शरीर क्रिया विज्ञान (फिजियोलॉजी) या चिकित्सा (मेडिसिन) के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार 2025 (NOBEL PRIZE IN PHYSIOLOGY OR MEDICINE 2025) | Current Affairs | Vision IAS
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शरीर क्रिया विज्ञान (फिजियोलॉजी) या चिकित्सा (मेडिसिन) के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार 2025 (NOBEL PRIZE IN PHYSIOLOGY OR MEDICINE 2025)

12 Nov 2025
1 min

In Summary

प्रतिरक्षा सहिष्णुता में खोजों का जश्न मनाते हुए, स्वप्रतिरक्षी रोगों की रोकथाम और कैंसर के उपचार में सहायता करने में केंद्रीय और परिधीय सहिष्णुता, FOXP3 जीन और नियामक टी कोशिकाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।

In Summary

सुर्ख़ियों में क्यों?

हाल ही में, शरीर क्रिया विज्ञान (फिजियोलॉजी) या चिकित्सा (मेडिसिन) के क्षेत्र में 2025 के नोबेल पुरस्कार की घोषणा की गई है। यह पुरस्कार मैरी ई. ब्रंकॉ, फ्रेड रैम्सडेल और शिमोन साकागुची को "पेरिफेरल इम्यून टॉलरेंस" (परिधीय प्रतिरक्षा सहनशीलता) से संबंधित उनकी खोजों के लिए प्रदान किया गया है।

अन्य संबंधित तथ्य 

  • हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर को हानिकारक रोगजनकों जैसे कि विषाणुओं, जीवाणुओं और कवकों आदि से बचाती है।
  • हालांकि, इसे यह भी सुनिश्चित करना होता है कि यह अपनी ही कोशिकाओं पर हमला न करे क्योंकि स्वस्थ शारीरिक क्रिया के लिए यह संतुलन बहुत महत्वपूर्ण है।
  • इस संतुलन को बनाने के लिए हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली दो प्रकार की सहिष्णुताओं; केंद्रीय सहिष्णुता (Central Tolerance) और परिधीय सहिष्णुता (Peripheral Tolerance) का उपयोग करती है।

केंद्रीय सहिष्णुता 

  • यह प्रक्रिया थाइमस में होती है। थाइमस लसीका तंत्र में एक छोटी ग्रंथि है जो T कोशिकाओं का उत्पादन और प्रशिक्षण करती है। ध्यातव्य है कि T कोशिका एक प्रकार की श्वेत रक्त कोशिका होती है।
  • प्रशिक्षण के दौरान, थाइमस स्वयं-प्रतिक्रियाशील T कोशिकाओं को हटा देता है। ये हानिकारक कोशिकाएं होती हैं जो शरीर के अपने प्रोटीन पर हमला कर सकती हैं। (इन्फोग्राफिक देखें)
  • हालांकि, यह प्रक्रिया पूर्ण नहीं है। इनमें से कुछ स्व-प्रतिक्रियाशील T कोशिकाएं थाइमस से निकलकर शरीर के परिसंचरण तंत्र और ऊतकों में प्रवेश कर जाती हैं, जिन्हें परिधीय ऊतक कहा जाता है।

परिधीय सहिष्णुता 

  • जब ये स्व-प्रतिक्रियाशील T कोशिकाएं शरीर की परिधि में पहुंच जाती हैं, तो उन्हें शरीर पर हमला करने से रोकने के लिए अतिरिक्त नियंत्रण की आवश्यकता होती है।
  • इस प्रक्रिया में, नियामक T कोशिकाएं (Treg cells) महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
    • इन विशेष प्रकार की T कोशिकाओं की खोज शिमोन साकागुची ने की थी।
  • ये निगरानी करने वाली नियामक T कोशिकाएं शरीर में घूमती रहती हैं और स्व-प्रतिक्रियाशील T कोशिकाओं को पहचानकर उन्हें हमारे अपने ऊतकों पर हमला करने से रोकती हैं।  (इन्फोग्राफिक देखें)
  • इस प्रकार, Treg कोशिकाएं यानी नियामक T कोशिकाएं एक सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्य करती हैं और शरीर को उसकी अपनी अति-सक्रिय प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं से बचाती हैं।

