यह ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) की 64वीं उड़ान थी। साथ ही, न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) द्वारा संचालित 9वां समर्पित वाणिज्यिक मिशन था।
- NSIL को 2019 में स्थापित किया गया था। यह अंतरिक्ष विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत पूरी तरह से सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी है। यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो/ ISRO) की वाणिज्यिक शाखा है।
PSLV-C62 / EOS-N1 मिशन के बारे में
- इसमें EOS-N1 भू-प्रेक्षण उपग्रह के साथ घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों के 15 सह-यात्री उपग्रहों का प्रक्षेपण शामिल है।
- EOS-N1 को अंतरिक्ष-आधारित निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- यह स्पेनिश स्टार्ट-अप के KID (केस्ट्रल इनिशियल टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर) का भी प्रदर्शन करेगा।
- KID एक पुनर्प्रवेश यान का छोटा प्रोटोटाइप है, जो प्रक्षेपण के उपरांत दक्षिण प्रशांत महासागर में उतरने (Splashdown) के लिए पृथ्वी के वायुमंडल में फिर से प्रवेश करेगा।
- EOS-N1 और 14 सह-यात्री उपग्रहों को सूर्य तुल्यकालिक कक्षा (Sun Synchronous Orbit) में स्थापित किया जाना था। इसके अलावा, KID कैप्सूल को पुनर्प्रवेश प्रक्षेपवक्र (Re-entry Trajectory) में भेजा जाना था।
PSLV के बारे में
- यह तीसरी पीढ़ी का प्रक्षेपण यान है और तरल चरणों से युक्त होने वाला पहला भारतीय प्रक्षेपण यान है।
- इसरो का वर्कहॉर्स (Workhorse): इसने लगातार उपग्रहों को निम्न-भू कक्षा (LEO) में प्रक्षेपित किया है। यह 600 किमी की ऊंचाई वाली सूर्य तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षाओं में 1,750 किलोग्राम तक का पेलोड ले जा सकता है।
- PSLV के चरण:
- प्रथम चरण: इसमें S139 ठोस रॉकेट मोटर का उपयोग किया गया है, जिसे 6 ठोस स्ट्रैप-ऑन बूस्टर्स द्वारा शक्ति दी जाती है।
- द्वितीय चरण: इसमें विकास इंजन नामक 'अर्थ स्टोरेबल' तरल रॉकेट इंजन का उपयोग किया गया है, जिसे तरल प्रणोदक प्रणाली केंद्र ने विकसित किया है।
- अर्थ स्टोरेबल इंजन का तात्पर्य इंजन में प्रयोग होने वाले ऐसे ईंधन से है, जिसे पृथ्वी के सामान्य तापमान पर तरल अवस्था में रखा जा सकता है।
- तृतीय चरण: यह एक ठोस रॉकेट मोटर है, जो ऊपरी चरणों को उच्च थ्रस्ट (प्रणोद) प्रदान करता है।
- चतुर्थ चरण: यह PSLV का सबसे ऊपरी चरण है, जिसमें दो 'अर्थ स्टोरेबल' तरल इंजन लगे होते हैं।
- उल्लेखनीय मिशन: चंद्रयान-1, मंगल ऑर्बिटर मिशन (MOM), आदित्य-L1 और एस्ट्रोसैट मिशन। PSLV ने 2017 में एक ही मिशन में 104 उपग्रहों को प्रक्षेपित करके विश्व रिकॉर्ड बनाया था।
Article Sources
1 sourceपिक्सेल (Pixxel) के नेतृत्व वाले संघ ने भारत के पहले राष्ट्रीय भू-प्रेक्षण उपग्रह समूह के डिजाइन, निर्माण और संचालन के लिए IN-SPACe के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
- पिक्सेल के नेतृत्व वाले इस संघ में पियरसाइट स्पेस (Piersight Space), सैटश्योर एनालिटिक्स इंडिया (Satsure Analytics India) और ध्रुव स्पेस (Dhruva Space) शामिल हैं।

- भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) भारत की नोडल एजेंसी है। यह अंतरिक्ष संबंधी गतिविधियों में निजी क्षेत्रक की भागीदारी को अधिकृत, विनियमित और प्रोत्साहित करती है।
भू-प्रेक्षण उपग्रह समूह परियोजना की मुख्य विशेषताएं
- PPP मॉडल: इसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) फ्रेमवर्क के तहत निष्पादित किया जाएगा।
- यह परियोजना उपग्रहों की स्थापना से लेकर मूल्य वर्धित भू-स्थानिक विश्लेषण तक एक समग्र भू-प्रेक्षण तंत्र तैयार करेगी।
- उपग्रह समूह (Constellation): इसमें 12 उपग्रह शामिल होंगे। ये उच्च-रिज़ॉल्यूशन ऑप्टिकल, मल्टीस्पेक्ट्रल, सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) और हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग की सुविधा प्रदान करेंगे।
- परियोजना का व्यय: 5 वर्षों की अवधि में ₹1,200 करोड़ का निवेश।
- रणनीतिक बदलाव: अब राष्ट्रीय भू-प्रेक्षण अवसंरचना का निर्माण सरकार के साथ-साथ उद्योगों द्वारा भी किया जाएगा।
जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) के अवलोकनों के आधार पर, खगोलविदों ने डार्क मैटर का एक विस्तृत मानचित्र जारी किया है।

डार्क मैटर के बारे में
- यह पदार्थ का एक परिकल्पित रूप है जो अदृश्य है। हालांकि तारों, ग्रहों और चंद्रमाओं जैसे सामान्य पिंडों पर इसके गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के आधार पर इसके अस्तित्व का अनुमान लगाया जाता है।
- यह प्रकाश को उत्सर्जित, अवशोषित या परावर्तित नहीं करता है और सामान्य पदार्थ के साथ बहुत कम अभिक्रिया करता है।
- ब्रह्मांड की संरचना: ब्रह्मांड में सामान्य या दृश्यमान पदार्थ (5%), डार्क मैटर (27%) और डार्क एनर्जी (68%) शामिल हैं।
Article Sources
1 sourceWEF ने विश्व स्तर पर पांच नए 'चौथी औद्योगिक क्रांति (IR 4.0) केंद्रों' की घोषणा की है। इनमें से एक केंद्र भारत के आंध्र प्रदेश में भी स्थापित किया जाएगा।
- मुंबई और तेलंगाना के बाद यह भारत में इस तरह का तीसरा केंद्र होगा।
चौथी औद्योगिक क्रांति क्या है?
