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उपभोक्ता कार्य विभाग ने मीटर कन्वेंशन की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में विश्व मेट्रोलॉजी दिवस 2025 का आयोजन किया।

मीटर कन्वेंशन के बारे में

  • उद्भव: मीटर कन्वेंशन पर 20 मई, 1875 को हस्ताक्षर किए गए थे और इसे 1921 में संशोधित किया गया था।
  • उद्देश्य: कन्वेंशन और इसके परिशिष्ट नियमों (संयुक्त रूप से “मीटर कन्वेंशन” कहा जाता है) का उद्देश्य मीट्रिक प्रणाली का अंतर्राष्ट्रीय एकीकरण और उसमें सुधार सुनिश्चित करना है।
    • इस उद्देश्य के लिए अंतर्राष्ट्रीय भार और माप ब्यूरो (BIPM) नामक एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन की स्थापना की गई है। यह संगठन पूरे विश्व के लिए मानक मापन प्रणाली का विकास और उसका रखरखाव करता है।
  • कन्वेंशन का महत्त्व:
    • यह मेट्रोलॉजी (मापन विज्ञान) में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता है। 
    • वैज्ञानिक अनुसंधान, व्यापार और तकनीकी उपयोगों के लिए माप में वैश्विक एकरूपता सुनिश्चित करता है।
  • सदस्य देश: 64 सदस्य देश और 37 एसोसिएट राष्ट्र इस कन्वेंशन से जुड़े हैं। भारत भी इसका सदस्य है।

हाल ही में जकार्ता में आयोजित इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) संसदीय संघ की बैठक में, पाकिस्तान द्वारा कश्मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ लाए गए कठोर प्रस्ताव को इंडोनेशिया, मिस्र और बहरीन ने रोक दिया।

इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के बारे में

  • स्थापना: 1969 में मोरक्को के रबात में आयोजित शिखर सम्मेलन के बाद इस संगठन की स्थापना हुई थी।
  • सदस्य देश: 57 देश इसके सदस्य हैं (भारत सदस्य नहीं है)।
  • मुख्यालय: जेद्दा (सऊदी अरब)।
  • इस्लामिक समिट: यह OIC का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय है। इसमें सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष/ शासनाध्यक्ष शामिल होते हैं।
  • उद्देश्य: मुस्लिम जगत की सामूहिक अभिव्यक्ति के रूप में कार्य करना तथा उनके हितों की रक्षा एवं सुरक्षा करना।

हाल ही में, ब्राजील में संपन्न हुई ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में भारत ने समावेशी, संतुलित और सतत ऊर्जा गवर्नेंस के पक्ष में प्रमुख भूमिका निभाई।

बैठक के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर:

  • सतत विकास लक्ष्य-7 (SDG-7) के समर्थन को दोहराया गया। साथ ही, सभी को हर समय ऊर्जा की आपूर्ति करने; स्वच्छ रसोई ईंधन उपलब्ध कराने तथा और एनर्जी पॉवर्टी समाप्त करने के लक्ष्यों पर जोर दिया गया।
  • जलवायु कार्रवाई में बिना भेदभाव के प्रौद्योगिकियों को उपलब्ध कराने तथा CBDR-RC सिद्धांत द्वारा निर्देशित न्यायसंगत अप्रोच अपनाने पर बल दिया गया। 
    • CBDR-RC से आशय है- साझा जवाबदेही, लेकिन देशों की क्षमताओं के आधार पर अलग-अलग जिम्मेदारियां। 
  • वैश्विक ऊर्जा साझेदारी को मजबूत करने, न्यायसंगत बाजार सुनिश्चित करने, ऊर्जा व्यापार में स्थानीय मुद्राओं का उपयोग करने, और सहयोग पर बल दिया गया।
  • प्रत्येक देश को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की अपनी राह चुनने के अधिकार को मान्यता दी गई। साथ ही, ऊर्जा के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने तथा विकसित देशों से विकासशील देशों को रियायती वित्त-पोषण देने की मांग की गई।

हाल ही में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने ऑस्ट्रिया, नॉर्वे, ओमान और सिंगापुर को औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस फैट के उपभोग को समाप्त करने में उनकी उल्लेखनीय नेतृत्वकारी भूमिका के लिए औपचारिक रूप से मान्यता दी।

ट्रांस-फैट्स के बारे में:

