प्रगति (PRAGATI) प्लेटफॉर्म की 50वीं बैठक (50th Meeting of PRAGATI) | Current Affairs | Vision IAS

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संक्षिप्त समाचार

01 Mar 2026
6 min

प्रगति/ PRAGATI (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) को 2015 में शुरू किया गया था। यह प्लेटफॉर्म प्रशासनिक प्रक्रिया में जवाबदेही, पारदर्शिता और समय पर निर्णय लेने की क्षमता को एकीकृत करता है।

प्रगति (PRAGATI) की मुख्य विशेषताएं

  • परिचय: यह एक बहुउद्देशीय और मल्टी-मॉडल प्लेटफॉर्म है। यह सरकार के सभी स्तरों तक व्याप्त व्यापक व तकनीक-सक्षम शासन तंत्र की पेशकश करता है।
  • 'टीम इंडिया' की भावना: प्रगति समीक्षा बैठकों की अध्यक्षता प्रधान मंत्री द्वारा की जाती है। इस बैठक में राज्यों के और केंद्रीय मंत्रालयों के साथ प्रत्यक्ष संवाद होता है।
  • प्रमुख शासन उपकरणों की मेजबानी: इसमें पीएम गति शक्ति, परिवेश (PARIVESH) और पीएम रेफरेंस पोर्टल जैसे महत्वपूर्ण उपकरण शामिल होते हैं।
  • वैश्विक मान्यता: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के सैद बिजनेस स्कूल के एक बाहरी अध्ययन ने प्रगति को एक वैश्विक बेंचमार्क और वास्तविक समय में परियोजना निगरानी के लिए "सत्य का एकल स्रोत" माना है।

प्रगति (PRAGATI) द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी भूमिका

  • सहकारी संघवाद का उदाहरण: इसने केंद्र और राज्यों को एक टीम के रूप में कार्य करने का अवसर प्रदान किया है। इसके माध्यम से मंत्रालयों और विभागों ने समस्याओं को सुलझाने के लिए एकजुट होकर कार्य किया है।
    • इसकी शुरुआत से लेकर अब तक, केंद्र सरकार के लगभग 500 सचिवों और राज्यों के मुख्य सचिवों ने प्रगति बैठकों में भाग लिया है।
  • परियोजना समाधान की उच्च दर: इसके जरिये विभिन्न परियोजनाओं में पहचानी गई लगभग 94% समस्याओं का समाधान किया गया है। इसके परिणामस्वरूप कार्यान्वयन में विलंब, लागत में वृद्धि और समन्वय में विफलता में कमी आई है।
  • लंबे समय से लंबित परियोजनाओं को गति देना: इसके उल्लेखनीय उदाहरणों में निम्नलिखित शामिल हैं:
    • जम्मू-उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक: 1994 में स्वीकृत इस परियोजना को 2025 में आरंभ किया गया है।
    • नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय विमान पत्तन और ब्रह्मपुत्र नदी पर बना बोगीबील रेल-सह-सड़क पुल आदि।

मकान सूचीकरण कार्य ( जनगणना का प्रथम चरण ): यह अभियान अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच सभी राज्यों और संघ राज्य-क्षेत्रों में संचालित किया जाएगा।

  • जनसंख्या की गणना ( जनगणना का द्वितीय चरण): मुख्य गणना फरवरी 2027 के लिए निर्धारित है।
    • संघ राज्यक्षेत्र लद्दाख व संघ राज्यक्षेत्र जम्मू-कश्मीर के हिमपात वाले गैर-समकालिक क्षेत्रों तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ दुर्गम क्षेत्रों में जनगणना सितंबर 2026 में ही पूरी कर ली जाएगी।

16वीं जनगणना (2027) की मुख्य विशेषताएं

  • भारत की पहली डिजिटल जनगणना: डेटा संग्रह के लिए प्रगणक (Enumerators) मुख्य रूप से मोबाइल ऐप का उपयोग करेंगे।
  • ऐतिहासिक जातिगत गणना: स्वतंत्र भारत में पहली बार सभी समुदायों की राष्ट्रव्यापी जातिगत गणना की जाएगी। यह गणना केवल SC और ST तक सीमित नहीं रहेगी। अंतिम बार ऐसी गणना 1931 में हुई थी।
  • डिजिटल विशेषताएं:
    • स्व-प्रगणना पोर्टल (Self-Enumeration Portal): एक सुरक्षित प्लेटफॉर्म होगा, जहां नागरिक स्वतंत्र रूप से स्वयं प्रश्नावली भर सकेंगे।
    • जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (CMMS): इस डिजिटल पोर्टल के माध्यम से पर्यवेक्षक तथा जिला अधिकारी जनगणना की प्रगति पर नजर रख सकेंगे। 
    • हाउसलिस्टिंग ब्लॉक (HLB) क्रिएटर: यह एक उपग्रह-आधारित वेब मैपिंग एप्लीकेशन है। यह प्रभारी अधिकारियों को सटीक डिजिटल गणना ब्लॉक्स बनाने में सक्षम बनाएगी।
  • सेवा के रूप में जनगणना (सेन्सस एज़ ए सर्विस: CaaS): यह मंत्रालयों को साक्ष्य आधारित नीतिगत नियोजन के लिए एक स्वच्छ, मशीन द्वारा पठनीय और खोजने योग्य डेटाबेस प्रदान करेगा।

