सुर्ख़ियों में क्यों?
भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने सैन्य क्वांटम मिशन नीति फ्रेमवर्क जारी किया। यह एक व्यापक दस्तावेज है। इसमें सशस्त्र बलों में क्वांटम प्रौद्योगिकियों को लागू करने से जुड़ी नीति और उसका कार्यान्वयन हेतु रोडमैप शामिल है।
सैन्य क्वांटम मिशन नीति फ्रेमवर्क के मुख्य बिंदु
- विजन: इसका उद्देश्य तीनों सेनाओं (थल सेना, जल सेना और वायुसेना) के बीच बेहतर तालमेल और एकीकरण सुनिश्चित करना है। इससे भविष्य के युद्धों में प्रौद्योगिकी के स्तर पर बढ़त हासिल की जा सकेगी और प्रौद्योगिकी-आधारित युद्ध के लिए पूरी तैयारी की जा सकेगी।
- नागरिक और सैन्य शासन में सहयोग: यह सहयोग राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) के अनुरूप है। इसका उद्देश्य विशेष शासी संस्थाओं के माध्यम से नागरिक शासन के स्तर पर अनुसंधान और इनका सैन्य क्षेत्र में उपयोग के बीच सहयोग सुनिश्चित करना है।
- राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का उद्देश्य अनुसंधान एवं विकास (R&D), अवसंरचना, स्टार्टअप्स और कुशल मानव संसाधन को शामिल करते हुए एक मजबूत राष्ट्रीय क्वांटम प्रणाली तैयार करना है। इसके लिए 2023–24 से 2030–31 तक लगभग ₹6,000 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है।
- NQM के प्रमुख क्षेत्र: यह मिशन क्वांटम प्रौद्योगिकी के चार महत्वपूर्ण स्तंभों को प्राथमिकता देता है:
- क्वांटम संचार
- क्वांटम कंप्यूटिंग
- क्वांटम सेंसिंग और मेट्रोलॉजी
- क्वांटम पदार्थ और उपकरण
सैन्य-क्षेत्रक में क्वांटम प्रौद्योगिकी के उपयोग
उपयोग के क्षेत्र | क्वांटम प्रौद्योगिकी की क्षमता | मौजूदा प्रौद्योगिकी की तुलना में लाभ |
नौवहन और पोजिशनिंग | इसमें अत्यधिक ठंडे (सुपर-कूल्ड) परमाणुओं के साथ एटॉमिक इंटरफेरोमेट्री तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे मिसाइलों और पनडुब्बियों के लिए अधिक सटीक दिशा-निर्देशन (नौवहन) संभव होता है। | यह प्रौद्योगिकी उपग्रह आधारित नौवहन प्रणालियों (जैसे GPS) पर निर्भरता को समाप्त करती है। गौरतलब है कि GPS आधारित प्रणालियां सिग्नल जैमिंग, स्पूफिंग और एंटी-सैटेलाइट हथियारों से बाधित हो सकती है। |
संवेदी और माप-विज्ञान (सेंसिंग और मेट्रोलॉजी) | इसमें क्वांटम मैग्नेटोमीटर (जैसे SQUID) और ग्रैवीमीटर का उपयोग किया जाता है, जो अत्यंत लघु चुंबकीय या गुरुत्वीय बदलावों का भी पता लगा सकते हैं। | यह तकनीक अत्यधिक संवेदनशील होती है, जिससे जल के नीचे छिपी पनडुब्बियों या जमीन के भीतर बनी संरचनाओं का भी पता लगाया जा सकता है, जिन्हें पारंपरिक सोनार और सामान्य चुंबकीय सेंसर आसानी से नहीं पकड़ पाते। |
युद्ध क्षमताएं | क्वांटम-सक्षम कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Quantum AI) की मदद से स्वचालित सैन्य ड्रोन और रोबोटिक प्रणालियों को शक्ति मिलती है। | यह तकनीक युद्धक्षेत्र से जुड़े जटिल आंकड़ों को पारंपरिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों की तुलना में कहीं अधिक तेज़ और प्रभावी तरीके से संसाधित करती है। |
क्वांटम इमेजिंग | एंटैंगल्ड फोटॉन और घोस्ट-इमेजिंग प्रौद्योगिकियों की मदद से कोहरे, धूम्र या अंधेरे में भी स्पष्ट चित्र प्राप्त किए सकते हैं। | यह तकनीक उन पारंपरिक ऑप्टिकल और थर्मल कैमरों से बेहतर है, जो कम रोशनी या व्यवधान वाले परिवेश में सही तरह से कार्य नहीं कर पाते। |
सुरक्षित संचार | क्वांटम-की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD) और एंटेंगलमेंट के सिद्धांत का उपयोग करके ऐसी एन्क्रिप्शन कुंजियां बनाई जाती हैं जिन्हें सैद्धांतिक रूप से हैक नहीं किया जा सकता। | यह उन पारंपरिक एन्क्रिप्शन पद्धतियों का विकल्प है, जो गणितीय जटिलता पर आधारित होते हैं और जिन्हें उन्नत कंप्यूटिंग शक्ति का उपयोग करके इंटरसेप्ट किए जा सकते हैं या पढ़ा जा सकता है। |
क्वांटम पदार्थ | यह प्रौद्योगिकी एयरोस्पेस क्षेत्रक के लिए बहुत मजबूत और खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढालने वाले पदार्थ विकसित करती है, जैसे-छलावरण क्षमता विकसित करना। | ये पदार्थ सामान्य और स्थिर मिश्रित पदार्थों से बेहतर होते हैं, क्योंकि ये अणु स्तर पर बदलाव कर सकती हैं और अत्यधिक प्रतिकूल परिवेश में भी ज्यादा टिकाऊ रहते हैं। |
चिप का निरीक्षण | इसमें क्वांटम सेंसर का उपयोग करके चुंबकीय "फिंगरप्रिंट" पढ़े जाते हैं, जिससे बिना नुकसान पहुँचाए विनिर्माण से जुड़ी खामियों या हार्डवेयर में छिपे "ट्रोजन" का पता लगाया जा सकता है। | इस तकनीक से माइक्रोचिप्स को बिना नुकसान पहुंचाए अत्यंत सटीक तरीके से जांच संभव होती है, जबकि पारंपरिक गहन निरीक्षण तरीकों में अक्सर चिप को तोड़ना या नुकसान पहुंचाना पड़ता है ताकि उसकी विश्वसनीयता की पुष्टि की जा सके। |
लॉजिस्टिक्स का अनुकूल उपयोग | यह जटिल अनुकूलन (ऑप्टिमाइज़ेशन) समस्याओं को हल करने के लिए क्वांटम एल्गोरिदम का उपयोग करता है, जैसे आपूर्ति श्रृंखला के मार्ग तय करना। | यह प्रौद्योगिकी बहुत बड़े डाटासेट्स और आपस में जुड़े कई कारकों को पारंपरिक सुपरकंप्यूटरों की तुलना में कई गुना तेज़ी से संसाधित करती है, जबकि पारंपरिक प्रणाली ऐसी जटिल संयोजनात्मक समस्याओं के समाधान में कठिनाई महसूस करती हैं। |
निष्कर्ष
भारत की क्वांटम आधारित सुरक्षा रणनीति में प्रौद्योगिकी द्वारा निगरानी, अनुसंधान में लचीलापन और आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा को एकीकृत किया जाना चाहिए। साथ ही वैश्विक साझेदारियों और घरेलू नवाचार का पूरा उपयोग किया जाना चाहिए। एक सक्रिय और बहुआयामी दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करेगा कि क्वांटम युग में राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत और चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनी रहे।