विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) | Current Affairs | Vision IAS
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गृह मंत्रालय के अनुसार, विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम के तहत पंजीकृत किसी भी व्यक्ति को कोई भी विदेशी अंशदान स्वीकार करने के लिए पूर्व अनुमति लेनी होगी।

  • अंशदान प्राप्त करने की वैधता अवधि 3 वर्ष होगी तथा उक्त अंशदान का उपयोग करने की वैधता अवधि 4 वर्ष होगी।

FCRA, 2010 के बारे में

  • उद्देश्य: विदेशी अंशदान या विदेशी आतिथ्य की स्वीकृति और उपयोग को विनियमित करने के लिए कानून को मजबूत करना तथा राष्ट्रीय हित के लिए हानिकारक किसी भी गतिविधि हेतु विदेशी अंशदान को प्रतिबंधित करना।
  • इसे FCRA, 1976 की जगह लागू किया गया है।
  • 2020 में किए गए संशोधन: 
    • एक NGO से किसी दूसरे NGO में धन के अंतरण पर रोक लगाई गई;
    • विदेशी धन के माध्यम से होने वाले NGO के प्रशासनिक खर्चों के लिए किए जाने वाले व्यय को 50% से कम कर 20% कर दिया है। (अर्थात् अब कुल प्राप्त विदेशी धन के 20% भाग को ही प्रशासनिक खर्चों के लिए व्यय किया जा सकता है।) 
    • विदेशी अंशदान प्राप्त करने पर प्रतिबंध: चुनावी उम्मीदवार, विधि निर्माता, राजनीतिक दल, लोक सेवक, न्यायाधीश आदि।

हाल ही में, वोलैटिलिटी इंडेक्स (India VIX) ने अब तक का सबसे अधिक एकदिवसीय उछाल दर्ज किया है।

इंडिया VIX के बारे में

  • यह बाजार में अस्थिरता (Market volatility) की एक माप है। इसे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) द्वारा निफ्टी ऑप्शंस के डेटा का उपयोग करके तैयार किया जाता है।
    • बीटा: समग्र बाजार के संबंध में किसी स्टॉक की अस्थिरता की माप है।
  • उच्च VIX मान पूर्वानुमानित अस्थिरता और अनिश्चितता में वृद्धि को दर्शाता है, जबकि निम्न VIX मान स्थिर बाजार को दर्शाता है।

प्रोजेक्ट वर्षा के अंतर्गत INS वर्षा 2026 तक बन कर तैयार हो जाएगा।

प्रोजेक्ट वर्षा के बारे में

  • यह एक नौसैनिक परियोजना है, जिसका उद्देश्य भारत की जल के भीतर परमाणु क्षमताओं को मजबूत करना है।
  • उद्देश्य: 12 से अधिक परमाणु ऊर्जा चालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों (SSBNs) के बेड़े को रखने के लिए एक सुरक्षित भूमिगत बेस विकसित करना।
  • स्थान: आंध्र प्रदेश का तटीय गांव रामबिल्ली।
  • पश्चिमी तट की सुरक्षा के लिए कर्नाटक के करवार बेस को प्रोजेक्ट सीबर्ड के तहत विकसित किया गया है, जो प्रोजेक्ट वर्षा के समान है। प्रोजेक्ट वर्षा पूर्वी तट की सुरक्षा के लिए है। 

चीन गैस हाइड्रेट्स का अध्ययन करने के लिए विश्व का पहला स्थायी अंडरसी रिसर्च स्टेशन बना रहा है। गैस हाइड्रेट्स एक संभावित ऊर्जा स्रोत है, जो फारस की खाड़ी के तेल भंडार से भी बड़ा हो सकता है।

गैस हाइड्रेट्स के बारे में

  • गैस हाइड्रेट्स जल और गैस से बने क्रिस्टलीय ठोस पदार्थ होते हैं, जिनमें अत्यधिक मात्रा में मीथेन गैस होती है।
  • इन्हें अपरंपरागत हाइड्रोकार्बन के रूप में वर्गीकृत किया गया है, क्योंकि इन्हें निकालने के लिए उन्नत और गैर-पारंपरिक प्रौद्योगिकियों की आवश्यकता होती है।
  • यह समुद्र नितल के ठीक नीचे कई सौ मीटर मोटी परत में मौजूद है तथा आर्कटिक में पर्माफ्रॉस्ट में भी पाया जाता है। 
  • भारत में: यह अंडमान द्वीप समूह के आसपास और कृष्णा-गोदावरी अपतटीय क्षेत्र में काफी मात्रा में मौजूद है।

