2026 में विश्व आर्थिक मंच (WEF) में अपने भाषण के दौरान, कनाडा के प्रधान मंत्री ने एक नया एजेंडा प्रस्तुत किया। इसे 'थर्ड पाथ' (तीसरा मार्ग) कहा गया है। इसे संयुक्त राज्य अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता और कमजोर होती 'नियम-आधारित विश्व व्यवस्था' के बीच दुनिया के लिए पेश किया गया है।
थर्ड पाथ या कार्नी सिद्धांत के बारे में:
- 'थर्ड पाथ' या 'कार्नी सिद्धांत' मुख्य रूप से “मूल्य-आधारित यथार्थवाद”, वर्चस्ववादी शक्तियों के खिलाफ “मध्यम शक्तियों के सहयोग” और “परिवर्तनशील ज्यामिति” की नीति पर आधारित है।

- मूल्य-आधारित यथार्थवाद (Value-Based Realism): यह संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और मानवाधिकारों जैसे मूल सिद्धांतों की रक्षा करता है। साथ ही, यह प्रगति की गति, अलग-अलग राष्ट्रीय हितों और साझेदारों के बीच मूल्यों के अंतर को भी स्वीकार करता है।
- महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि यह सिद्धांत घरेलू शक्ति के निर्माण पर बल देता है।
- परिवर्तनशील ज्यामिति (Variable Geometry) की नीति: इसमें मूल्यों और हितों के आधार पर अलग-अलग मुद्दों के लिए भिन्न-भिन्न गठबंधन बनाना शामिल है।
- उदाहरण: शेंगेन क्षेत्र (Schengen Area), G7 समूह, क्वाड (Quad) आदि।
- यह 'थर्ड पाथ' फ्रेमवर्क अन्य मध्यम शक्तियों, विशेष रूप से भारत के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।
मध्यम शक्तियां क्या हैं?
- महा-शक्तियां (Great Powers): ये अक्सर उन देशों के रूप में परिभाषित की जाती हैं, जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के स्थायी सदस्य हैं। ये देश विश्व पर आर्थिक, राजनीतिक और सैन्य प्रभुत्व रखते हैं।
- UNSC के स्थायी सदस्य: संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, चीन, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस।
- मध्यम शक्तियां (Middle Powers): ये वे देश हैं, जो महा-शक्तियों से नीचे आते हैं। हालांकि, वे अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था पर हावी नहीं होते, लेकिन उनके पास महत्वपूर्ण राजनयिक, आर्थिक, तकनीकी या वैचारिक प्रभाव होता है।
- उदाहरण: भारत, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया, ब्राजील और यूरोपीय संघ (EU) के विभिन्न देश।
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1 sourceयह रिपोर्ट विश्व आर्थिक मंच (WEF) ने जारी की है। इस रिपोर्ट में 'भू-आर्थिक टकराव' (Geoeconomic Confrontation) को सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक जोखिम के रूप में पहचाना गया है।
रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर

- वर्तमान और निकट भविष्य (2026) और अल्प से मध्यम अवधि (2028 तक) में, रिपोर्ट भू-आर्थिक टकराव, राज्य-आधारित सशस्त्र संघर्ष, चरम मौसम की घटनाएं, बढ़ते सामाजिक ध्रुवीकरण जैसे प्रमुख जोखिमों का उल्लेख करती है।
- दीर्घकालिक अवधि (2036 तक): पहचाने गए सबसे महत्वपूर्ण जोखिमों में चरम मौसम की घटनाएं, जैव विविधता की हानि और पारिस्थितिकी-तंत्र का पतन आदि शामिल हैं।
- भारत द्वारा सामना किए जाने वाले मुख्य जोखिम: साइबर असुरक्षा, असमानता (धन व आय), अपर्याप्त लोक सेवाएं और सामाजिक सुरक्षा (शिक्षा, अवसंरचना, पेंशन आदि)।
भू-आर्थिक टकराव क्या है?
