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संक्षिप्त समाचार

01 Mar 2026
6 min

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा तट से दो प्रलय मिसाइलों का प्रक्षेपण किया।

प्रलय मिसाइल के बारे में

  • यह स्वदेशी, अल्प दूरी की और सतह से सतह पर मार करने वाली अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल है। इसे विभिन्न प्रकार के वारहेड्स ले जाने और कई लक्ष्यों को भेदने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • इसे भारतीय सशस्त्र बलों के लिए DRDO ने विकसित किया है।
  • रेंज: 150 से 500 किमी। 

ध्रुव-एनजी/NG (नई पीढ़ी) ने बेंगलुरु में अपनी पहली उड़ान पूरी की।

ध्रुव-एनजी हेलीकॉप्टर के बारे में

  • प्लेटफॉर्म: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड का ALH ध्रुव स्वदेशी रूप से विकसित, दो इंजन युक्त बहु-भूमिका वाला हेलीकॉप्टर है।
  • संस्करण: ध्रुव-एनजी आधुनिक विमानन प्रणालियों से सुसज्जित नई पीढ़ी का असैन्य संस्करण है।
  • भूमिकाएं: इसे परिवहन, एयर एम्बुलेंस, आपदा राहत, पर्यटन और अन्य उपयोगी मिशनों के लिए डिज़ाइन किया गया है।

भारतीय थल सेना ने एक निजी रक्षा उपकरण निर्माता NIBE लिमिटेड के साथ ₹293 करोड़ के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। यह अनुबंध लंबी दूरी के उन्नत रॉकेट लॉन्चर सिस्टम 'सूर्यास्त्र' की आपूर्ति से संबंधित है। यह अनुबंध इजरायल के सहयोग से किया गया है।   

सूर्यास्त्र के बारे में

  • यह भारत का पहला 'मेड इन इंडिया' यूनिवर्सल मल्टी-कैलिबर रॉकेट लॉन्चर है।
  • यह 300 किलोमीटर तक की दूरी पर सटीक सतह-से-सतह पर मार करने में सक्षम है।
  • प्रमुख क्षमताएं:
    • यह अलग-अलग दूरी पर स्थित कई लक्ष्यों पर एक साथ हमला कर सकता है।
    • इसमें कई प्रकार के रॉकेट्स को एकीकृत कर फायर किया जा सकता है।
    • इसकी मारक क्षमता इतनी सटीक है कि इसमें 5 मीटर से भी कम का विचलन होता है।
    • यह 100 किलोमीटर तक लोइटरिंग म्यूनिशन दागने में सक्षम है।

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी रूप से विकसित तीसरी पीढ़ी की मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) का एक गतिशील लक्ष्य के खिलाफ सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया।

MPATGM के बारे में

  • यह कंधे से दागी जाने वाली पोर्टेबल मिसाइल प्रणाली है। इसे विशेष रूप से दुश्मन के टैंकों और बख्तरबंद वाहनों से निपटने के लिए तैयार किया गया है। 
  • इसमें निम्नलिखित अत्याधुनिक स्वदेशी प्रौद्योगिकियां शामिल हैं:
    • इमेजिंग इन्फ्रारेड (IIR) होमिंग सीकर, 
    • ऑल-इलेक्ट्रिक कंट्रोल एक्चुएशन सिस्टम,
    • अग्नि नियंत्रण प्रणाली।
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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 77वें गणतंत्र दिवस परेड (2026) के दौरान  लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (LR-AShM) का प्रदर्शन किया।  

LR-AShM के बारे में

  • यह भारत की पहली लंबी दूरी की हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है। इसे भारतीय नौसेना की 'कोस्टल बैटरी' (तटीय सुरक्षा) आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बनाया गया है।
  • इसकी मारक क्षमता लगभग 1,500 किलोमीटर है। यह स्थिर और गतिमान, दोनों लक्ष्यों को भेद सकती है।
  • यह अपनी तरह की पहली मिसाइल है जो स्वदेशी एवियोनिक्स सिस्टम और उच्च सटीकता वाले सेंसर से युक्त है।
  • गति: यह एक क्वासी-बैलिस्टिक पथ का अनुसरण करती है। यह मैक 10 की अधिकतम गति प्राप्त कर सकती है। यह हवा में 'स्किपिंग प्रक्रिया' के माध्यम से औसत मैक 5 की गति बनाए रखती है।
  • प्रणोदन: यह द्वि-चरणीय ठोस प्रणोदन प्रणाली द्वारा संचालित है। दूसरे चरण के समाप्त होने के बाद बिना शक्ति (ईंधन) के ग्लाइड करते हुए आवश्यक दिशा परिवर्तन करती है।
  • स्टील्थ क्षमता: रडार से पकड़े जाने से बचने के लिए यह कम ऊंचाई पर और अत्यंत उच्च गति से उड़ान भरती है। इससे दुश्मन के लिए इसे इंटरसेप्ट करना लगभग असंभव हो जाता है।

भारत का पहला ‘मेड इन इंडिया’ C-295 विमान सितंबर 2026 से पहले तैयार हो जाएगा।

  • यह विमान वडोदरा में स्थित एयरबस–टाटा फाइनल असेंबली लाइन में बनाया जा रहा है।

C-295 विमान के बारे में:

  • यह मध्यम दूरी का परिवहन विमान है। इसमें दो इंजन लगे होते हैं। यह एक टर्बोप्रॉप सामरिक परिवहन विमान है।
  • यह एक अत्याधुनिक सामरिक विमान है। यह लगातार 11 घंटे तक उड़ान भर सकता है।
  • अन्य महत्वपूर्ण विशेषताएं: इसमें छोटे रनवे  से उड़ान भरने और उतरने की क्षमता (STOL) है।  

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अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल

यह बैलिस्टिक मिसाइलों की तरह पूरी तरह से अप्रत्याशित प्रक्षेपवक्र का पालन नहीं करती है, बल्कि अपनी उड़ान के कुछ हिस्सों में युद्धाभ्यास करने की क्षमता रखती है। यह इसे दुश्मन के मिसाइल रक्षा प्रणालियों द्वारा अवरोधन के लिए अधिक कठिन बनाती है।

प्रलय मिसाइल

यह एक स्वदेशी, अल्प दूरी (150-500 किमी रेंज) की, सतह से सतह पर मार करने वाली अर्ध-बैलिस्टिक मिसाइल है। इसे विभिन्न प्रकार के वारहेड्स ले जाने और कई लक्ष्यों को भेदने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो भारतीय सशस्त्र बलों की सामरिक क्षमताओं को बढ़ाता है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)

यह भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अधीन एक प्रमुख संगठन है, जिसका मुख्य कार्य रक्षा प्रणालियों के अनुसंधान और विकास पर ध्यान केंद्रित करना है। यह भारतीय सशस्त्र बलों के लिए विभिन्न प्रकार के हथियार प्रणालियों और प्रौद्योगिकियों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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