IIT खड़गपुर ने तेल-जल पृथक्करण के लिए ऊर्जा-दक्ष ग्राफीन-आधारित प्रौद्योगिकी विकसित की है। यह प्रौद्योगिकी तेल रिसाव के प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।

ग्राफीन के बारे में

  • ग्राफीन कार्बन का एक अपरूप है।
  • इसमें कार्बन परमाणुओं की एकल परत (मोनोलेयर) होती है। ये परमाणु मधुमक्खी के षट्कोणीय छत्ते जैसी जाली में कसकर बंधे होते हैं।
  • गुण: ग्राफीन स्टील से लगभग 200 गुना अधिक मजबूत, हल्का और पारदर्शी होता है।
    • इसमें उच्च तन्यता, उच्च तापीय चालकता, लचीलापन आदि गुण होते हैं।
    • उपयोग: इलेक्ट्रॉनिक्स (जैसे माइक्रोचिप्स का निर्माण), ऊर्जा भंडारण (जैसे, बैटरी), जैव चिकित्सा क्षेत्रक आदि में।

भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) बेंगलुरु के शोधकर्ताओं ने भारत में निर्मित ऑर्गन-ऑन-चिप (OOC) विकसित की है। यह चिप द्रव और दवा की अंतर्क्रियाओं का अध्ययन करने में मददगार है। भारत इसका आयात करता है। 

ऑर्गन-ऑन-चिप के बारे में

  • यह एक छोटा व जैव-इंजीनियरिंग उपकरण है, जो लचीले पॉलिमर से बना है। यह सूक्ष्म स्तर पर मानव अंग की संरचना और कार्य की नकल करने में सक्षम है।
    • इसमें अलग-अलग अंगों के ऑन-चिप मॉडल तैयार किए गए हैं, जैसे: लंग्स-ऑन-चिप, लिवर-ऑन-चिप आदि।
  • इस चिप में छोटी-छोटी नलिकाएं होती हैं, जिनमें जीवित मानव कोशिकाएं होती हैं और वे आपस में क्रिया करती हैं, ठीक उसी तरह जैसे शरीर में असली ऊतक करते हैं।
  • इनमें रक्त जैसे तरल या दवाएं प्रवाहित करके यह देखा जाता है कि उनका कोशिकाओं पर क्या असर होता है।

स्मॉल हाइव बीटल (एथिनाटुमिडा) को भारत में पहली बार पश्चिम बंगाल में देखा गया। यह एक विदेशी या गैर-स्थानिक बीटल है। 

स्मॉल हाइव बीटल के बारे में

  • मूल स्थान: उप-सहारा अफ्रीका।
    • अफ्रीका में यह कम नुकसान करता है, लेकिन दूसरे क्षेत्रों में यह भारी तबाही मचाता है।
  • विशेषताएं: अंडाकार आकार, लाल-भूरा रंग और लंबाई 5 से 7 मिमी तक होती है। इसका जीवनचक्र अंडा, लार्वा, प्यूपा और व्यस्क के चरणों से गुजरता है।
  • नुकसान: स्मॉल हाइव बीटल की मादाएं मधुमक्खियों के छत्तों में दरारों और सुराखों से प्रवेश करती हैं और अंडे देती हैं। अंडों से निकलने वाले लार्वा संग्रहीत शहद, पराग और मधुमक्खियों के अंडों को खा जाते हैं, और छत्तों में मल त्यागते हैं। इससे शहद मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त हो जाता है।

ग्रामीण विकास और पंचायती राज पर संसदीय स्थायी समिति ने 'गांवों में गरीब और निराश्रित लोगों पर राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के प्रभाव' पर रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में बजट बढ़ाने और कार्यक्रम के बेहतर क्रियान्वयन की सिफारिश की गई है।

NSAP के बारे में

  • शुरुआत: इसे 1995 में शुरू किया गया था। 
  • प्रकार: यह शत-प्रतिशत केंद्र सरकार द्वारा वित्त-पोषित केंद्रीय प्रायोजित योजना (CSS) है।
  • उद्देश्य: वृद्धों, विधवाओं और दिव्यांगजनों तथा गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवनयापन करने वाले परिवारों के कमाने वाले सदस्यों की मृत्यु होने पर ऐसे परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान करना।
  • इसमें पांच योजनाएं शामिल हैं:
    • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना;
    • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना;
    • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांगता पेंशन योजना;
    • राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना; तथा 
    • अन्नपूर्णा योजना।
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