- इस शब्द का प्रतिपादन 2016 में विश्व आर्थिक मंच (WEF) के संस्थापक क्लाउस श्वाब ने किया था।
- IR 4.0 उस वर्तमान युग का वर्णन करता है जिसमें डिजिटल, भौतिक और जैविक तकनीकें आपस में मिल रही हैं, जैसे कि:
- AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता); रोबोटिक्स; इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT); क्वांटम कंप्यूटिंग आदि।
- पिछली क्रांतियों के विपरीत IR 4.0 भौतिक, डिजिटल और जैविक प्रणालियों के बीच की सीमाओं को अस्पष्ट कर रही है।
चौथी औद्योगिक क्रांति का महत्त्व

- आर्थिक संवृद्धि: यह स्वचालन, डेटा विश्लेषण और स्मार्ट विनिर्माण के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाती है तथा आपूर्ति श्रृंखलाओं को लचीला बनाती है।
- समावेशी विकास की क्षमता: यह भारत जैसे विकासशील देशों को पुरानी तकनीकों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने और डिजिटल पहुंच का विस्तार करने का अवसर प्रदान करती है।
- पर्यावरणीय संधारणीयता: यह स्मार्ट ग्रिड, परिशुद्ध कृषि (precision agriculture) और चक्रीय अर्थव्यवस्था के माध्यम से कम कार्बन उत्सर्जक एवं संसाधन-दक्ष विकास का समर्थन करती है।
- उदाहरण के लिए: "लाइटहाउस" कारखानों ने प्रिडिक्टिव एनालिटिक्स और IoT के माध्यम से CO2 उत्सर्जन एवं जल के उपयोग में महत्वपूर्ण कमी प्रदर्शित की है।
- लाइटहाउस कारखाने वे विनिर्माण केंद्र हैं, जो चौथी औद्योगिक क्रांति (IR 4.0) की तकनीकों को अपनाने में विश्व का नेतृत्व कर रहे हैं।
- उदाहरण के लिए: "लाइटहाउस" कारखानों ने प्रिडिक्टिव एनालिटिक्स और IoT के माध्यम से CO2 उत्सर्जन एवं जल के उपयोग में महत्वपूर्ण कमी प्रदर्शित की है।
- मानव पूंजी की केंद्रीयता: यह शारीरिक श्रम की बजाय कौशल, नवाचार और आजीवन सीखने पर ध्यान केंद्रित करती है।
चुनौतियां और जोखिम
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सरकार ने बैटरी पैक आधार प्रणाली के लिए मसौदा दिशा-निर्देश जारी किए।
बैटरी पैक आधार प्रणाली के बारे में:
- यह एक स्वदेशी डिजिटल पहचान और डेटा भंडारण प्रणाली है। इसे बैटरी की संपूर्ण उपयोग अवधि के दौरान शुरू से अंत तक ट्रेसेब्लिटी सुनिश्चित करने के लिए विकसित किया गया है।
- इसमें प्रत्येक बैटरी पैक के लिए एक विशिष्ट पहचान संख्या शामिल है। यह संख्या खनिजों के निष्कर्षण से लेकर अंतिम निपटान तक की महत्वपूर्ण जानकारी को रिकॉर्ड व स्टोर करती है।
- बैटरी की वे श्रेणियां, जिन्हें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के रूप में 'बैटरी पैक आधार' बनाए रखना अनिवार्य है, उनमें शामिल हैं:
- इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरियां; तथा
- औद्योगिक बैटरियां (जिनकी क्षमता 2kWh से अधिक हो)।
- महत्व: पुरानी बैटरियों का किसी अन्य उद्देश्य के लिए पुन: उपयोग सक्षम होगा; सरकारी विनियमों का पालन सुनिश्चित होगा; बैटरियों का कुशलतापूर्वक पुनर्चक्रण किया जा सकेगा आदि।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने घोषणा की है कि भारत में वाहन-से-वाहन (V2V) संचार प्रौद्योगिकी शुरू की जाएगी।
वाहन-से-वाहन (V2V) संचार प्रौद्योगिकी के बारे में:
- यह वाहनों के बीच संचार की एक प्रणाली है। इसमें वाहन आपस में सीधे संवाद करते हैं और इसके लिए सेलुलर नेटवर्क जैसे तृतीय-पक्ष नेटवर्क पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है।