  • ट्रांस फैट्स को ट्रांस-फैटी एसिड (TFA) भी कहा जाता है। ये असंतृप्त वसा (unsaturated fats) हैं। ये प्राकृतिक और औद्योगिक, दोनों स्रोतों से प्राप्त होते हैं।
  • औद्योगिक ट्रांस फैट्स आमतौर पर बिस्किट, तले हुए खाद्य पदार्थ, मार्जरीन और वनस्पति घी जैसे बेक्ड एवं प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में पाए जाते हैं।
  • ट्रांस फैट्स धमनियों को अवरुद्ध करते हैं, जिससे दिल के दौरे और मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।
  • भारत की पहलें: भारत ने खाद्य संरक्षा एवं मानक (बिक्री पर प्रतिबंध एवं प्रतिषेध) द्वितीय संशोधन विनियम, 2021 के तहत तेलों में ट्रांस फैट की मात्रा को अधिकतम 2 प्रतिशत तक सीमित करने का प्रावधान लागू किया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत को ट्रेकोमा को लोक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने के लिए प्रमाण-पत्र प्रदान किया।

  • दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्र में भारत तीसरा देश बन गया है, जिसने ट्रेकोमा का उन्मूलन किया है। अन्य दो देश नेपाल और म्यांमार हैं। 

ट्रेकोमा के बारे में:

  • कारण: यह क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस नामक बैक्टीरिया से होने वाला नेत्र रोग है। इसे WHO ने उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग की सूची में शामिल किया हुआ है।  
  • प्रभाव: यह आजीवन दृष्टिहीनता का कारण बन सकता है।
    • बार-बार संक्रमण होने पर पलकें अंदर की ओर मुड़ जाती हैं, जिससे पलकों की बरौनियाँ (Eyelashes) आँख की सतह को रगड़ती हैं। यह स्थायी रूप से कॉर्नियल क्षति का कारण बन सकता है।
  • संक्रमण का माध्यम: यह रोग संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से या मक्खियों के माध्यम से फैलता है।
  • भारत की पहलें: भारत में 1976 में ट्रेकोमा नियंत्रण कार्यक्रम को राष्ट्रीय दृष्टिहीनता और दृश्य क्षति नियंत्रण कार्यक्रम (NPCBVI) के तहत एकीकृत किया गया था।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DTC) के तहत भारतीय विज्ञान संवर्धन संस्थान (IASST) के शोधकर्ताओं ने न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों (NDs) के इलाज में पेप्टिडोमिमेटिक ड्रग्स की संभावनाओं का पता लगाया। 

  • NDs जटिल बीमारियां होती हैं, जिनसे तंत्रिका कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है और तंत्रिका तंत्र के विभिन्न हिस्से धीरे-धीरे खराब होने लगते हैं। उदाहरण के लिए- अल्जाइमर और पार्किंसन्स जैसी बीमारियां।

पेप्टिडोमिमेटिक ड्रग्स के बारे में

  • अर्थ: पेप्टिडोमिमेटिक ड्रग्स सिंथेटिक मॉलिक्यूल्स होते हैं। ये प्राकृतिक प्रोटीन विशेष रूप से न्यूरोट्रोफिन्स की संरचना और उनके कार्यों की नकल करते हैं। न्यूरोट्रोफिन्स न्यूरॉन्स की वृद्धि और उन्हें बनाए रखने में मदद करते हैं।
  • महत्त्व: ये ड्रग्स अंतर्जात न्यूरोट्रोफिन्स के मुकाबले ज्यादा स्थिर होते हैं और शरीर में अच्छे से अवशोषित हो जाते हैं। ये निर्धारित कोशिकाओं को लक्षित करते हैं, जिससे साइड इफेक्ट्स कम हो जाते हैं।

बानू मुश्ताक को कन्नड़ लघु कहानी संग्रह 'हार्ट लैंप' के लिए अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार के बारे में

  • इसे 2005 में मैन बुकर अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार के रूप में प्रारंभ किया गया था।
  • यह एक वार्षिक साहित्यिक पुरस्कार है। यह किसी एक पुस्तक के लिए दिया जाता है, जिसका अंग्रेजी में अनुवाद हो और उसे यूनाइटेड किंगडम या आयरलैंड में प्रकाशित किया गया है।
  • उद्देश्य: गैर-अंग्रेजी भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण कथा साहित्य को अधिकाधिक पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना।
    • यह अंग्रेजी भाषी पाठकों के बीच वैश्विक कल्पित कथा (Fiction) साहित्य को बढ़ावा देता है।
  • श्रेणियां: उपन्यास और लघु कथा संग्रह।

मणिपुर में लंबे समय से चल रहे संघर्ष के कारण दो साल के बाद शिरुई लिली उत्सव मनाया गया।

शिरुई लिली उत्सव के बारे में

  • इसे मणिपुर के पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित किया जाता है।
  • इसका नाम मणिपुर के राजकीय पुष्प शिरुई लिली के नाम पर रखा गया है। यह प्रतिवर्ष उखरूल जिले में आयोजित किया जाता है, जो तांगखुल नागा समुदाय का मूल स्थान है।
  • यह आयोजन नाजुक और लुप्तप्राय शिरुई लिली के सम्मान में मनाया जाता है, जो केवल शिरुई पहाड़ियों में ही खिलता है।
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