गिग वर्कर्स (Gig Workers) | Current Affairs | Vision IAS

Upgrade to Premium Today

Start Now
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

अपना ज्ञान परखें

आर्थिक अवधारणाओं में महारत हासिल करने और नवीनतम आर्थिक रुझानों के साथ अपडेट रहने के लिए गतिशील और इंटरैक्टिव सत्र।

ESC

गिग वर्कर्स (Gig Workers)

01 Mar 2026
1 min

सुर्ख़ियों में क्यों?

बड़े डिलीवरी एग्रीगेटर 10 मिनट की डिलीवरी सर्विस की डेडलाइन हटाने पर सहमत हो गए हैं।

गिग वर्कर के बारे में

  • परिभाषा: सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत पहली बार गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की परिभाषा प्रदान की गई।
    • गिग वर्कर: वह व्यक्ति जो पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध से बाहर किसी कार्य व्यवस्था में काम करता है या सेवाएँ प्रदान करता है और उससे आय अर्जित करता है।
    • प्लेटफॉर्म वर्कर: वह व्यक्ति जो प्लेटफॉर्म आधारित कार्य करता है।
      • प्लेटफॉर्म वर्क वह व्यवस्था है जिसमें संगठन या व्यक्ति किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से अन्य संगठनों या व्यक्तियों से विशिष्ट समस्या का समाधान या विशेष सेवाएँ प्राप्त करते हैं।
  • सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत पहली बार सरकार को असंगठित श्रमिकों, गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ बनाने का अधिकार दिया गया।
    • इससे पहले इन श्रमिकों को असंगठित/अनौपचारिक क्षेत्र का हिस्सा माना जाता था और उन्हें मजदूरी भुगतान अधिनियम, 1936 न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952 कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 आदि कानूनों के तहत मान्यता या सुरक्षा नहीं मिलती थी।
  • गिग कार्य के बढ़ने के प्रमुख कारण: डिजिटलीकरण और हरित ऊर्जा संक्रमण के कारण श्रम बाजार में संरचनात्मक परिवर्तन हुए हैं।
    • गिग अर्थव्यवस्था (जैसे डिलीवरी, राइड-शेयरिंग और फ्रीलांसिंग) में तेज़ी से वृद्धि हुई है। इससे कई अनौपचारिक नौकरियाँ डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित संगठित व्यवस्था में शामिल हो गई हैं।
  • वर्तमान स्थिति: आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, भारत में गिग वर्कर्स कुल कार्यबल का 2% से अधिक हैं।
    • FY21 में 77 लाख गिग वर्कर्स थे, जो FY25 में बढ़कर 120 लाख हो गए — अर्थात लगभग 55% की वृद्धि। इस वृद्धि का प्रमुख कारण 80 करोड़ स्मार्टफोन उपयोगकर्ता और प्रति माह लगभग 15 अरब UPI लेनदेन हैं।
  • भविष्य की प्रवृत्ति: नीति आयोग के अनुसार, 2029-30 तक गिग वर्कफोर्स बढ़कर 2.35 करोड़ होने की उम्मीद है।

गिग वर्कर्स द्वारा सामना की जाने वाली प्रमुख समस्याएँ

  • एल्गोरिथमिक असमानता: प्लेटफॉर्म आधारित कंपनियों के एल्गोरिथ्म कार्य आवंटन, प्रदर्शन निगरानी, वेतन निर्धारण तथा मांग-आपूर्ति को नियंत्रित करते हैं। इससे एल्गोरिथ्मिक पक्षपात (bias) की आशंका उत्पन्न होती है।
    • इसके अतिरिक्त, प्लेटफॉर्म एग्रीगेटर कंपनियों को श्रमिकों की जानकारी तक व्यापक पहुँच होती है, जबकि श्रमिकों को इन एल्गोरिथ्म के कार्य करने की प्रक्रिया की जानकारी नहीं होती, जिससे सूचना विषमता उत्पन्न होती है।
  • आय और रोजगार की अनिश्चितता: गिग क्षेत्र मुख्य रूप से बाजार की मांग पर निर्भर करता है। आर्थिक सर्वेक्षण, 2025-26 के अनुसार लगभग 40% गिग वर्कर्स की मासिक आय ₹15,000 से कम है।
    • इसके अलावा, कम वित्तीय समावेशन के कारण उन्हें ऋण प्राप्त करने में कठिनाई होती है या उनका क्रेडिट इतिहास (thin-file credit) कमजोर होता है।
  • सामूहिक सौदेबाजी की क्षमता की कमी : गिग अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत नई है और इसमें पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध स्पष्ट नहीं होता। इसलिए श्रमिकों की सामूहिक सौदेबाजी की पारंपरिक व्यवस्था अभी पूरी तरह विकसित नहीं हो पाई है।
  • कौशल विकास की सीमितता: तेजी से बढ़ती तकनीकों, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML) के कारण रोजगार के अवसर कम होने की आशंका बनी रहती है, जिससे गिग वर्कर्स की असुरक्षा और बढ़ जाती है।
  • उपयुक्त वर्गीकरण का अभाव: हालांकि सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को एक अलग श्रेणी के रूप में मान्यता दी गई है, फिर भी कानून उन्हें एक समान समूह के रूप में देखता है। वास्तव में यह श्रमिक वर्ग कौशल स्तर के आधार पर काफी विविध और विभाजित है।
    • नीति आयोग के अनुसार वर्ष 2030 तक उच्च-कौशल युक्त गिग श्रमिकों का हिस्सा लगभग 27.5% तथा निम्न-कौशल युक्त श्रमिकों का हिस्सा लगभग 33.8% होने की संभावना है।