- महत्व:
- सड़क सुरक्षा में वृद्धि करती है, क्योंकि यह वाहनों के आगे, पीछे और किनारों—तीनों दिशाओं में प्रभावी ढंग से कार्य करती है। यह भू-आकृति और सड़क के मोड़ों को भी ध्यान में रखती है। एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) को सशक्त बनाती है। इससे वाहन उन खतरों की भी चेतावनी साझा कर सकते हैं जो सीधे दिखाई नहीं देते।
- सड़क सुरक्षा में वृद्धि करती है, क्योंकि यह वाहनों के आगे, पीछे और किनारों—तीनों दिशाओं में प्रभावी ढंग से कार्य करती है। यह भू-आकृति और सड़क के मोड़ों को भी ध्यान में रखती है। एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) को सशक्त बनाती है। इससे वाहन उन खतरों की भी चेतावनी साझा कर सकते हैं जो सीधे दिखाई नहीं देते।
भारतीय वैज्ञानिकों ने सुपरकंप्यूटर आधारित पहली सिमुलेशन विकसित की है, जिससे पेम्बा प्रभाव को समझा और दर्शाया जा सका।
मपेंबा/पेम्बा प्रभाव के बारे में
- यह दीर्घकाल से चला आ रहा एक विरोधाभास है। इसके अनुसार कुछ विशेष परिस्थितियों में गर्म पदार्थ, ठंडे पदार्थों की तुलना में तीव्र गति से जम सकते हैं।
- यह प्रभाव विशेष रूप से जल में देखा गया है, लेकिन यह प्रभाव केवल जल तक सीमित नहीं है। यह प्रभाव अन्य पदार्थों तथा भौतिक प्रणालियों में भी दिखाई देता है।
- महत्त्व:
- ऊष्मा इंजन और प्रशीतन प्रणालियों में उपयोगी;
- क्वांटम कंप्यूटिंग में उपयोगी’
- पदार्थ विज्ञान में उपयोगी, आदि।
Article Sources
1 sourceराष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) के अनुसार, पिछले वर्ष दिसंबर से अब तक पश्चिम बंगाल से निपाह वायरस संक्रमण के केवल दो मामलों की पुष्टि हुई है।
निपाह वायरस के बारे में
- प्रकृति: ज़ूनोटिक वायरस (जो पशुओं से मनुष्यों में फैलता है)।
- संक्रमण के प्राकृतिक स्रोत: 'फ्रूट बैट', जिन्हें 'फ्लाइंग फॉक्स' के नाम से भी जाना जाता है।।
- संक्रमण के तरीके:
- जानवर से मनुष्य में: संक्रमित चमगादड़ों या सूअरों के प्रत्यक्ष संपर्क में आने से, या चमगादड़ों से संक्रमित कच्चे खजूर के रस (डेट पाम सैप) या फलों के सेवन से।
- मनुष्य से मनुष्य में: संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक द्रवों के निकट संपर्क से।
- पहली बार पहचान: 1999 में मलेशिया और सिंगापुर में हुए प्रकोप के दौरान (चमगादड़ → सूअर → मनुष्य)।
- लक्षण सामने आने की अवधि: 4–14 दिन।
- प्रारंभिक लक्षण: बुखार, सिरदर्द, खांसी, गले में खराश और सांस लेने में कठिनाई।
Article Sources
1 sourceशोधकर्ताओं ने दिल्ली के कुछ हिस्सों में घर के अंदर और बाहर दोनों वातावरणों में एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी 'स्टैफिलोकोक्सी' के उच्च स्तर पाए हैं।
स्टैफिलोकोकस के बारे में
- प्रकृति: ये ग्राम-पॉजिटिव कोक्सी (गोलाकार बैक्टीरिया) हैं, जो समूहों में पाए जाते हैं।
- इसे पहली बार वॉन रेकलिंगहौसेन (Von Recklinghausen) ने मनुष्यों में देखा था।
- ये पेनिसिलिन के प्रति सहनशीलता तथा एरिथ्रोमाइसिन, टेट्रासाइक्लिन और एमिनोग्लीकोसाइड्स जैसी चिकित्सकीय रूप से उपयोगी एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोध दर्शाते हैं।
- प्रकार: स्टैफिलोकोकस ऑरियस और स्टैफिलोकोकस एपिडर्मिडिस।