- यह वैश्विक या क्षेत्रीय शक्तियों द्वारा आर्थिक साधनों के रणनीतिक उपयोग को संदर्भित करता है। इसका उद्देश्य व्यापार, प्रौद्योगिकी, सेवाओं, पूंजी या ज्ञान के प्रवाह को प्रतिबंधित करके सीमा-पार आर्थिक संबंधों को नया आकार देना है। इसके पीछे मुख्य लक्ष्य आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना, भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को रोकना और अपने प्रभाव क्षेत्रों को मजबूत करना होता है।
- अनुशंसित कार्रवाई (सुझाव):
- ऐसे आर्थिक प्रलोभनों को प्राथमिकता देनी चाहिए, जो परस्पर लाभ को बढ़ावा देते हैं;
- मौजूदा बहुपक्षीय संस्थाओं को मजबूत करना चाहिए;
- स्थानीय समुत्थानशीलता (local resilience) में निवेश करना चाहिए आदि।
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1 sourceभारत पैक्स सिलिका पहल में शामिल हो गया है और पैक्स सिलिका घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षरकर्ता बन गया है।
- इसके अतिरिक्त, भारत ने घोषणा के द्विपक्षीय परिशिष्ट के रूप में “भारत-अमेरिका AI अवसर साझेदारी” पर एक संयुक्त वक्तव्य पर भी हस्ताक्षर किए हैं।
पैक्स सिलिका के बारे में
- यह संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व में शुरू की गई एक पहल है। इसका इसका उद्देश्य सुरक्षित, मजबूत और नवाचार-आधारित प्रौद्योगिकी प्रणाली का निर्माण करना है।
- यह पहल संपूर्ण प्रौद्योगिकी की आपूर्ति श्रृंखला को शामिल करती है। इनमें निम्नलिखित घटक शामिल हैं:
- सेमीकंडक्टर और AI अवसंरचना;
- अति महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) और ऊर्जा संसाधन;
- उन्नत विनिर्माण और उच्च-स्तरीय हार्डवेयर;
- कंप्यूटिंग तथा डेटा लॉजिस्टिक्स।
- उद्देश्य:
- वर्चस्व वाले देश पर निर्भरता को कम करना।
- संवेदनशील प्रौद्योगिकियों की सुरक्षा करना और विश्वसनीय डिजिटल अवसंरचना का निर्माण।
- वर्तमान सदस्य देश: जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, यूनाइटेड किंगडम, इजरायल, आदि।
हिंद-प्रशांत महासागर पहल (IPOI) एक गैर-संधि आधारित स्वैच्छिक व्यवस्था है। यह एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र तथा नियम-आधारित क्षेत्रीय व्यवस्था के लिए सहयोग को बढ़ावा देती है।
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र: यह हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बीच का एक परस्पर-संबद्ध क्षेत्र है। यह अपने मुख्य व्यापारिक मार्ग, मलक्का जलडमरूमध्य द्वारा जुड़ा हुआ है।
- यहां विश्व की आधी से अधिक आबादी निवास करती है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसका लगभग दो-तिहाई योगदान है।
हिंद-प्रशांत महासागर पहल (IPOI) के बारे में
- उत्पत्ति: IPOI को भारत ने 2019 में शुरू किया था। इसे बैंकॉक (थाईलैंड) में आयोजित पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया था।

- पृष्ठभूमि: यह 2015 में भारत द्वारा घोषित "क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास" (SAGAR) पहल पर आधारित है।
- SAGAR देशों को एक सुरक्षित व स्थिर समुद्री क्षेत्र के लिए सहयोग करने और समन्वय करने हेतु प्रोत्साहित करता है।
- IPOI के 7 स्तंभ: इसमें समुद्री सुरक्षा; समुद्री पारिस्थितिकी; क्षमता निर्माण और संसाधन साझाकरण; आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन आदि शामिल हैं।
IPOI का मुख्य महत्त्व