न्यायालय ने किशोरों के बीच परस्पर सहमति से बने संबंधों में 'लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO)' के दुरुपयोग पर प्रकाश डाला है। न्यायालय ने केंद्र से व्यक्तिगत स्वतंत्रता और बाल संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए "रोमियो-जूलियट क्लॉज" पर विचार करने को कहा है।

निर्णय के मुख्य बिंदुओं पर एक नजर

  • कानून का दुरुपयोग: न्यायालय ने ऐसे मामलों की ओर ध्यान दिलाया जहां पीड़ित की आयु गलत बताई जाती है ताकि मामला पॉक्सो कानून के सख्त प्रावधानों के अंतर्गत आ जाए। साथ ही, ऐसे मामलों का भी उल्लेख किया गया जहां परिवारों ने युवाओं के आपसी संबंधों का विरोध करने के लिए इस कानून का उपयोग किया।
  • रोमियो-जूलियट क्लॉज की शुरुआत: इसका उद्देश्य उन वास्तविक सहमति वाले किशोर संबंधों को POCSO के कठोर प्रयोग से छूट प्रदान करना है, जहां दोनों पक्षों के बीच आयु का अंतर बहुत कम हो।
    • सहमति से बनाए गए संबंधों की उपेक्षा करने से किशोरों को गलत तरीके से कारावास की सजा हो सकती है।

डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) के अंतर्गत ‘लैंड स्टैक’ और ‘राजस्व शर्तों की शब्दावली’ (GoRT) का शुभारंभ किया गया।

लैंड स्टैक के बारे में

  • यह भूमि और संपत्ति अभिलेखों के लिए एक एकीकृत जीआईएस-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म है। यह सिंगापुर, यूनाइटेड किंगडम और फिनलैंड जैसे देशों की वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं से प्रेरित है।

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 'पंखुड़ी' (PANKHUDI) पोर्टल प्रारंभ किया है।

पंखुड़ी पोर्टल के बारे में

  • यह कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और साझेदारी को सुविधाजनक बनाने के लिए एकीकृत सिंगल-विंडो डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
    • यह प्लेटफॉर्म व्यक्तियों, अनिवासी भारतीयों (NRIs), गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), कॉर्पोरेट संस्थाओं और सरकारी संगठनों को एक मंच से जोड़ता है।
  • यह पोर्टल पोषण, स्वास्थ्य-देखभाल, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE), बाल कल्याण जैसे प्रमुख विषयगत क्षेत्रकों में स्वैच्छिक और संस्थागत योगदान को सरल और एकीकृत करता है।
  • उद्देश्य: महिला एवं बाल विकास से जुड़ी पहलों में बेहतर समन्वय, पारदर्शिता और हितधारकों की व्यवस्थित भागीदारी को मजबूत करना।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने “लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (IICDEM) 2026” में ECINET डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया।

  • इस प्लेटफॉर्म का शुरुआती संस्करण बिहार विधानसभा चुनाव  2025 के दौरान सफलतापूर्वक उपयोग किया जा चुका है।

 

 

 

 

 

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सत्य का एकल स्रोत (Single Source of Truth)

A concept in data management where all data related to a specific subject is stored in one place, ensuring consistency and accuracy. PRAGATI is described as a 'single source of truth' for real-time project monitoring.

वैश्विक बेंचमार्क (Global Benchmark)

A standard or point of reference against which performance or quality can be measured internationally. PRAGATI has been recognized by Oxford University's Saïd Business School as a global benchmark for real-time project monitoring.

पीएम गति शक्ति (PM Gati Shakti)

पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय अवसंरचना मास्टर प्लान है जिसका उद्देश्य विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी विभागों के बीच समन्वय और एकीकरण के माध्यम से रसद लागत को कम करना और परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना है।

Title is required. Maximum 500 characters.

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