गिग इकॉनमी से जुड़े ग्लोबल नियम

  • स्पेन (2021): 'ले राइडर' (राइडर कानून) लाया गया, जिसमें फूड डिलीवरी करने वाले कुरियर कर्मचारियों को स्व-नियोजित ठेकेदार के बजाय कर्मचारी के रूप में मान्यता दी गई। 
  • यूरोपियन यूनियन प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स डायरेक्टिव (2024): इसका उद्देश्य उन गिग वर्कर्स की रोजगार स्थिति को सुधारना है जिन्हें गलत तरीके से स्व-नियोजित कर्मचारी के रूप में वर्गीकृत गया था। यह नियम उनके श्रम अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करता है।
  • इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइज़ेशन (2025): आईएलओ ने प्लेटफॉर्म आधारित अर्थव्यवस्था में सम्मानजनक कार्य (Decent Work) के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक तय करने पर औपचारिक चर्चा शुरू की है। इसका मुख्य ध्यान उचित वेतन, सुरक्षित कार्य परिस्थितियाँ और श्रमिक अधिकारों को सुनिश्चित करने पर है।

 

  • अन्य चुनौतियाँ: अनियमित कार्य समय के कारण मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ; लैंगिक मुद्दे, जैसे डिजिटल साक्षरता की कमी और प्लेटफॉर्म के भीतर वेतन असमानता।

गिग वर्कर्स के कल्याण के लिए प्रारंभ की गई पहल

  • सामाजिक सुरक्षा संहिता (2020):
    • कल्याण / सामाजिक सुरक्षा कोष: प्लेटफॉर्म एग्रीगेटर कंपनियों को अपने वार्षिक टर्नओवर का 1–2% योगदान करना अनिवार्य है (जो गिग/प्लेटफॉर्म श्रमिकों को किए गए या देय भुगतान के 5% से अधिक नहीं होगा)। इस कोष का उपयोग जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा और पेंशन जैसी सुविधाएँ देने के लिए किया जाएगा।
    • राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड: यह सरकार को उपयुक्त योजनाएँ बनाने और उनके क्रियान्वयन की निगरानी के संबंध में सलाह देता है।
      • इसी प्रकार राज्यों में असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा बोर्ड की व्यवस्था भी की गई है।
    • लाभों की पोर्टेबिलिटी: ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण के माध्यम से आधार से जुड़ी एक विशिष्ट पहचान संख्या (UAN) दी जाती है। इससे गिग वर्कर्स को विभिन्न प्लेटफॉर्मों के बीच भी सामाजिक सुरक्षा लाभ प्राप्त करने की सुविधा मिलती है। यह पोर्टल असंगठित श्रमिकों के पंजीकरण और सहायता के लिए बनाया गया है।
      • ई-श्रम पोर्टल का मकसद अनऑर्गनाइज़्ड वर्कर्स को सेल्फ-डिक्लेरेशन बेसिस पर यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) देकर उन्हें रजिस्टर करना और सपोर्ट करना है।
    • शिकायत निवारण : गिग श्रमिकों के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन, कॉल सेंटर या सुविधा केंद्र की व्यवस्था, ताकि उनकी समस्याओं का समय पर समाधान किया जा सके।
    • सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ: इन योजनाओं के अंतर्गत जीवन बीमा, दिव्यांगता बीमा, स्वास्थ्य लाभ, मातृत्व लाभ, पेंशन आदि लाभ प्रदान किए जा सकते हैं: 
  • केंद्रीय बजट 2025-26 की घोषणा: गिग वर्कर्स को प्रधानमन्त्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) के तहत स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने की योजना। इससे लगभग 1 करोड़ गिग वर्कर्स को लाभ मिलने की संभावना है।
    • इस योजना के अंतर्गत कई प्रमुख प्लेटफॉर्म कंपनियाँ जैसे ज़ोमैटो, ब्लिंकिट, अर्बन कंपनी, उबर, अमेज़न, ओला, स्विगी आदि को शामिल किया गया है।
  • राज्य-स्तरीय पहल:  राजस्थान प्लेटफॉर्म-आधारित गिग कर्मकार (पंजीकरण और कल्याण) विधेयक, 2023; कर्नाटक प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स (सामाजिक सुरक्षा और कल्याण) विधेयक 2025; आदि।