- चीन की आक्रामकता से निपटना: उदाहरण के लिए- 2020 में भारत और वियतनाम IPOI के अनुरूप अपने द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने पर सहमत हुए थे।
- अन्य वैश्विक पहलों के साथ अभिसरण: उदाहरण के लिए- निम्नलिखित पहलें इसके साथ मिलकर कार्य करती हैं-
- AIIPOIP (ऑस्ट्रेलिया-भारत हिंद-प्रशांत महासागर पहल साझेदारी),
- AOIP (हिंद-प्रशांत के लिए आसियान दृष्टिकोण),
- IPEF (समृद्धि के लिए हिंद-प्रशांत आर्थिक फ्रेमवर्क) आदि।
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संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के मुख्य परिणाम
- रणनीतिक घोषणाएं:
- व्यापार लक्ष्य: दोनों देश 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक करने पर सहमत हुए।
- दोनों देश 'भारत मार्ट', 'वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर' और 'भारत-अफ्रीका सेतु' जैसी पहलों के माध्यम से नए बाजारों को बढ़ावा देंगे।
- असैन्य परमाणु सहयोग: शांति/ SHANTI (भारत के रूपांतरण के लिए नाभिकीय ऊर्जा का संधारणीय दोहन और अभिवर्धन) अधिनियम 2025 के लागू होने के बाद, स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) और परमाणु सुरक्षा सहित उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों में साझेदारी की संभावनाएं तलाश की जाएंगी।
- डिजिटल/ डेटा दूतावास की स्थापना: डिजिटल/ डेटा दूतावास एक 'विदेशी केंद्र' होता है, जहां कोई देश अपना महत्वपूर्ण डिजिटल डेटा संग्रहीत करता है। इसका उद्देश्य साइबर हमलों, प्राकृतिक आपदाओं या भू-राजनीतिक संघर्षों के विरुद्ध डिजिटल निरंतरता और संप्रभुता सुनिश्चित करना है।
- AI और तकनीक: 'AI इंडिया मिशन' के तहत एक सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर के लिए सहयोग किया जाएगा।
- व्यापार लक्ष्य: दोनों देश 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक करने पर सहमत हुए।
- प्रमुख समझौते / समझौता ज्ञापन (MoUs) / आशय पत्र:
- रणनीतिक रक्षा साझेदारी: इसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण और साइबर क्षेत्रों में रक्षा सहयोग को गहन करने के लिए एक फ्रेमवर्क स्थापित करना है।
- ऊर्जा आपूर्ति: ADNOC गैस द्वारा HPCL को 10 वर्षों के लिए 0.5 MTPA LNG (तरल प्राकृतिक गैस) की आपूर्ति हेतु बिक्री और खरीद समझौते (SPA) पर हस्ताक्षर किए गए।
भारत-संयुक्त अरब अमीरात (UAE) संबंधों के प्रमुख पहलू:
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जर्मन चांसलर की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने विभिन्न समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
- यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण रही, क्योंकि 2025 में दोनों देशों ने अपनी रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे किए हैं और 2026 में राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष मना रहे हैं।
मुख्य परिणाम
- रक्षा और सुरक्षा: दोनों देशों ने आशय के एक संयुक्त घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप विकसित करना है। इसमें रक्षा प्लेटफॉर्म की प्रौद्योगिकी साझेदारी, सह-विकास और सह-उत्पादन पर जोर दिया गया है।

- जर्मनी ने भारत के प्रमुख नौसैनिक अभ्यास MILAN, हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (IONS) और वायु सेना अभ्यास तरंग शक्ति में भाग लेने की इच्छा व्यक्त की।
- विदेश नीति और सुरक्षा के लिए 'ट्रैक 1.5 संवाद' तंत्र स्थापित किया गया।
