषण संरचना: दो स्तरीय। 
    • विशेष प्रयोज्य निधि (SPF): इसे अनुसंधान राष्ट्रीय शोध प्रतिष्ठान (ANRF) के तहत प्रथम स्तर के संरक्षक के रूप में कार्य करने के लिए स्थापित किया जाएगा। 
    • द्वितीय-स्तरीय निधि प्रबंधक (SLFMs): इसमें वैकल्पिक निवेश कोष (AIFs), विकास वित्त संस्थान (DIFs), गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs) या केंद्रीकृत अनुसंधान संगठन (FROs) जैसे प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDP), जैव-प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC), IIT अनुसंधान पार्क आदि शामिल हैं।
  • कौन शामिल नहीं होगा: इसके तहत अनुदान और अल्पकालिक ऋण हेतु सहायता नहीं दी जाएगी।
  • कवरेज: इसके तहत प्रौद्योगिकी तत्परता स्तर (Technology Readiness Levels: TRLs) 4 और उससे ऊपर की रूपांतरणकारी RDI परियोजनाओं के लिए अनुमानित परियोजना लागत का 50% तक वित्त-पोषित किया जा सकता है।

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