गिग वर्कर्स की चुनौतियों के समाधान के उपाय

  • सामाजिक सुरक्षा संहिता का शीघ्र क्रियान्वयन: सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में शीघ्र लागू किया जाए। साथ ही प्रशासनिक तैयारियों को मजबूत किया जाए, असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स का लैंगिक आधार पर विभाजित डाटाबेस बनाया जाए तथा जागरूकता अभियान बढ़ाए जाएँ। यह सुझाव महिला सशक्तिकरण पर संसदीय समिति द्वारा भी दिया गया है।
  • सामाजिक सुरक्षा कवरेज को सुदृढ़ करना: गिग श्रमिकों की जरूरतों के अनुसार विशेष योजनाएँ बनाई जाएँ, ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण को व्यापक बनाया जाए, सामाजिक सुरक्षा कोष के उपयोग की नियमित निगरानी हो तथा स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाई जाए।
  • गिग अर्थव्यवस्था के आकार का सही आकलन: जनगणना और श्रम सर्वेक्षणों जैसे जनगणना, PLFS, NSS या अन्य में व्यक्तियों के विभिन्न व्यवसायों के साथ उनके गिग कार्य की स्थिति को भी दर्ज किया जाना चाहिए।
  • एल्गोरिथ्मिक संबंधी जवाबदेही और निष्पक्ष कार्य आवंटन: प्लेटफॉर्म कंपनियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि गिग श्रमिकों को आय, कटौतियों, रेटिंग और कार्य आवंटन से संबंधित डेटा तक आसान पहुँच प्राप्त हो, ताकि एल्गोरिथ्मिक पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।
  • वित्तीय योजना में सहयोग: गिग श्रमिकों के लिए कम लागत वाली आपातकालीन बचत योजनाएँ, पोर्टेबल सामाजिक सुरक्षा लाभ तथा बजट प्रबंधन और वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम उपलब्ध कराए जाएँ।
  • अन्य उपाय: सेवा की शर्तों से संबंधित पारदर्शी नीतियाँ, समावेशी सामाजिक संवाद, सामूहिक सौदेबाजी और यूनियन बनाने का अधिकार सुनिश्चित करना।

निष्कर्ष

सामाजिक सुरक्षा सहिंता के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए RAISE (Raise) नामक पाँच-आयामी दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है: जिसमें R (Recognise) -कार्य की विविध प्रकृति को पहचानना, A (Augment) -सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना, I (Incorporate)- प्लेटफॉर्म और श्रमिक दोनों के हितों को शामिल करना, S (Support)- कल्याणकारी कार्यक्रमों को समर्थन देना, E (Ensure)- लाभों की आसान और समान पहुँच सुनिश्चित करना शामिल है।

Explore Related Content

Discover more articles, videos, and terms related to this topic

RELATED TERMS

3

यूरोपियन यूनियन प्लेटफ़ॉर्म वर्कर्स डायरेक्टिव (2024)

यह यूरोपीय संघ का एक निर्देश है जिसका उद्देश्य उन गिग वर्कर्स की रोजगार स्थिति को सुधारना है जिन्हें गलत तरीके से स्व-नियोजित कर्मचारी के रूप में वर्गीकृत किया गया था, जिससे उनके श्रम अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।

ले राइडर (Le Rider Law)

स्पेन द्वारा 2021 में लाया गया कानून, जो फूड डिलीवरी करने वाले कुरियर कर्मचारियों को स्व-नियोजित ठेकेदार के बजाय कर्मचारी के रूप में मान्यता देता है।

RAISE (Raise) दृष्टिकोण

सामाजिक सुरक्षा संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पांच-आयामी दृष्टिकोण: R (Recognise) -कार्य की विविध प्रकृति को पहचानना, A (Augment) -सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना, I (Incorporate)- प्लेटफॉर्म और श्रमिक दोनों के हितों को शामिल करना, S (Support)- कल्याणकारी कार्यक्रमों को समर्थन देना, E (Ensure)- लाभों की आसान और समान पहुँच सुनिश्चित करना।

Title is required. Maximum 500 characters.

Search Notes

Filter Notes

Loading your notes...
Searching your notes...
Loading more notes...
You've reached the end of your notes

No notes yet

Create your first note to get started.

No notes found

Try adjusting your search criteria or clear the search.

Saving...
Saved

Please select a subject.

Referenced Articles

linked

No references added yet