चीन की जनसंख्या में लगातार चौथे वर्ष गिरावट आई है। 2025 में इसकी जनसंख्या 3.39 मिलियन घटकर 1.405 बिलियन रह गई, जबकि जन्मों की कुल संख्या गिरकर 7.92 मिलियन हो गई।
- "जनसांख्यिकीय शीतकाल" कहलाने वाली यह घटना अब केवल विकसित देशों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह तेजी से एक वैश्विक वास्तविकता बन रही है, जिसके 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना पर गहरे प्रभाव पड़ने वाले हैं।

जनसांख्यिकीय शीतकाल क्या है?
- अर्थ: यह एक ऐसे जनसांख्यिकीय चरण का वर्णन करता है जिसकी विशेषता जनसंख्या वृद्धि में निरंतर और संरचनात्मक गिरावट है।
- प्रमुख संकेतकों में शामिल हैं:
- जन्म दर का प्रतिस्थापन प्रजनन दर (Replacement rate of fertility - 2.1) से नीचे होना।
- विपरीत जनसंख्या पिरामिड (युवाओं के संकीर्ण आधार और वृद्ध वयस्कों के व्यापक शीर्ष के साथ सिकुड़ती, बुजुर्ग होती आबादी)।
जनसांख्यिकीय शीतकाल के कारण
- जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों में देरी: करियर की आकांक्षाएं और आर्थिक दबाव लोगों को शादी करने और माता-पिता बनने में देरी करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
- शहरीकरण: शहरी आवासीय क्षेत्र छोटे और अधिक महंगे होते हैं, जो बड़े परिवारों को और अधिक हतोत्साहित करते हैं।
- सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव: कार्यबल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और छोटे परिवार के मानदंडों की ओर झुकाव।
- परिवार नियोजन तक पहुँच: व्यक्तियों का अपने परिवार के आकार पर अधिक नियंत्रण होना।
- पुरानी नीतियां (Legacy Policies): उदाहरण के लिए, चीन में एक बच्चा नीति (One Child Policy)।
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की है कि स्कूलों में मासिक धर्म स्वास्थ्य (Menstrual Health) जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग है।

न्यायालय ने कक्षा 6 से 12 तक की किशोरियों के लिए स्कूलों में केंद्र की राष्ट्रीय नीति, 'स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता (MH) नीति' को पूरे भारत में लागू करने का भी निर्देश दिया है।
फैसले के मुख्य बिंदु:
- एक मौलिक अधिकार के रूप में मासिक धर्म स्वास्थ्य: संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत 'जीवन के अधिकार' में मासिक धर्म स्वास्थ्य का अधिकार शामिल है।
- अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) से जुड़ाव: मासिक धर्म स्वच्छता (MH) से जुड़े उपायों की अनुपलब्धता, स्कूलों में समान शर्तों पर भाग लेने के अधिकार को छीन लेती है।
- बालिका की गरिमा: गरिमा का अर्थ ऐसी जीवन-स्थितियों से होना चाहिए जो अपमान, कलंक और सामाजिक बहिष्कार से मुक्त हों।
- संरचनात्मक भेदभाव: सेनेटरी उत्पादों तक पहुँच न होना, अनुच्छेद 21A और शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत 'शिक्षा के मौलिक अधिकार' को प्रभावित करता है।
- अनिवार्य संस्थागत उपाय: सभी स्कूलों को पुरुष शिक्षकों और छात्रों को संवेदनशील बनाने (sensitization), लड़के-लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय, मुफ्त सेनेटरी नैपकिन (अधिमानतः वेंडिंग मशीन के माध्यम से), और समर्पित MHM (मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन) कॉर्नर उपलब्ध कराने चाहिए।