FOXP3 जीन की भूमिका 

  • मैरी ब्रंकॉ और फ्रेड रैम्सडेल ने FOXP3 जीन की खोज की है। यह जीन मानव शरीर में नियामक  T कोशिकाओं (Treg cells) के विकास और कार्य को नियंत्रित करता है।
  • यदि FOXP3 जीन में उत्परिवर्तन होता है, तो नियामक T कोशिकाओं का सही से उत्पादन नहीं हो पाता है।
  • इसके कारण एक दुर्लभ स्व-प्रतिरक्षी (ऑटोइम्यून) रोग हो सकता है जिसे IPEX कहा जाता है। इस रोग में हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर के अपने ही ऊतकों पर हमला करने लगती है।

खोज का महत्त्व 

  • स्व-प्रतिरक्षी (ऑटोइम्यून) रोगों का उपचार: स्व-प्रतिरक्षी रोगों में, शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वयं पर हमला करना शुरू कर देती है।
    • ऐसे रोगों से पीड़ित रोगी में, नियामक T कोशिकाओं की संख्या बढ़ाने से प्रतिरक्षा प्रणाली के स्वयं पर हमला करने वाले व्यवहार को महत्वपूर्ण रूप से कम जा सकता है।
  • कैंसर उपचार में भूमिका: कैंसर के मामलों में, नियामक T कोशिकाएं अक्सर ट्यूमर के आसपास बड़ी संख्या में पाई जाती हैं। वहां वे प्रतिरक्षा कोशिकाओं (जैसे, किलर T कोशिकाएं या किलर T सेल्स) की गतिविधि को कम कर देती हैं, जो अन्यथा कैंसर कोशिकाओं पर हमला करती हैं।
    • इसका अर्थ यह है कि बहुत अधिक नियामक T कोशिकाएं ट्यूमर की रक्षा कर सकती हैं, जिससे वह बढ़ने लगता है। इसलिए, कई कैंसर उपचारों में यह कोशिश की जाती है कि ट्यूमर के अंदर मौजूद नियामक T कोशिकाओं को कम किया जाए या उनको अवरुद्ध किया जाए
    • यह प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर कोशिकाओं पर प्रभावी ढंग से हमला करने और उन्हें नष्ट करने में सहायता करता है।

अन्य समान अनुप्रयोग 

  • अंग प्रत्यारोपण अस्वीकृति (शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा नए अंग को 'बाहरी' समझकर उस पर हमला करना) को रोकना।
  • टाइप 1 मधुमेह 
  • अस्थमा 
  • त्वचा संबंधी रोग 

 

 

 

T कोशिकाएं

  • T कोशिकाएं श्वेत रक्त कोशिकाओं का एक प्रकार हैं जो हमारे शरीर को संक्रमणों से बचाती हैं।
  • T कोशिकाओं के प्रकार: T कोशिकाएं मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं:
    • कोशिकाविषी (साइटोटॉक्सिक) T कोशिकाएं: कोशिकाविषी T कोशिकाएं वायरस और बैक्टीरिया से संक्रमित कोशिकाओं को मारती हैं। साथ ही, ये ट्यूमर कोशिकाओं को भी नष्ट करती हैं।
    • सहायक (हेल्पर) T कोशिकाएं: कोशिकाविषी T कोशिकाओं के विपरीत, सहायक T कोशिकाएं सीधे कोशिकाओं को नहीं मारती हैं। इसके बजाय, ये संकेत भेजकर आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली में अन्य कोशिकाओं को बताती हैं कि आक्रमणकारियों के खिलाफ हमले का समन्वय कैसे किया जाए।
  • नियामक T कोशिकाएं: हालांकि, इन्हें मुख्य T कोशिका प्रकारों में से एक नहीं माना जाता है, फिर भी नियामक T कोशिकाएं हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली में एक अनिवार्य भूमिका निभाती हैं। ये कोशिकाएं आवश्यकता पड़ने पर अन्य T कोशिकाओं की गतिविधि को कम करती हैं। ये T कोशिकाओं को हमारे शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करने से रोक सकती हैं।
  • सभी T कोशिकाओं में T-कोशिका ग्राही (T-सेल रिसेप्टर्स) होते हैं। ये सरफेस प्रोटीन्स होते हैं जो सेंसर के रूप में कार्य करते हैं, जिससे वे यह पता लगा पाते हैं कि शरीर पर हमला हो रहा है या नहीं।

 

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