- ट्रैक 1.5 कूटनीति तब होती है, जब सरकारी प्रतिनिधि और गैर-सरकारी विशेषज्ञ कम औपचारिक तरीकों से संवाद में शामिल होते हैं।
- व्यापार और अर्थव्यवस्था: आपूर्ति श्रृंखला की लोचशीलता सुनिश्चित करने के लिए, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज आदि पर केंद्रित समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
- वीज़ा और आवागमन: जर्मनी ने भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए वीज़ा-मुक्त पारगमन सुविधा की घोषणा की।
- अन्य:
- एक नए द्विपक्षीय हिंद-प्रशांत परामर्श तंत्र की घोषणा की गई।
- शिक्षा और कौशल विकास: उच्चतर शिक्षा पर भारत-जर्मन व्यापक रोडमैप को अपनाया गया।
भारत-जर्मनी संबंधों के अन्य महत्वपूर्ण पहलू
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1 sourceभारत ने शक्सगाम घाटी (Shaksgam Valley) में चीन की अवसंरचना परियोजनाओं पर औपचारिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई है।
शक्सगाम घाटी के बारे में
- यह लद्दाख में काराकोरम जल-संभर (watershed) के उत्तर में सामरिक अवस्थिति वाला एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह भारत का अभिन्न अंग है।
- अवैध हस्तांतरण: यह क्षेत्र 1947 से पाकिस्तान के अवैध कब्जे में था। पाकिस्तान ने 1963 के 'चीन-पाकिस्तान सीमा समझौता' के तहत गैर-कानूनी तरीके से इसे चीन को स्थानांतरित कर दिया था।
- इसे काराकोरम-पार क्षेत्र (ट्रांस-काराकोरम ट्रैक्ट) के नाम से भी जाना जाता है। यह शक्सगाम नदी के दोनों किनारों पर फैला हुआ है।
- भौगोलिक विशेषताएँ:
- यह उत्तर में कुनलुन पर्वत और दक्षिण में काराकोरम पर्वतमाला से घिरा हुआ है।
- यह भौगोलिक रूप से सियाचिन ग्लेशियर के बिल्कुल निकट स्थित है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डिएगो गार्सिया को लेकर चिंता जताई है। यह मामला यूनाइटेड किंगडम द्वारा डिएगो गार्सिया को मॉरीशस को लौटाने से जुड़ा है।
- डिएगो गार्सिया पर अमेरिका का एक बहुत महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा मौजूद है।
डिएगो गार्सिया के बारे में

- अवस्थिति: डिएगो गार्सिया हिंद महासागर के मध्य भाग में स्थित है। यह एक प्रवाल द्वीप (कोरल एटोल) है। यह चागोस द्वीपसमूह का हिस्सा है।
- इतिहास: 1965 से चागोस द्वीपसमूह यूनाइटेड किंगडम के नियंत्रण में था। इसे ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र (BIOT) कहा जाता था।
- मई 2025 में यूनाइटेड किंगडम और मॉरीशस के बीच एक समझौता हुआ। इसके तहत पूरा चागोस द्वीपसमूह मॉरीशस की संप्रभुता में माना गया। हालांकि, डिएगो गार्सिया को यूनाइटेड किंगडम ने 99 साल की लीज़ पर ले रखा है।
- सैन्य महत्व: डिएगो गार्सिया पर यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका का संयुक्त सैन्य अड्डा है।
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1 sourceभारत के विदेश मंत्री ने वाइमर ट्रायंगल के साथ भारत की पहली भागीदारी में हिस्सा लिया।
वाइमर ट्रायंगल के बारे में:
- यह फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड का एक क्षेत्रीय गठबंधन है। इसकी स्थापना 1991 में जर्मनी के वाइमर शहर में हुई थी।
- शुरुआत में इसे मुख्य रूप से जर्मनी और पोलैंड के बीच सहभागिता बढ़ाने वाले एक मंच के रूप में बनाया गया था।
- मुख्य उद्देश्य:
- यूरोप के एकीकरण (European Integration) को बढ़ावा देना।
- राष्ट्रों के बीच राजनीतिक संवाद स्थापित करना।
- सुरक्षा क्षेत्रक में सहयोग को मजबूत करना, आदि।